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    पोस्टपेड मीटर को प्रीपेड कर दिया, क्या करूं:बिना अनुमति ऐसा करने पर FIR होगी, UP के 70 लाख कस्टमर को फायदा

    11 hours ago

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    सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) ने नया बिजली कनेक्शन लेने पर प्रीपेड स्मार्ट मीटरों की अनिवार्यता खत्म कर दी है। मतलब नया बिजली कनेक्शन लेने पर आपको बताना होगा कि आप प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाना चाहते हैं, या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर। बिजली कंपनियां अपनी मर्जी से प्रीपेड मीटर नहीं लगा पाएंगी, न ही ऐसा करने के लिए आप पर दबाव बना पाएंगी। CEA ने 1 अप्रैल को अपने 4 साल पुराने आदेश में बदलाव किया है। इससे यूपी के 70 लाख उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा। आखिर स्मार्ट प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर क्या है? CEA को अपना आदेश क्यों बदलना पड़ा? प्रीपेड मीटर को लेकर आम लोगों को क्या परेशानी थी? स्मार्ट प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर में कौन ज्यादा फायदेमंद है? पढ़िए दैनिक भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल 1. प्रीपेड और पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में क्या फर्क है? जवाब. ये बिल्कुल आपके मोबाइल सिम के प्रीपेड और पोस्टपेड वर्जन जैसा ही है। जैसे प्रीपेड सिम इस्तेमाल करने के लिए पहले रिचार्ज कराना पड़ता है। इसके बाद ही आप कॉल या मैसेज कर सकते हैं। बैलेंस खत्म होने पर सारी सुविधाएं बंद हो जाती हैं। इसी तरह प्रीपेड स्मार्ट मीटर में रिचार्ज पहले करना पड़ता है। रिचार्ज खत्म होते ही बिजली कट जाती है। आप स्मार्ट मीटर एप के जरिए बिजली की रियल टाइम खपत, बैलेंस वगैरह देख सकते हैं। इस मीटर के लिए कोई सिक्योरिटी मनी भी डिपॉजिट नहीं करनी पड़ती। वहीं, पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में महीने के आखिर में बिल आता है। आप स्मार्ट मीटर के एप पर रोजाना बिजली खपत देख सकते हैं। लेकिन, भुगतान बिल जारी होने पर ही करना होता है। ऐसे कनेक्शन पर सिक्योरिटी के तौर पर 2 हजार रुपए जमा करने पड़ते हैं। सवाल 2. प्राधिकरण ने 4 साल पहले क्या आदेश जारी किया था? जवाब. प्राधिकरण ने 2022 के आदेश में कहा था कि नया कनेक्शन लेने वालों के घर पर अनिवार्य रूप से प्रीपेड स्मार्ट मीटर ही लगाए जाएं। हालांकि, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2003 की धारा 47(5) उपभोक्ता को अपनी सुविधा के हिसाब से प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुनने का ऑप्शन देती है। यूपी उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक, प्राधिकरण की अधिसूचना सीधे तौर पर एक्ट का उल्लंघन था। इसी वजह से देशभर में इसका विरोध हो रहा था। अब प्राधिकरण ने इस आदेश में बदलाव करके लोगों को प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुनने का अधिकार दिया है। सवाल 3. 70 लाख उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा? जवाब. यूपी पावर कॉरपोरेशन ने प्रदेश में अभी तक 75 लाख स्मार्ट मीटर लगाए हैं। इसमें 70 लाख पोस्टपेड और 5 लाख के प्रीपेड मीटर थे। 2022 के आदेश के बाद बिजली कंपनियों ने बिना उपभोक्ताओं की मर्जी के पुराने पोस्टपेड मीटरों को भी प्रीपेड मीटरों में बदल दिया। पोस्टपेड मीटर लगवाते समय जो 2 हजार रुपए की सिक्योरिटी डिपॉजिट किया गया था, उसका रिचार्ज बैलेंस डाल दिया। मैसेज करके उपभोक्ताओं को यह बात बता दी गई। बैलेंस खत्म होने पर लोगों के घरों की बिजली ऑटोमैटिक कट हो गई। ये परेशानी तब और बढ़ गई, जब रिचार्ज करने के बाद भी बिजली चालू नहीं हुई। ऐसा 5 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के साथ हुआ। प्राधिकरण के आदेश में बदलाव के बाद अब कंपनियों को सभी 70 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शन फिर से पोस्टपेड करने होंगे। सवाल 4. प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड कराने के लिए क्या करना होगा? जवाब. यूपी उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक, अपने प्रीपेड स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड कराने के लिए अपने इलाके के एक्सईन (अधिशासी अभियंता) को अर्जी देनी होगी। साथ ही केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की अधिसूचना का हवाला देकर या इसकी फोटोकॉपी भी लगानी होगी। पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के एवज में 2 हजार रुपए का सिक्योरिटी डिपॉजिट भी करना