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    PNG के दाम बढ़ने से पॉटरी उद्योग पर संकट:ईरान-इजरायल युद्ध के चलते 250 से अधिक यूनिट्स बंद

    8 hours ago

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    उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा स्थित एशिया के सबसे बड़े पॉटरी उद्योग पर इन दिनों गंभीर संकट मंडरा रहा है। ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) के दामों में भारी बढ़ोतरी के कारण यहां की 250 से अधिक पॉटरी इकाइयां बंद हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने बताया जा रहा है कि 4 मार्च से पहले पीएनजी की कीमत 49 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 119.90 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। गैस की किल्लत और अचानक हुई इस भारी मूल्य वृद्धि के कारण पीएनजी से चलने वाली अधिकांश पॉटरी यूनिट्स को उत्पादन बंद करना पड़ा है। होली के बाद से कई टनल पूरी तरह बंद पड़ी हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर बुलंदशहर के इस प्रमुख उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है। जापान और इंग्लैंड के बाद खुर्जा एशिया का सबसे बड़ा पॉटरी व्यवसाय केंद्र माना जाता है। यहां लगभग 300 से 325 पॉटरी यूनिट्स संचालित होती हैं, जिनमें करीब 30 से 40 हजार कुशल श्रमिक कार्यरत हैं। खुर्जा पॉटरी उद्योग से हर महीने देश और विदेश में लगभग 60 से 70 करोड़ रुपये का कारोबार होता है और यह उद्योग सरकार के खजाने में बड़ी मात्रा में टैक्स भी जमा करता है। हालांकि हालात बदलने के बाद गैस की कीमतों में तेजी से वृद्धि और आपूर्ति की समस्या के चलते उत्पादन ठप होने लगा है। खुर्जा पॉटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि राणा ने बताया कि एग्रीमेंट से अधिक पीएनजी का उपभोग करने पर कंपनी ने गैस के दामों में ढाई गुना तक बढ़ोतरी कर दी है। एग्रीमेंट के तहत निर्धारित खपत तक गैस का मूल्य 49 रुपये प्रति किलोग्राम है, लेकिन अतिरिक्त खपत होने पर यह दर 119.90 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इसके अलावा एलपीजी के दामों में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले एलपीजी की कीमत 61 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जिसे बढ़ाकर 93 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। गैस सप्लायर कंपनियों ने ई-मेल के माध्यम से उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी की आधिकारिक जानकारी दी है। गैस के दाम बढ़ने से उद्यमियों ने पॉटरी यूनिट्स को बंद कर मिट्टी के बर्तनों का उत्पादन रोक दिया है। उद्यमियों का आरोप है कि गैस सप्लायर कंपनियां मनमाने तरीके से कैलकुलेशन कर रेट तय कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि पॉटरी उद्योगों को चलाने के लिए केवल पीएनजी या कमर्शियल एलपीजी का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा मिट्टी का तेल, डीजल या कोयले के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे में 93 रुपये प्रति किलो की एलपीजी और 119.90 रुपये प्रति किलो की पीएनजी पर उत्पादन करना उद्यमियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। यही कारण है कि नई परिस्थितियों में कई उद्योगपति पॉटरी यूनिट्स को बंद करना ही बेहतर समझ रहे हैं।
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