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    राम मंदिर का 500 साल का इतिहास अब होगा डिजिटल:ब्रिटिश काल से लेकर अब के अदालतों के साक्ष्य देख सकेंगे श्रद्धालु

    17 hours ago

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    राम भक्तों को अब श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े पांच सौ वर्षों के इतिहास का डिजिटल संस्करण देखने का अवसर मिलेगा। इस पहल के तहत ब्रिटिश काल से लेकर स्वतंत्र भारत में सिविल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत प्रमाणित साक्ष्यों, दस्तावेजों और ऐतिहासिक अभिलेखों को डिजिटाइज कर संरक्षित किया जा रहा है। लंबे शोध के बाद जुटाए गए ये दस्तावेज अब तक कोर्ट प्रॉपर्टी होने के कारण आम लोगों की पहुंच से बाहर रहे हैं। 10 हजार पन्नों की पत्रावली में छिपे साक्ष्य 9 नवंबर 2019 के ऐतिहासिक फैसले की प्रति वरिष्ठ अधिवक्ता केवल पारासरन ने प्राप्त कर अयोध्या में रामलला को समर्पित की थी। पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ के 1045 पन्नों के फैसले के साथ लगभग 10 हजार पन्नों की पत्रावली में पुरातात्विक, ऐतिहासिक और गवाही संबंधी दस्तावेज शामिल हैं। फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट, वाल्मीकि रामायण और स्कंद पुराण जैसे स्रोतों का उल्लेख किया गया है। निर्णय में 2.77 एकड़ विवादित भूमि रामलला विराजमान को देने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि देने का आदेश हुआ। अदालती मुकदमों का क्रम और निर्णायक मोड़ जनवरी 1950 में गोपाल सिंह विशारद ने पहला मुकदमा दायर किया, इसके बाद महंत रामचंद्र दास परमहंस, 1959 में निर्मोही अखाड़ा और 1960 में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पक्षकार बने। 1989 में सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवकीनंदन अग्रवाल ने ‘नेक्स्ट फ्रेंड’ के रूप में रामलला की ओर से वाद दायर किया, जो अंतिम निर्णय का आधार बना। डिजिटलीकरण पर विहिप की टीम कर रही काम अधिवक्ता केपी सिंह के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम दस्तावेजों को स्कैन कर कंप्यूटरीकृत कर रही है। पुराने अभिलेखों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष रसायनों का उपयोग भी किया जा रहा है, ताकि ऐतिहासिक रिकॉर्ड दीर्घकाल तक संरक्षित रह सकें। अनुवाद के कारण वर्षों तक अटका रहा मामला 2010 में तीन जजों की पीठ के फैसले के बाद सभी पक्षों ने अपील दायर की, लेकिन विभिन्न भाषाओं के दस्तावेजों के अंग्रेजी अनुवाद में देरी के कारण सुनवाई वर्षों तक लंबित रही। बाद में राज्य स्तर पर पहल होने के बाद अनुवाद सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराए गए और सुनवाई आगे बढ़ सकी। अयोध्या में चल रहे सुरक्षा और बुनियादी ढांचा विकास जैसे हाईटेक परिधि दीवार और ग्रीनफील्ड टाउनशिप के साथ अब यह डिजिटल इतिहास परियोजना श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं को राम मंदिर आंदोलन के दस्तावेजी आयाम से भी जोड़ने वाली मानी जा रही है।
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