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    'रक्तरंजित भारत' किताब पर शोधकर्मियों ने साझा किए विचार:औरैया में विद्वानों ने पीएफआई और आतंकवाद पर की बात

    12 hours ago

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    औरैया के दिबियापुर कस्बे में प्रज्ञा प्रवाह की कानपुर प्रांत इकाई, ब्रह्मावर्त परिषद के शोध/अध्ययन केंद्र ने एक विशेष पुस्तक एवं विषय परिचर्चा का आयोजन किया। इस दौरान चर्चित पुस्तक 'रक्तरंजित भारत' पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रोफेसर रजत दुबे ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए इसके विभिन्न अध्यायों, पीएफआई की कार्यप्रणाली और वर्तमान भारत में आतंकवाद के खतरों पर प्रकाश डाला। पुस्तक के लेखक और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली के निदेशक विनय सिंह ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने बताया कि पुस्तक लिखने की प्रेरणा पीएफआई और उसके इतिहास से मिली, जो सिमी का नया रूप माना जा सकता है। विनय सिंह ने चेतावनी दी कि पीएफआई आज भी नए रूपों में उभरने का प्रयास कर रहा है और इसके लिए आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और तकनीक का उपयोग कर रहा है। उन्होंने सरकार और समाज दोनों से सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। आतंकवाद और सामाजिक जिम्मेदारी पर चर्चा परिचर्चा के दौरान आतंकवाद समेत अन्य बड़ी समस्याओं के समाधान पर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए विनय सिंह ने कहा कि सरकार और जागरूक समाज मिलकर इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की सीमाएं होती हैं। एक सजग और सक्रिय समाज स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। परिचर्चा में प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्रीय संयोजक भगवती प्रसाद राघव और अखिल भारतीय टोली के सदस्य भी ऑनलाइन शामिल हुए। भारत का विभाजन और विद्वानों की राय नगर पंचायत सभागार में आयोजित परिचर्चा का उद्घाटन प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत संयोजक मुनीश त्रिपाठी ने अतिथियों का परिचय कराते हुए किया। पहले सत्र के बाद दूसरे सत्र में विषय था 'भारत का विभाजन क्यों हुआ', जिसमें डॉ. अनुरुद्ध प्रताप भंवर, प्रो. कौशलेन्द्र तिवारी, सुबेन्द्र सिंह, कमलेश तिवारी, मनीष यादव, सत्या राजपूत, संदीप शर्मा, देवेंद्र राजपूत, सुधाकर भट्ट, विनीत त्रिपाठी, सुशांत नवीन तिवारी और चिंतन सहित कई विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। परिचर्चा का संचालन प्रांत सह संयोजक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने किया। परिचर्चा के अंतिम सत्र में कवि अरुण दीक्षित ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। जिला संयोजक आशीष मिश्रा ने उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।
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