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    राममंदिर चढ़ावा चोरी-कविता सुनाकर चंपत के करीब पहुंचा अनुकल्प:गांववाले नाम सुनते ही दरवाजे बंद कर लेते हैं; दादा बोले- रामनाम की लूट में पकड़ाया

    22 hours ago

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    अनुकल्प को कविता पढ़ना-सुनना पसंद था। साल-2024 में वह अयोध्या के एक कवि सम्मेलन में मंच पर कविताएं पढ़ रहा था। चीफ गेस्ट थे चंपत राय, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव। उन्हें कविताएं बहुत पसंद आईं। यह पहला मौका था, जब चंपत ने अनुकल्प के सिर पर हाथ रखा। फिर क्या था, चंपत राय को ‘बाबूजी…बाबूजी’ कहकर अनुकल्प ने राम मंदिर में एंट्री ले ली। उनसे कहकर गणना कक्ष में अपनी ड्यूटी भी लगवाई। SIT रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर चढ़ावा से चोरी करके अनुकल्प ने धीरे-धीरे करोड़ों रुपए इकट्ठा किए। सिर्फ बैंक अकाउंट से 16.82 लाख रुपए मिले। मिल्कीपुर के गांव बसावां में अनुकल्प के दादा दैनिक भास्कर से कहते हैं- राम नाम की लूट थी, वो लूटने लगा तो पकड़ा गया…। अनुकल्प के परिवार से पूरे गांव में किसी के संबंध अच्छे नहीं हैं। गांव में उसके लिए अब नफरत है। लोग सिर्फ नाम सुनकर दरवाजे बंद कर लेते हैं। माहौल- नफरत इतनी, कोई नाम नहीं सुनना चाहता अनुकल्प की जिंदगी राम मंदिर में नौकरी करने से पहले क्या थी? इसका जवाब दैनिक भास्कर की टीम को राम मंदिर से करीब 40 किमी दूर मिल्कीपुर के गांव बसावां में मिला। यहां करीब 2 हजार लोग रहते हैं। गांव की संकरी रोड से होते हुए हम अनुकल्प के घर की तरफ बढ़े। जिन घरों के बाहर बैठे लोगों से अनुकल्प के बारे में बात करने का प्रयास करते, वो उठकर चले जाते। घर के दरवाजे बंद कर लेते। हिदायत भी देते कि उसके (अनुकल्प) के घर मत जाना, वहां कुछ ठीक नहीं है। पूरे गांव में अनुकल्प के लिए नफरत का माहौल था। अनुकल्प के घर पर हमारी मुलाकात उसके दादा राजेंद्र मिश्रा से हुई। वह हार्ट के मरीज हैं। पोते के जेल जाने का जिक्र करने पर कहते हैं- मुझे ये लोग कुछ बताते नहीं हैं कि क्या हो रहा है। वो तो सिर्फ 18 साल का है, पता नहीं कैसे उसके पापा ने राम मंदिर में काम करने भेज दिया। मैंने तो उसको प्रयागराज पढ़ने भेजा था। कुछ महीने बाद पता चला कि वहीं से अयोध्या चला गया है। हमने कहा- क्या कोई पूछताछ के लिए आया था? वह कहते हैं- जिन्हें आना था, वो आए और पूछा भी। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं था। राम मंदिर में नौकरी कैसे लगी? इस सवाल पर राजेंद्र कहते हैं- मुझे नहीं लगता कि अनुकल्प ऐसा कुछ कर सकता है। भागवत कथा में मारपीट पर बोले- ये हमारे भाई की पत्नी ने किया अप्रैल, 2026 में मिल्कीपुर में अनुकल्प ने भागवत कथा करवाई थी। उसमें मारपीट क्यों हो गई थी? राजेंद्र कहते हैं- मेरे 4 बेटे हैं। अनुकल्प के पिता रवींद्र सबसे बड़े हैं। सबसे छोटे बेटे बृजेंद्र और उसकी पत्नी नेहा के बीच झगड़ा चल रहा है। नेहा अपने परिवार के साथ वहां पहुंच गई थी, जिसके बाद हंगामा हुआ। मुझे लगता है कि इसके पीछे हमारे ही भाई सुरेंद्र मिश्रा थे। उसने ही हमारी बहू नेहा को बुलाया था। वो परिवार को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ता। भागवत कथा में महिलाओं में बांटने के लिए कुमारगंज के एक व्यापारी से 10-10 हजार रुपए की साड़ियां खरीदकर आई थीं? SIT ने उस व्यापारी से भी पूछताछ की थी? इस बारे में क्या कहेंगे? राजेंद्र कहते हैं- सब झूठ है। मुझे शक है कि उसने (सुरेंद्र) ही अनुकल्प को फंसवाया होगा। 'अनुकल्प के पिता गरीब थे, 4-5 साल तो अपनी बुआ के घर रहे' इसके बाद हम राजेंद्र के भाई सुरेंद्र मिश्रा से मिले। वह कहते हैं- अनुकल्प के पापा कुछ करते नहीं थे। आर्थिक स्थिति तो खराब होनी ही थी। 