Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Prabhasakshi NewsRoom: April 2022 के बाद सीधे May 2026 में बढ़ीं Petrol-Diesel की कीमतें, 3 रुपए की वृद्धि पर Congress काट रही बवाल

    1 hour from now

    1

    0

    आखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका देशवासी पिछले कुछ समय से इंतजार कर रहे थे। पश्चिम एशिया संकट के कारण दुनिया भर की सरकारें पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी इजाफा कर चुकी थीं लेकिन मोदी सरकार ने एक रुपया भी नहीं बढ़ाया था। यही नहीं, हमारे कुछ पड़ोसी देशों में तो पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो या तीन बार वृद्धि हो चुकी है लेकिन भारत में अब जाकर तीन-तीन रुपए पेट्रोल और डीजल पर बढ़ाये गये हैं। खास बात यह है कि भारत दुनिया का शायद एकमात्र ऐसा देश है जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर थीं। हालांकि मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल दोनों में दो रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त कटौती की गई थी। आखिरी बार दरों में बढ़ोतरी अप्रैल 2022 में हुई थी। अब जो वृद्धि की गयी है उसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना तो बड़ा कारण था ही साथ ही कच्चे तेल के घटते घरेलू भंडार भी इसकी एक और वजह रहे। बताया जा रहा है कि फरवरी से अब तक भारत का तेल भंडार लगभग 15 प्रतिशत घटकर 107 मिलियन बैरल से 91 मिलियन बैरल के आसपास पहुंच गया है। इससे सरकार और तेल कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव पैदा हो रहा था।इसे भी पढ़ें: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग! 'जनता की जेब पर डाका और बढ़ेगी महंगाई', कांग्रेस का केंद्र पर तीखा हमलाइसलिए स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग, कार पूलिंग, घर से काम करने और ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा देने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री ने गैर जरूरी विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद से बचने का भी आग्रह किया है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके। किसानों से भी रासायनिक उर्वरकों का कम उपयोग करने और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई अपनाने की अपील की गई है।हम आपको यह भी बता दें कि तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 16 से 17 रुपए की वृद्धि की मांग की थी लेकिन मात्र तीन रुपए की वृद्धि की गयी है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में और वृद्धि की जायेगी? संभव है कि सरकार ने एक साथ बड़ा झटका देने की बजाय धीरे-धीरे पेट्रोल, डीजल की कीमतों में वृद्धि को मंजूरी दी हो। हम आपको यह भी बता दें कि घरेलू रसोई गैस एलपीजी की कीमतें मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाई गई थीं लेकिन वे अब भी वास्तविक लागत से काफी कम हैं।उधर, देशभर में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलएनजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों से लेकर उद्योग जगत तक की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल अब 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मूल्य वृद्धि की सबसे बड़ी वजह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। फरवरी के अंत से शुरू हुए अमेरिका, इजराइल और ईरान के संघर्ष ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता को बढ़ा दिया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कच्चे तेल परिवहन मार्गों में माना जाता है। संघर्ष के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत कई बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई और कुछ समय के लिए 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी चली गई थीं।भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। ऊर्जा बाजार से जुड़े आकलनों के मुताबिक होर्मुज क्षेत्र में व्यवधान के कारण खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। इससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।सरकारी तेल कंपनियां पिछले कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ खुद वहन कर रही थीं ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक भार न पड़े। लेकिन अब सस्ते भंडार समाप्त होने और लगातार बढ़ती लागत के कारण कंपनियों पर वित्तीय दबाव बहुत बढ़ गया है। उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 10 अरब रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने भी हाल में स्वीकार किया था कि सरकारी रिफाइनरियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा था कि तेल कंपनियां कब तक नुकसान सहन कर पाएंगी, यह चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्दी कम नहीं हुआ तो आने वाले समय में ईंधन कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।इस बीच, थोक महंगाई दर के आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ा दी है। अप्रैल में पेट्रोल महंगाई दर 32.4 प्रतिशत तक पहुंच गई थी जबकि हाई स्पीड डीजल की महंगाई दर 25.19 प्रतिशत दर्ज की गई थी। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने व्यापक महंगाई को और तेज कर दिया है। इससे परिवहन, विनिर्माण और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ने की आशंका है। भारत की खुदरा मुद्रास्फीति भी अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई जो मार्च में 3.40 प्रतिशत थी। वहीं थोक मुद्रास्फीति 42 महीने के उच्च स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई।उधर, कांग्रेस ने पेट्रोल एवं डीजल के दाम में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि इससे महंगाई बढ़ना तय है तथा आर्थिक विकास दर में गिरावट भी आएगी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम थी तो मोदी सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने की बजाय उन्हें लूटा। उन्होंने कहा कि अब जबकि विधानसभा चुनाव समाप्त हो चुके हैं, तो मोदी सरकार ने पहले वाणिज्यिक एलपीजी की कीमतें बढ़ाने के बाद अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी है। उन्होंने दावा किया कि इससे महंगाई और बढ़ना तय है, जो अब इस वित्त वर्ष में करीब छह प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। रमेश ने कहा कि विकास दर के अनुमान भी काफी कम हो जाएंगे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Delhi Weather Today: न्यूनतम पारा 26 डिग्री के पार, IMD ने जताई हल्की बारिश और आंधी की संभावना
    Next Article
    Fuel Price Hike पर पंजाब में सियासी उबाल, विपक्ष बोला- ये आम आदमी की कमर तोड़ने वाला फैसला

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment