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    राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव पर सहमति क्यों नहीं बनी:संघ-VHP की पसंद अलग; 2 सदस्यों के लिए 3 नाम आने से टली घोषणा

    8 hours ago

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    श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का महासचिव कौन बनेगा? इसको लेकर संघ और विहिप में एक राय नहीं बन सकी। दोनों चाहते हैं कि उनकी पसंद का चेहरा इस महत्वपूर्ण पद पर बैठे। कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे कृष्ण मोहन संघ की पसंद हैं। कुछ पदाधिकारियों ने उनके नाम की मजबूत पैरवी की। लेकिन, ट्रस्ट के कुछ सदस्यों का मानना था कि विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ही महासचिव बनें। वहीं, ट्रस्ट के सदस्यों में शामिल संतों के बीच 2 और खाली पदों पर भी सहमति नहीं बन सकी। इन पदों के लिए यतींद्र मोहन मिश्र, अयोध्या के संत राघवाचार्य और मिथिलेश नंदिनी शरण के नाम सामने रखे गए हैं। ट्रस्ट के कुछ सदस्य साहित्यकार यतींद्र की वकालत कर रहे हैं, तो कुछ ट्रस्टी मिथिलेश नंदिनी शरण के पक्ष में हैं। तीनों नामों पर आम सहमति बनाने के लिए ही ट्रस्ट ने फिलहाल निर्णय टाल दिया है। सूत्र कहते हैं- अब इन नामों पर सहमति बनाने की कोशिश हो रही है। 2 सितंबर की बैठक में घोषणा कर दी जाएगी। बैठक का एजेंडा महासचिव और सदस्यों को चुनना था कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने 7 जुलाई को ट्रस्ट के सदस्यों को 22 जुलाई की बैठक की सूचना भेजी थी। दैनिक भास्कर को भी इसकी एक कॉपी मिली। इसमें बताया गया था कि बैठक 2 चरण में होगी। पहला चरण 3 बजे से शुरू होगा। इसमें ट्रस्ट के खाली पदों को भरे जाने पर चर्चा होगी। सदस्यों के सामने नाम रखे जाएंगे। जिन पर सहमति बनेगी, उनके नामों की घोषणा कर दी जाएगी। 22 जुलाई (बुधवार) को ऐसा ही हुआ। एक घंटे की बैठक में ट्रस्ट के लोगों ने खाली पदों को लेकर चर्चा की। 5 नाम सामने आए, लेकिन सभी सदस्यों में सहमति नहीं बन सकी। संघ की ओर से भी हुई थी सहमति बनाने की कोशिश ट्रस्ट से जुड़े सूत्र बताते हैं कि संघ की ओर से भी तीनों खाली पदों पर आम सहमति बनाने की कोशिश हुई। इसकी कमान संघ के पूर्वी क्षेत्र के प्रचारक अनिल कुमार ने संभाल रखी थी। उन्होंने ट्रस्ट के कुछ अहम सदस्यों के साथ एक गोपनीय बैठक की थी। इसमें तय हुआ था कि कैसे तीनों पदों के लिए संघ के पसंद के चेहरों पर सहमति बनाई जाए? सूत्र बताते हैं कि ट्रस्ट की बैठक मणिराम छावनी में दोपहर 3 बजे शुरू हुई। अध्यक्षता महंत नृत्य गोपाल दास कर रहे थे। महासचिव और ट्रस्ट के सदस्यों के नामों पर चर्चा शुरू हुई। ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने मौजूदा कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन को ही स्थायी करने की बात कही। कृष्ण मोहन IFS अधिकारी और पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संघचालक रह चुके हैं। कुछ सदस्य अड़े- विहिप के पास ही रहे यह जिम्मेदारी इस पर कुछ सदस्यों ने तर्क दिया कि इससे पहले त्यागपत्र देने वाले चंपत राय विहिप से जुड़े हुए थे। इसलिए अब संघ के चेहरे को जिम्मेदारी देनी चाहिए। लेकिन, कुछ सदस्य अड़े रहे कि मंदिर आंदोलन के लिए विहिप का बड़ा योगदान रहा है। इसलिए यह पद विहिप के ही खाते में जाना चाहिए। बैठक में ट्रस्ट महासचिव के लिए विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा का नाम बढ़ाया गया था। बागड़ा इससे पहले 7 जुलाई की बैठक में भी अयोध्या पहुंचे थे। 22 जुलाई की बैठक से पहले भी बागड़ा अयोध्या पहुंच गए थे। पूरी कोशिश की गई थी कि उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा दी जाए, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। 2 अन्य पदों पर 3 नाम आने के बाद फैसला टला इसके बाद 2 सदस्यों के पदों पर नामों पर चर्चा हुई। एक पद चढ़ावा चोरी के बाद 26 जून को डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे से खाली हुआ था। जबकि, एक पद अयोध्या के राजा रहे बिमलेंद्र मिश्र के निधन से खाली है। इन 2 पदों को लेकर भी मतभेद सामने आए। पहले दोनों पद पर सदस्य वही बनाए गए, जो अयोध्या के रहने वाले थे। ऐसे में ये तय हुआ कि इस बार भी इन दोनों पदों पर अयोध्या के ही लोगों को जगह दी जाएगी। निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने एक पद पर राजा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के बेटे यतींद्र मिश्र को देने की बात कही। यतींद्र के बारे में कहा गया कि वे बेहद ईमानदार हैं। साथ में साहित्य से जुड़े हैं। उनके नाम पर कोई विरोध भी नहीं है। इसके अलावा अयोध्या के संत राघवाचार्य और मिथिलेश नंदिनी शरण के नाम भी रखे गए। राघवाचार्य रामलला सदन देवस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष और श्रीधाम मठ, रामवर्णाश्रम के पीठाधीश्वर हैं। वे राम भक्ति, वेदांत, रामायण-भागवत कथा और सांस्कृतिक-धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं। वहीं, मिथिलेश नंदिनी को संघ और विहिप दोनों के प्रिय संतों में गिनती होती है। वे अपनी विद्वता के चलते काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन, 2 पदों पर 3 नाम सामने आने के चलते इस पर भी निर्णय नहीं हो पाया। इसके बाद खाली पदों को भरने के एजेंडे को आगे बढ़ा दिया गया। 2 सप्ताह में बनेगी सहमति, अगली बैठक में तय होंगे नाम ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने 22 जुलाई को हुई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि खाली पदों को भरने का फैसला अगली बैठक में होगा। यह माना जा रहा है कि अब 2 सितंबर को होने वाली बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। तब तक ट्रस्ट के नए सीईओ के 3 नाम भी शॉर्टलिस्ट कर लिए जाएंगे। सूत्र बताते हैं कि बागड़ा के नाम पर बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं है। असली परेशानी अन्य 2 पदों को लेकर है। इस पर आम सहमति बनने के बाद ही ट्रस्ट फैसला लेगा। अगर जरूरत पड़ी, तो फिर ट्रस्ट के सदस्य वोटिंग के जरिए इस पर फैसला लेंगे। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें - राममंदिर में 9 संतों की समिति बनी, प्रवक्ता भी होगा, अयोध्या में ट्रस्ट की बैठक 2 घंटे चली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या में 2 बड़े फैसले लिए। पहला- 9 संतों की एक धार्मिक समिति बनाई गई है। जिसमें 5 संत अयोध्या से और 4 संत मंदिर ट्रस्ट से शामिल किए गए हैं। ट्रस्ट कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। दूसरा- ट्रस्ट का एक प्रवक्ता होगा। सचिव भी बनाया जाएगा। पढ़िए पूरी खबर…
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