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    राममंदिर चढ़ावा चोरी-आरोपी के खाते में ₹7.32 लाख मिले:रमाशंकर का परिवार बोला- सैलरी बचाई; सुभाष के बेटे ने कहा- जाओ, नहीं तो पुलिस बुलाएंगे

    19 hours ago

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    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों में रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव भी शामिल हैं। दैनिक भास्कर की टीम दोनों के घर पहुंची, उनके परिवार और पड़ोसियों से बात की। रमाशंकर का परिवार अयोध्या में राम सखा बगिया मंदिर के 2 कमरों में रहता है। पुलिस को उसके बैंक खाते में 7.32 लाख रुपए मिले हैं। परिवार का दावा है कि यह रकम उसकी कई साल की बचाई हुई सैलरी है। दूसरी तरफ, सुभाष के घर पहुंचे तो उनके बेटे ने बात करने से मना कर दिया। मोहल्लेवालों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद से परिवार घर से बाहर नहीं निकला है। रमाशंकर के पिता मंदिर में पुजारी, इसलिए 2 कमरे रहने को मिले राम मंदिर से करीब 2 किलोमीटर दूर मीरापुर स्थित राम सखा बगिया मंदिर में रमाशंकर का परिवार रहता है। पिता छद्दू लाल मिश्रा पिछले करीब 30 साल से यहां पूजा-पाठ करते हैं। इसी वजह से उन्हें मंदिर परिसर में रहने के लिए 2 कमरे मिले हैं। वह हनुमानगढ़ी के पास भी एक छोटे मंदिर में कीर्तन करते हैं। परिवार में माता-पिता, भाई विवेक शंकर, भाभी साधना, उनका बच्चा और एक बहन रहती हैं। रमाशंकर ने 10वीं तक पढ़ाई की। करीब 5 साल पहले उसे राम मंदिर में नौकरी मिली। शुरुआत में वह मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की फोटो खींचकर भी कमाई करता था। बाद में उसकी ड्यूटी दानपात्रों को गणनास्थल तक पहुंचाने में लगा दी गई। भाभी बोलीं- उसने हमें कभी 10 रुपए तक नहीं दिए रमाशंकर की भाभी साधना ने बताया, "पुलिस जब उसे पकड़कर ले गई थी, तब घर की भी तलाशी ली गई, लेकिन कुछ नहीं मिला। पुलिस ने हमारे बैंक खाते और आधार की भी जांच की, वहां भी कुछ नहीं मिला।" उन्होंने कहा, ‘रमाशंकर ने हमें कभी 10 रुपए तक नहीं दिए। जरूरत पड़ती थी, तो उल्टा हमसे पैसे ले लेता था। अगर उसने चोरी की होती और पैसा घर लाया होता, तो हम आज भी 2 कमरों में क्यों रहते?’ बहन बोलीं- भाई सैलरी बचाता था, खर्च फोटोग्राफी की कमाई से चलता था रमाशंकर की बहन ने बताया कि परिवार की आर्थिक हालत हमेशा कमजोर रही है। पिता कीर्तन करके घर चलाते हैं। कई बार वह खुद सब्जी खरीदकर लाते थे, जिससे बेटे ज्यादा पैसे खर्च न करें। जब उनसे खाते में मिले 7.32 लाख रुपए के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मेरा भाई पिछले 5-6 साल से राम मंदिर में नौकरी कर रहा था। उसे 15-16 हजार रुपए महीना सैलरी मिलती थी। वह पूरी सैलरी बैंक में जमा कर देता था।’ पिछले डेढ़ साल में बदली थी रमाशंकर की लाइफस्टाइल आसपास के लोगों का कहना है कि पिछले एक-डेढ़ साल में रमाशंकर की लाइफस्टाइल बदल गई। वह अक्सर नए कपड़े और सफेद गमछे में नजर आता था। दूसरे आरोपियों अनुकल्प, अवनीश और लवकुश के साथ ज्यादा रहता था। पिछले डेढ़ साल से वह परिवार के साथ भी नहीं रह रहा था। भाई का एक्सीडेंट होने पर भी कोई मदद नहीं की, जबकि उसके खाते में लाखों रुपए थे। वह कहां रहता था, इस बारे में परिवार के लोग भी कुछ साफ नहीं बता रहे। पुलिस अब उसके बैंक खातों में आए पैसों की जांच कर रही है। बेटे ने कहा- यहां से चले