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    राजभर बोले- मुझे नालायक कहने वाला करणी सेनाध्यक्ष मानसिक बीमार:मंत्री आशीष पटेल ने कहा- भाग नहीं पाएंगे; सूरजपाल ने साधा था निशाना

    9 hours ago

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    करणी सेना अध्यक्ष सूरजपाल सिंह ‘अम्मू’ के तेवरों ने यूपी की सियासत में नई हलचल शुरू हो गई है। अम्मू ने ऐलान किया कि करणी सेना भाजपा की गुलाम नहीं है। आगामी विधानसभा चुनाव में 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने भाजपा के सहयोगी सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर को 'नालायक' और अपना दल को 'सपना दल' कहकर भी हमला किया। इस पर अपना दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री आशीष पटेल ने चेतावनी दी- दोबारा ऐसी हरकत की, तो ऐसा जवाब देंगे कि भागने का रास्ता भी नहीं मिलेगा। वहीं, ओपी राजभर ने उन्हें मानसिक बीमार बताया। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, करणी सेना सत्ता में भागीदारी के लिए भाजपा पर दबाव बना रही है। वह चुनाव में बड़ी जीत भले न दर्ज कर पाए, लेकिन भाजपा के सवर्ण वोटबैंक में सेंध जरूर लगाएगी। पढ़िए ये रिपोर्ट… पहले जानिए करणी सेना अध्यक्ष ने क्या कहा था… करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह ‘अम्मू’ ने 7 जून को शाहजहांपुर में कहा था- अगले विधानसभा चुनाव में करणी सेना 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। हम बीजेपी के गुलाम नहीं हैं। हम किसी की राजनीतिक गुलामी नहीं करेंगे। जब राजभर जैसे नालायक व्यक्ति को आप मंत्री बना देते हो। अपना दल, सपना दल टाइप के लोगों को आप सीटें दे देते हो। हमारे साथ ब्राह्मण, बनिया हैं। 36 बिरादरी खड़ी है, हम लोग चुनाव नहीं लड़ सकते क्या? आशीष पटेल बोले- उन्हें भागने का रास्ता नहीं मिलेगा खुद को नालायक कहे जाने पर कैबिनेट मंत्री और सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर कहते हैं- करणी सेना अध्यक्ष मानसिक रूप से बीमार हैं। ऐसे लोगों के बारे में क्या टिप्पणी करें? वहीं, अपना दल पर अम्मू की टिप्पणी को लेकर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल काफी नाराज हैं। वह कहते हैं- यूपी का दबा-कुचला, वंचित समाज जाग चुका है। वह करणी सेना को जवाब देना जानता है। इस बार तो हम करणी सेना को छोड़ दे रहे, दोबारा ऐसी हरकत की तो वंचित समाज के लोग ऐसा जवाब देंगे कि भागने का रास्ता भी नहीं ढूंढ पाएंगे। इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- करणी सेना भाजपा को ही डेंट करेगी सीनियर जर्नलिस्ट सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं- करणी सेना के तमाम पदाधिकारी दूसरे दलों से चुनाव लड़ते रहे हैं। यह पहली बार है कि करणी सेना खुद चुनाव में उतरने का मन बना रही है। पिछले 3 साल में करणी सेना में ऐसे चेहरे शामिल हुए हैं, जो चुनाव लड़ सकते हैं। करणी सेना में अब केवल ठाकुर ही नहीं हैं। अयोध्या के कथावाचक राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए गए हैं, जो ब्राह्मण हैं। इसी तरह दूसरे लोगों को भी तैयार किया है। इससे भाजपा को सीधा नुकसान होगा। पूरी उम्मीद है कि वो प्रत्याशी खड़े करेंगे। हालांकि, करणी सेना ज्यादा वोट नहीं ले पाएगी। जो भी डेंट करेगी, वह भाजपा को ही करेगी। पश्चिमी यूपी, जहां मिहिरभोज की मूर्ति की स्थापना को लेकर जाट और ठाकुरों में विवाद हुआ था, वहां करणी सेना ज्यादा जोर लगा सकती है। करणी सेना के बड़े नेताओं को मैनेज कर सकती है भाजपा सीनियर जर्नलिस्ट सिद्धार्थ कलहंस बताते हैं- करणी सेना उसी तरह की राजनीति करती है, जो भाजपा और उसके अलग-अलग संगठन अब तक करते आ रहे हैं। करणी सेना अब सरकार में भागीदारी चाहती है।इसी वजह से वह भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अगर भाजपा को लगा कि करणी सेना यूपी चुनाव में नुकसान कर सकती है, तो पार्टी उसके बड़े नेताओं को मैनेज कर सकती है। फिल्म ‘पद्मावत’ विवाद से सुर्खियों में आए अम्मू करणी सेना और उसके अध्यक्ष सूरजपाल सिंह 'अम्मू' 2017-18 में फिल्म 'पद्मावत' के विरोध के दौरान चर्चा में आए थे। संगठन ने फिल्म पर इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए देशभर में प्रदर्शन किए। इसी दौरान अम्मू ने एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण और डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को लेकर विवादित बयान दिए थे। गुरुग्राम समेत कई जगह हिंसा हुई थी। जनवरी- 2018 में अम्मू को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। अम्मू अक्सर हिंदुत्व, राजपूत गौरव, लव जिहाद और इतिहास संरक्षण जैसे मुद्दों पर आक्रामक बयान देते रहे हैं। अम्मू का दावा है कि उनका संगठन किसी को हराने-जिताने की ताकत रखता है। करणी सेना का विवादों से पुराना नाता करणी सेना की स्थापना 2006 में लोकेंद्र सिंह कालवी ने जयपुर में की थी। इसका नाम राजस्थान की कुलदेवी करणी माता पर रखा गया था। शुरू में यह संगठन राजपूत आरक्षण और इतिहास संरक्षण पर केंद्रित था। लेकिन, जल्दी ही फिल्मों और सामाजिक मुद्दे उठाकर चर्चा में आया था। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूपी विधानसभा चुनाव 3 महीने पहले हो सकते हैं, जनगणना-बोर्ड परीक्षाएं वजह; भाजपा या सपा, किसे मिलेगा फायदा संभावना जताई जा रही है कि चुनाव दिसंबर महीने के अंत या जनवरी के शुरुआती हफ्तों में हो सकता है। यानी 3 महीने पहले चुनाव हो सकते हैं। अगर आयोग ने समय से पहले चुनाव का फैसला लिया, तो इस बार अंतिम वोटर लिस्ट नवंबर तक प्रकाशित कर दी जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
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