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    पत्रकारिता में AI तो आ गया विवेक कहां से लाओगे?:कानपुर यूनिवर्सिटी में एक्सपर्ट्स बोले- रोबोट खबर दे सकता है, संस्कार नहीं

    3 hours ago

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    हिंदी पत्रकारिता जगत के लिए यह गौरव का वर्ष है। 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने हिंदी का पहला अखबार 'उदंत मार्तण्ड' शुरू किया था। आज उस ऐतिहासिक शुरुआत को 200 साल पूरे होने जा रहे हैं। इसी उपलक्ष्य में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के पत्रकारिता विभाग ने एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें चीन और नेपाल समेत देश के बड़े मीडिया एक्सपर्ट्स ने शिरकत की और बदलते दौर की पत्रकारिता पर गहरा मंथन किया। कानपुर के सपूत ने कलकत्ता में रचा था इतिहास वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व कुलपति प्रो. राम मोहन पाठक ने बताया कि हिंदी पत्रकारिता की जड़ें कानपुर से ही जुड़ी हैं। 'उदंत मार्तण्ड' के संपादक पंडित जुगल किशोर शुक्ल मूल रूप से कानपुर के रहने वाले थे। उन्होंने कलकत्ता जाकर हिंदी पत्रकारिता की लौ जलाई थी। प्रो. पाठक के मुताबिक, यह संगोष्ठी उन पुराने पत्रों की याद दिलाती है जो आज सूचना के महासमुद्र में भटकते हुए पत्रकारों के लिए 'लाइट हाउस' यानी दीप-स्तंभ की तरह रास्ता दिखाने का काम कर रहे हैं। AI का दौर सुविधा के साथ खतरा भी, मानवीय विवेक जरूरी कार्यशाला में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर विस्तार से चर्चा हुई। जानकारों का मानना है कि AI ने काम को आसान तो बनाया है, लेकिन इसके पास 'ह्यूमन डिस्क्रीशन' यानी मानवीय विवेक नहीं है। पत्रकारिता का काम हर क्षण विवेक का होता है और यह प्रेरणा हमें अपनी परंपराओं से मिलती है। AI सूचना तो दे सकता है, लेकिन उसका सही चुनाव और नैतिकता का ध्यान केवल एक पत्रकार ही रख सकता है। चेक, री-चेक और क्रॉस-चेक का मंत्र प्रो. पाठक ने भगवान बुद्ध के 'सम्यक' मार्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि पत्रकारों को अपनी खबरों को लेकर 'चेक, री-चेक और क्रॉस-चेक' की पुरानी परंपरा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। तकनीक के युग में जहां सूचनाएं तेजी से फैलती हैं, वहां उनकी सत्यता की जांच करना और भी जरूरी हो गया है। तकनीक भले ही बदल जाए, लेकिन पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांत आज भी वही हैं जो 200 साल पहले थे। 130 रिसर्च पेपर्स और एक्सपर्ट्स का महामंथन मीडिया प्रभारी डॉ. दिवाकर अवस्थी ने बताया कि इस दो दिवसीय आयोजन में चीन से विवेक मणि त्रिपाठी और नेपाल से निर्मल मणि अधिकारी जैसे विशेषज्ञ ऑनलाइन जुड़े। वहीं, अमिताभ अग्निहोत्री, आशुतोष शुक्ला और डॉ. दिनेश पाठक जैसे अनुभवी पत्रकारों ने छात्रों को बदलते डिजिटल युग में करियर बनाने के गुर सिखाए। संगोष्ठी के दौरान लगभग 130 शोध-पत्र (Research Papers) पढ़े जा रहे हैं, जिनसे निकला निष्कर्ष पत्रकारिता जगत के लिए भविष्य में बेहद कारगर साबित होगा। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं।
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