4-5 साल से अपनी बुआ के घर रह रहे थे। अनुकल्प भी वहीं पर पढ़ाई करता था। फिर वो राम मंदिर ट्रस्ट के कामों में लग गया। मैं तब चौंक गया, जब पिछले साल इन लोगों ने अयोध्या में करीब 40 लाख रुपए का घर खरीदा। मैं नहीं समझ पाया कि इतने रुपए कहां से आए? इतना कहकर सुरेंद्र वहां से चले गए। गांव में किसी से संबंध ठीक नहीं, 2 चुनाव लड़े, दोनों हारे गांव के लोगों से अलग-अलग बात करने के बाद समझ आया कि अनुकल्प के परिवार की गांव में किसी की बनती नहीं थी। अनुकल्प के पिता रवींद्र मिश्रा ने 2 बार प्रधानी का चुनाव लड़ा, लेकिन कभी 100 वोट भी नहीं मिले। बीडीसी के चुनाव में भी यही स्थिति रही। घर चलाने के लिए रवींद्र क्या करते हैं? गांव के लोग कहते हैं- एक सरकारी हॉस्पिटल है, वहां आते-जाते रहते हैं। कुछ कमाई कर लेते थे। किस पोस्ट पर थे, क्या काम था, यह नहीं पता। दोस्त बोला- पापा को कार दिलाई, ब्रांडेड कपड़े पहनने लगा गांव का माहौल समझकर हम अयोध्या लौट आए। यहां अनुकल्प के दोस्त से मुलाकात हुई। वह बताते हैं- अनुकल्प बहुत सामान्य लड़का था। उसको कहीं भी कवि सम्मेलन का पता चलता था, तो चला जाता था। खुद को समाजसेवी बताता था। यह 2024 की बात है। चंपत ने ही अनुकल्प को मंदिर में अहम जिम्मेदारी दिलाई। इसके बाद तो अनुकल्प का व्यवहार बदल गया। जिंदगी भी बदल गई। 6 महीने बाद ही उसने अपने पापा को स्विफ्ट डिजायर कार खरीदकर दी। पहले 400-500 रुपए में कुर्ता-पजामा खरीदने वाला अनुकल्प अब ब्रांडेड कुर्ता-पजामा पहनने लगा। कीमत 10 से 15 हजार रुपए होती थी। 2 करोड़ की जमीन, स्कॉर्पियो खरीदने की थी तैयारी गांव बसावां के ही पास ही 84 कोसी परिक्रमा मार्ग बन रहा था। अनुकल्प ने इसके करीब 2 बीघा जमीन खरीदने की इच्छा जताई थी। उसकी भागवत कथा में कई प्रॉपर्टी डीलर आए थे। लेकिन एक जगह इतनी जमीन नहीं मिलने से डील नहीं हो सकी थी। अनुकल्प ने इन डीलरों को कहा था कि मैं 2 करोड़ रुपए इन्वेस्ट करना चाहता हूं। 2025 में ही अनुकल्प ने अपने जीजा लवकुश मिश्रा की नौकरी भी राम मंदिर में लगवा दी। इसके बाद दोनों संपत्तियां खरीदने में जुट गए थे। अनुकल्प स्कॉर्पियो खरीदना चाहता था। एक इनपुट यह भी मिला कि अनुकल्प ने अपने पिता के नाम से अंबेडकरनगर में कुछ जमीनें खरीद रखी हैं। इसकी जांच हो रही है। -------------------------- ये खबरें भी पढ़ें- राममंदिर चढ़ावा चोरी- आरोपी का परिवार टूटे-फूटे घर में छिपा, पक्के मकान में ताला लगाया; भाई चिल्लाया- अकेला छोड़ दीजिए प्रतापगढ़ में एक मामूली कर्मचारी से कुछ ही महीनों में 2 मकानों के मालिक बने अविनाश शुक्ला की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। गांव के लोग उसकी अचानक बदली किस्मत से दंग थे। 4 जून को जब पुलिस ने उसके घर से 20.39 लाख रुपए और 1121 अमेरिकी डॉलर जब्त किए, तो सारे सवालों के जवाब मिल गए। पूरी खबर पढ़िए… -------------------------- ‘राम मंदिर चोरी वाला लवकुश तुम्हारे गांव का है न…’, लोग बोले- बदनाम कर दिया; दादी का आरोप- ठाकुरों ने हमारे घर में रुपए छिपाए राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का आरोपी लवकुश जेल में है और उसके परिवार की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। 7 जून के बाद से ही परिजन घर में कैद हैं। न कोई उनसे मिलने जाता है, न ही वे लोगों के सामने पड़ना चाहते हैं। कोई सीधे शब्दों में इस बात को कहता नहीं, लेकिन लवकुश के परिवार के लिए ‘सामाजिक बहिष्कार’ जैसा माहौल दिखा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… राममंदिर चढ़ावा चोरी-आरोपी के खाते में ₹7.32 लाख मिले: रमाशंकर का परिवार बोला- सैलरी बचाई; सुभाष के बेटे ने कहा- जाओ, नहीं तो पुलिस बुलाएंगे राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों में रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव भी शामिल हैं। दैनिक भास्कर की टीम दोनों के घर पहुंची, उनके परिवार और पड़ोसियों से बात की। रमाशंकर का परिवार अयोध्या में राम सखा बगिया मंदिर के 2 कमरों में रहता है। पुलिस को उसके बैंक खाते में 7.32 लाख रुपए मिले हैं। परिवार का दावा है कि यह रकम उसकी कई साल की बचाई हुई सैलरी है। पढ़िए पूरी खबर…
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