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    PoK में सेना की घेराबंदी, राशन तक की चेकिंग:स्कूल-हॉस्पिटल बंद, लोग बोले- सरकार ने बात की, फिर इंडिया का एजेंट बता दिया

    8 hours ago

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    ‘हम इंडिया के एजेंट नहीं हैं, हम तो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं।’ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर, यानी POK से ये आवाजें ऐसे वक्त में आ रही है, जब वहां इंटरनेट बंद है। स्कूल नहीं खुल रहे, अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा, कामकाज ठप है। लोग राशन और दवाइयों तक के लिए परेशान हैं। 5 जून से यहां जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी, यानी JAAC की अगुवाई में प्रदर्शन चल रहे हैं। विधानसभा में कश्मीरियों के लिए आरक्षित 12 सीटें खत्म करने की मांग है। प्रदर्शन में तीन महीने में 100 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। लोगों का आरोप है कि कई इलाकों में रास्तों और जरूरी सामान की आवाजाही पर पाबंदी है। प्रोटेस्ट शुरू होने के बाद से ही राजधानी मुजफ्फराबाद, रावलकोट, पुंछ और कोटली में इंटरनेट-ब्रॉडबैंड सर्विस बंद कर दी गई। इससे प्रदर्शन की खबरें बाहर नहीं आ रही हैं। दैनिक भास्कर ने PoK में रहने वाले और प्रदर्शन में शामिल लोगों से बात की। चुनिंदा ऑफिसों और होटलों में स्लो इंटरनेट चल रहा है। इसका एक्सेस मिलने के बाद उन्होंने हमें ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड करके भेजे हैं। 1. आदिल हुसैन, पुंछ डिवीजन ‘सेना ने इलाका घेर लिया है, राशन और दवाइयां तक नहीं आ रहीं’ कोटली में रहने वाले आदिल हुसैन ने दावा किया कि पुंछ डिवीजन में हालात ज्यादा खराब हैं। वे कहते हैं, ‘इस इलाके के साथ जिस तरह बर्ताव किया जा रहा है, वह शायद फिलिस्तीन के साथ किए बर्ताव से भी बदतर है। चारों तरफ पुलिस और सेना के जवान मौजूद हैं। वे लोगों पर गोली चला रहे हैं। लगभग हर दिन कोई न कोई मारा जा रहा है।’ इंटरनेट पहले से बंद है। राशन और दवाइयों की सप्लाई भी रोक दी गई है। इस इलाके में आने वाला कोई शख्स परिवार के लिए थोड़ा सा राशन भी नहीं ले जा सकता। उसकी तलाशी ली जाती है। राशन ले लिया जाता है। आदिल आगे कहते हैं, ‘पेट्रोल, डीजल और बाकी जरूरी चीजों की सप्लाई भी रोक दी गई है। पूरे एरिया की घेराबंदी है। सेना का मूवमेंट और जिस तरह वे यहां घुसने की कोशिश कर रहे हैं, उसे देखते हुए डर है कि बहुत लोग मारे जा सकते हैं।' ‘यहां की पूरी आबादी JAAC के साथ खड़ी है और अपने हक के लिए लड़ रही है। दुनिया को इन हालात को इमरजेंसी की तरह देखना चाहिए। सरकार का भी यहां कंट्रोल नहीं दिख रहा है। लोगों का उनसे भरोसा उठ गया है।’ 2. ख्वाजा मुंतजिर, मुजफ्फराबाद डिवीजन ‘हमारे नेता दो महीने से गायब हैं, लोग डरकर घर में न बैठें’ प्रदर्शन में शामिल ख्वाजा मुंतजिर बताते हैं, ‘पुंछ और मुजफ्फराबाद डिवीजन के लोग लगभग ढाई महीने से सरकारी जबरदस्ती और जुल्म के खिलाफ लड़ रहे हैं। मुजफ्फराबाद से जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेता डॉ. आमिर साहब, दूसरे नेता और हमारे साथी दो महीने से ज्यादा वक्त से लापता हैं। उन्हें सिर्फ इसलिए सजा दी गई क्योंकि उन्होंने लोगों के हक के बारे में बात की।’ ‘वे कैद में हैं। बच्चों, परिवार और रिश्तेदारों से दूर हैं। हमारा फर्ज है कि हम उनके अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए आगे बढ़ें। मैं मुजफ्फराबाद डिवीजन के लोगों से अपील है कि वे सेना की मौजूदगी से पैदा डर और धमकी से न डरें। घर से बाहर आएं। जिंदगी और मौत अल्लाह के हाथ में है। जहां जिस समय लिखा है, वहीं होगी।’ 3. सरदान उमर नजीर कश्मीरी, रावलकोट ‘30 मई तक सरकार ने बात की, फिर हम भारत के एजेंट कैसे हो गए’ आंदोलन के खिलाफ सबसे बड़ा नैरेटिव यही है कि ये पाकिस्तान विरोधी या भारत समर्थित है। JAAC नेता सरदान उमर नजीर कश्मीरी इस आरोप को खारिज करते हैं। वे कहते हैं, ‘रावलकोट में हम लॉन्ग मार्च करने वाले थे, लेकिन उसे टाल दिया। लोग धरने पर बैठे हैं। फौज और पुलिस ने बार-बार ताकत का इस्तेमाल किया। करीब 100 लोग मारे गए। सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया।’ ‘सरकार ने आंदोलन को कमजोर करने और लोगों को इससे दूर करने के लिए हमारे खिलाफ बार-बार प्रोपेगेंडा चलाया कि यह अलगाववादी आंदोलन है। मीडिया ने भी यही नैरेटिव आगे बढ़ाया।’ ‘हम इस प्रोपेगेंडा या मीडिया चैनलों से डरे नहीं हैं। ऐसे चैनल झूठ फैलाते हैं और रावलकोट में बैठे प्रदर्शनकारियों का भारत से रिश्ता होने का दावा करते हैं। अगर ऐसा था, तो 30 मई तक पाकिस्तान सरकार हमारे साथ बैठकर बातचीत क्यों कर रही थी।' '30 मई को भी पाकिस्तानी मंत्री हमारे साथ बात कर रहे थे और अचानक पांच दिन बाद आपको याद आया कि जिन लोगों के साथ आप बातचीत कर रहे थे, वे भारतीय एजेंट हैं।’ 2023 से शुरू हुआ आंदोलन, 2024 में टकराव बढ़ा जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी अचानक बना संगठन नहीं है। 2023 में रावलकोट में कारोबारी, सिविल सोसायटी के लोग, छात्र और एक्टिविस्ट साथ आए और एक संगठन बनाया। शुरुआत में इसके प्रदर्शनों का बड़ा मुद्दा गेहूं की बढ़ती कीमतें था। 2024 में आंदोलन बड़ा हुआ। तब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव बढ़ा। तीन प्रदर्शनकारियों और एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई। 2025 में भी विरोध जारी रहा। 2026 में आंदोलन ज्यादा बड़ा हो गया। 5 जून 2026 को पाकिस्तान सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगाकर उसे आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। विरोध के बाद भी चुनाव, नवाज शरीफ की पार्टी जीती प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांगों में से एक POK विधानसभा की उन 12 सीटों को खत्म करना है, जो पाकिस्तान से बाहर रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। उनका तर्क है कि इन सीटों के जरिए PoK की राजनीति में ऐसे लोगों को जगह दी जाती है, जो अब PoK में नहीं रहते। POK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें 45 पर सीधे चुनाव होते हैं। बाकी सीटें आरक्षित हैं।
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