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    पर्वतीय महापरिषद ने मनाई रजत जयंती:लखनऊ में पारंपरिक पहाड़ी होली गायन का आयोजन

    2 hours ago

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    लखनऊ के गोमती नगर स्थित पर्वतीय महापरिषद भवन में रविवार को पहाड़ी संस्कृति का अनूठा रंग देखने को मिला। पर्वतीय महापरिषद उत्तर प्रदेश की रजत जयंती के अवसर पर पारंपरिक पर्वतीय शैली के होली गायन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में 'सिद्धि के दाता विघ्न विनाशन', 'होली खेलें गिरिजापति नंदन', 'शिव के मन माही बसे काशी' और 'हाँ हाँ मोहन गिरधारी' जैसे लोकप्रिय पारंपरिक होली गीत प्रस्तुत किए गए। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की ताल पर बैठकी होली और खड़ी होली का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने सभी श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। होली प्रेम और सौहार्द का पर्व है पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी ने सभी को होली की शुभकामनाएं दीं और सुख-शांति की कामना की। महासचिव महेंद्र सिंह रावत ने कहा कि होली प्रेम और सौहार्द का पर्व है, और इस विशिष्ट पहाड़ी शैली को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। मुख्य संयोजक टी.एस मनराल ने भी उपस्थित लोगों को बधाई दी। इस आयोजन की मुख्य विशेषता उत्तराखंड की पारंपरिक बैठकी होली के साथ खड़ी होली की प्रस्तुति रही। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए 43 होली गायन दलों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। हरीश सिंह बोरा के नेतृत्व में लोहाघाट-चम्पावत की होली विशेष रूप से प्रस्तुत की गई। इसके अतिरिक्त, कुमाऊं, गढ़वाल, जौनसार, रं समाज, जौहार और मुनस्यार क्षेत्रों के होली गीतों की शानदार झलक भी देखने को मिली। महिला कलाकारों को सम्मानित किया गया इस अवसर पर उत्तरायणी कौथिग (मेला)-2026 में झोड़ा नृत्य में भाग लेने वाली 45 झोड़ा टीमों की 900 महिला कलाकारों को सम्मानित किया गया। लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने सभी महिला कलाकारों को उपहार स्वरूप साड़ियाँ वितरित कीं। कार्यक्रम में संरक्षक, सलाहकार, महिला प्रकोष्ठ, युवा प्रकोष्ठ, सैनिक, धार्मिक और सांस्कृतिक प्रकोष्ठ सहित विभिन्न क्षेत्रीय इकाइयों और रामलीला समितियों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पहाड़ी संस्कृति और परंपरा से ओत-प्रोत यह आयोजन शहर में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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