जाइए, नहीं तो पुलिस बुला लेंगे राम मंदिर से करीब 5 किलोमीटर दूर अंजनीपुरम कॉलोनी में सुभाष चंद्र श्रीवास्तव का घर है। डोरबेल बजाने पर उनके बेटे ऋषभ ने पूछा, "कौन?" मीडिया का नाम सुनते ही बोले, "आप यहां से चले जाइए, हम कोई बात नहीं करेंगे। अगर आप लोग नहीं गए, तो हम पुलिस को बुला लेंगे।" बिना सैलरी कैश काउंटिंग की जिम्मेदारी संभालने का दावा सुभाष चंद्र श्रीवास्तव SBI के रिटायर कर्मचारी हैं। पिछले करीब डेढ़ साल से वह राम मंदिर में दान राशि की गिनती के प्रभारी थे। उनकी जिम्मेदारी दानपात्रों से निकले कैश की गिनती की निगरानी करना और रकम SBI को सौंपना थी। इसी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप में उन्हें साजिश का आरोपी बनाया गया है। लोगों ने दावा किया कि सुभाष लंबे समय से RSS से जुड़े रहे हैं। राम मंदिर बनने के बाद सेवा भाव से बिना वेतन यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पहले भी गबन के आरोप लगे, कोर्ट से बहाल हुई थी नौकरी मोहल्ले के लोगों का कहना है कि सुभाष अपने काम से काम रखने वाले व्यक्ति हैं। SBI में नौकरी के दौरान उन पर एक बार गबन का आरोप लगा था, उन्हें सस्पेंड भी किया गया था। लेकिन, बाद में कोर्ट के आदेश पर उनकी नौकरी बहाल हो गई थी। अगर आरोप साबित होते, तो कोर्ट उन्हें बहाल नहीं करता। गिनती वाले कमरे में किसी को नहीं जाने देते थे मंदिर में दान राशि की गिनती से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि नोटों की गिनती पूरी होने के बाद अगर कोई कमरे में चला जाता था, तो सुभाष उसे डांटकर बाहर निकाल देते थे। उनकी मौजूदगी में बिना इजाजत कोई अंदर नहीं जा सकता था। केवल वही व्यक्ति अंदर जाता था, जिसे सुभाष खुद बुलाते थे। शुरुआती जांच में साजिश का आरोपी गिरफ्तार 8 लोगों में सिर्फ सुभाष के पास से कोई बरामदगी नहीं हुई है। आरोप है कि कर्मचारियों के साथ मिलकर सुभाष और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने दान राशि के गबन की साजिश रची। एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट में भी इसका जिक्र है। लेकिन, अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें- राममंदिर चढ़ावा चोरी- आरोपी का परिवार टूटे-फूटे घर में छिपा, पक्के मकान में ताला लगाया; भाई चिल्लाया- अकेला छोड़ दीजिए प्रतापगढ़ में एक मामूली कर्मचारी से कुछ ही महीनों में 2 मकानों के मालिक बने अविनाश शुक्ला की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। गांव के लोग उसकी अचानक बदली किस्मत से दंग थे। 4 जून को जब पुलिस ने उसके घर से 20.39 लाख रुपए और 1121 अमेरिकी डॉलर जब्त किए, तो सारे सवालों के जवाब मिल गए। पूरी खबर पढ़िए… -------------------------- ‘राम मंदिर चोरी वाला लवकुश तुम्हारे गांव का है न…’, लोग बोले- बदनाम कर दिया; दादी का आरोप- ठाकुरों ने हमारे घर में रुपए छिपाए राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का आरोपी लवकुश जेल में है और उसके परिवार की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। 7 जून के बाद से ही परिजन घर में कैद हैं। न कोई उनसे मिलने जाता है, न ही वे लोगों के सामने पड़ना चाहते हैं। कोई सीधे शब्दों में इस बात को कहता नहीं, लेकिन लवकुश के परिवार के लिए ‘सामाजिक बहिष्कार’ जैसा माहौल दिखा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
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