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    प्रयागराज संगम तट पर लोक संस्कृति का समागम:'चलो मन गंगा-यमुना तीर' में अवधी नृत्य, कथक और गायन ने बांधा समां

    11 hours ago

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    प्रयागराज उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) और संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “चलो मन गंगा–यमुना तीर” कार्यक्रम श्रृंखला के तहत सुर, ताल और लोक-रंगों के नाम रही। त्रिवेणी पुष्प के निकट गंगा की रेती पर सजी इस सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अवधी लोकनृत्य से हुई शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत अयोध्या से आईं प्रसिद्ध कलाकार संगीता आहूजा और उनके दल द्वारा प्रस्तुत अवधी लोकनृत्य से हुई। पारंपरिक वेशभूषा और जीवंत अंग-संचालन के साथ कलाकारों ने अवध की लोक-संवेदनाओं को मंच पर जीवंत कर दिया, जिससे पूरा वातावरण उल्लास से भर उठा। शाम्भवी शुक्ला के गीतों पर झूमे श्रोता सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण शाम्भवी शुक्ला का सुमधुर गायन रहा। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत कार्यक्रम के शीर्षक गीत “चलो मन गंगा यमुना तीर” से की। इसके बाद उन्होंने “गंगा की रेती पर छवा द बंगला” और “रंग डारूंगी मैं” जैसे गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। फागुन की आहट के बीच “जनि जा बरसाने होरी” और भक्ति रस से सराबोर “सजा दो घर को गुलशन सा” ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। अंत में “दमादम मस्त कलंदर” की ऊर्जावान प्रस्तुति पर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कथक की लयकारी और मीरजापुर के लोकगीत वाराणसी से आए अमृत मिश्रा एवं वसुंधरा ने कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनकी सधी हुई लयकारी और सूक्ष्म भाव-भंगिमाओं ने शास्त्रीय नृत्य की गरिमा को नई ऊंचाइयां दीं। वहीं, मीरजापुर के शिवलाल गुप्ता ने आंचलिक मिठास घोलते हुए “हमरे मीरजापुर में मस्ती के चाल बा” और “महिमा न जानो गंगा महरानी” जैसे लोकगीतों से समां बांध दिया। कलाकारों का सम्मान और गरिमामय उपस्थिति कार्यक्रम का कुशल संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा एवं प्रख्यात लोकगायक उदय चंद्र परदेशी ने सभी सहभागी कलाकारों को स्मृति स्वरूप पौधा भेंट कर सम्मानित किया। पर्यावरण संरक्षण के इस संदेश के साथ सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में कलाप्रेमी, संस्कार भारती के पदाधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
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