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    प्रयागराज माघ मेला में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन:सरोज ढींगरा के नृत्य और भक्ति गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया

    13 hours ago

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    प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र स्थित सेक्टर-दो में सोमवार को 'चलो मन गंगा–यमुना तीर' कार्यक्रम के तहत सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम हुआ। इसमें दर्शकों ने शास्त्रीय नृत्य, लोकगीत और भक्ति संगीत का आनंद लिया। कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध नृत्यांगना सरोज ढींगरा और उनके दल की प्रस्तुति रही। उनकी नृत्य भंगिमाओं में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहराई और भावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति देखने को मिली। उन्होंने पारंपरिक नृत्य नाटिका के साथ समकालीन प्रयोगों का सुंदर संयोजन प्रस्तुत किया। सरोज ढींगरा के दल ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप में माखन चोरी की लीला को जीवंतता के साथ मंच पर उतारा। वहीं, भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य नृत्य-चित्रण में शक्ति, भक्ति और सौंदर्य का प्रभावशाली संगम दिखाई दिया। इसके बाद लोक और भक्ति गीतों की श्रृंखला में डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने 'हर-हर गंगे', 'नमो-नमो गंगे', 'मनवा मोरे भज ले रे तू राम' और 'संगम तीरे लागल माघ मेला' जैसे गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। रंजना मिश्रा ने 'डिमिक-डिमिक डमरू', 'गंगा रेती पे बंगला' और 'मोरा फागुन जिया बहके' जैसे गीतों से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। शास्त्रीय गायन में जलज श्रीवास्तव ने ठुमरी और पारंपरिक बंदिशों की प्रस्तुति देकर संध्या को विशेष ऊंचाई प्रदान की। संगत में हारमोनियम पर पंकज श्रीवास्तव, तबले पर वासुदेव पांडे और सिंथेसाइजर पर शीबू चतुर्वेदी ने साथ दिया। कार्यक्रम के दौरान ब्रह्मनाद कला महोत्सव के अंतर्गत आयोजित चित्रकला, नुक्कड़ नाटक और मूर्तिकला प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। केंद्र निदेशक श्री सुदेश शर्मा, कार्यक्रम सलाहकार श्रीमती कल्पना सहाय और संस्कार भारती संगठन मंत्री श्री दीपक शर्मा ने विजेताओं को पुरस्कृत किया। कार्यक्रम का संचालन आकाश अग्रवाल ने किया। माघ मेला की इस सांस्कृतिक संध्या ने प्रयागराज की कला परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
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