पड़ेगा। सवाल 5. अगर बिजली कंपनी पोस्टपेड में न बदले, तो क्या करें? जवाब. इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2003 की धारा 47(5) के तहत आप उपभोक्ता फोरम, यूपी विद्युत नियामक आयोग से शिकायत कर सकते हैं। यूपी उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक, वे भी ऐसे उपभोक्ताओं की पूरी मदद करने के लिए तैयार हैं। सवाल 6. नए कनेक्शन पर विभाग प्रीपेड मीटर लगाने का दबाव बनाए, तो क्या करें? जवाब. अगर नया बिजली कनेक्शन लेने पर बिजली विभाग का कर्मचारी प्रीपेड मीटर लगाने का दबाव बनाए, तो आप उसके खिलाफ अपने थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। विद्युत अधिनियम की धारा 47(5) उपभोक्ता को अपनी सुविधा के हिसाब से प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुनने का ऑप्शन देती है। इसका उल्लंघन व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन कहलाएगी। सवाल 7. आखिर स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर क्या परेशानी है? जवाब. उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा बताते हैं- जैसे मोबाइल में बैलेंस समाप्त होने पर बातचीत नहीं कर सकते, वैसे ही स्मार्ट मीटर का भी फंक्शन है। मोबाइल रिचार्ज करने पर तुरंत बातचीत शुरू हो जाती है, लेकिन प्रीपेड मीटर के साथ ऐसा नहीं हुआ। लोगों ने बैलेंस खत्म होने पर रिचार्ज किया, लेकिन उनकी बिजली चालू नहीं हुई। बिजली चालू होने में 2-4 घंटे से लेकर 2-4 दिन तक लग गए। ऐसा करीब 5 लाख उपभोक्ताओं के साथ हुआ। बिजली चालू कराने के लिए लोग दफ्तरों के चक्कर काटने पर मजबूर हो गए। बिजली हेल्पलाइन नंबर पर ऐसी शिकायतों की भरमार हो गई। इसके पीछे वजह सामने आई कि स्मार्ट मीटर को चलाने वाले मीटर मैनेजमेंट सिस्टम (MDM), हेड एंड सिस्टम (HES) और पावर कॉरपोरेशन के रेवन्यू मैनेजमेंट सिस्टम (RMS) आपस में कनेक्ट नहीं हो पा रहे थे। सवाल 8. MDM, HES और RMS स्मार्ट मीटर को कैसे कंट्रोल करता है? जवाब. मीटर मैनेजमेंट सिस्टम (MDM) स्मार्ट मीटर का सॉफ्टवेयर है। स्मार्ट मीटर का डेटा जैसे कितनी बिजली खर्च हुई, कब खर्च हुई और लोड वगैरह इसमें जमा होता है। इस डेटा के आधार पर MDM बिल तैयार करता है। फिर कंपनी को रिपोर्ट देता है। आम लोग इसके जरिए बिजली खपत का डेटा, बैलेंस अलर्ट, रिचार्ज हिस्ट्री वगैरह देख पाते हैं। हेड एंड सिस्टम (HES) स्मार्ट मीटर और MDM के बीच का ब्रिज है। ये नेटवर्क के जरिए स्मार्ट मीटर से डेटा लेता है। मीटर को रिचार्ज अपडेशन, कनेक्शन काटने या जोड़ने का कमांड भेजता है। उपभोक्ता जब एप से रिचार्ज करते हैं, तो HES ही मीटर में बैलेंस अपडेट करता है। रेवन्यू मैनेजमेंट सिस्टम (RMS) पावर कॉरपोरेशन की ओर से चलाया जाता है। बिलिंग, पेमेंट, रिचार्ज, डिस्कनेक्शन-रिकनेक्शन सब RMS ही हैंडल करता है। अगर किसी वजह से HES-MDM का कम्यूनिकेशन बिगड़ता है, तो रिचार्ज अपडेट नहीं होता। ऐसे में मीटर ऑफ रह जाता है। प्रदेश में जो 5 लाख उपभोक्ताओं को परेशानी हुई, ये इसी वजह से हुई थी। सवाल 9. प्रीपेड मीटर की इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए क्या हो रहा? जवाब. पावर कॉरपोरेशन कंपनियों ने इस तकनीकी गड़बड़ी को दूर करने के लिए RMS सिस्टम सॉफ्टवेयर अपडेट किया है। इसके लिए RMS सिस्टम 16 घंटे तक बंद रखा गया था। वहीं, HES और MDM का अपडेशन स्मार्ट मीटर लगाने वाली प्राइवेट कंपनियों के पास है। उनकी ओर से भी इसके सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर पर काम किया जा रहा है। एक्सपर्ट की मानें, तो स्मार्ट मीटर में लगे चाइनीज हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की वजह से ऐसा हुआ है, जबकि ऐसे स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक थी। पावर कॉरपारेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल ने इन खामियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं। ----------------------------- आपके विधायक को टिकट मिलना चाहिए या नहीं, सर्वे में हिस्सा लेकर बताएं यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… गंगा एक्सप्रेस-वे पर ड्राइवरों को नहीं आएगी झपकी, हर 75km पर सोने की जगह मिलेगी; मेरठ से 6 घंटे में पहुंचेंगे प्रयागराज यूपी में 594Km लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे लगभग तैयार हो चुका है। PM मोदी इसका उद्धाटन कर सकते हैं। पश्चिमी यूपी को पूर्वांचल से जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज की दूरी सिर्फ 6 घंटे में पूरी हो जाएगी। अब तक 11-12 घंटे लगते हैं। पढ़िए खास रिपोर्ट…
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