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    रिसर्च को पंख:CSJMU ने शोध के लिए खोला खजाना, 61 शिक्षकों को मिली 1.2 करोड़ की ग्रांट

    2 hours ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) अब केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि एक प्रमुख अनुसंधान केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय पहल की है। इसके तहत, शोध परियोजनाओं के लिए कुल 1.2 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया गया है। शनिवार को सेंटर फॉर एकेडमिक में आयोजित एक कार्यक्रम में 61 शिक्षकों को 'सीवी रमन अनुसंधान अनुदान' के स्वीकृति पत्र सौंपे गए। इस पहल से विश्वविद्यालय परिसर में एक नई 'रिसर्च कल्चर' विकसित होने की उम्मीद है, जो अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देगी। इस वर्ष की शोध अनुदान प्रक्रिया की एक खास बात महिला वैज्ञानिकों की सशक्त भागीदारी रही। 'विकसित भारत के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना' थीम पर आधारित इस पहल के तहत, बड़ी शोध परियोजनाओं में महिला वैज्ञानिकों का वर्चस्व स्पष्ट रूप से देखा गया। कुल 9 प्रतिष्ठित मेजर ग्रांट में से 6 महिला शिक्षकों को प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने कुल 24 महिला शिक्षकों को शोध के लिए स्वीकृति पत्र देकर उनकी वैज्ञानिक क्षमताओं पर विश्वास व्यक्त किया है। विश्वविद्यालय के प्रोजेक्ट एंड एक्सटर्नल रिसोर्स जनरेशन सेल ने शोध की प्रकृति के आधार पर अनुदान को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है। इनमें 9 सीवी रमन मेजर ग्रांट, 42 माइनर ग्रांट और 10 शिक्षकों को नए रिसर्च आइडिया शुरू करने के लिए सीड ग्रांट शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस आर्थिक सहायता का मुख्य उद्देश्य 'ब्रेन ड्रेन' यानी प्रतिभा पलायन को रोकना है। शिक्षकों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे अपने शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रकाशित करें, ताकि वैश्विक स्तर पर विश्वविद्यालय की पहचान मजबूत हो सके। भविष्य की रणनीति: AI आधारित शोध और जवाबदेही पर जोर कुलपति ने शिक्षकों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शोध बेहद जरूरी है, लेकिन इसे पूरी जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ अपनाना होगा। उन्होंने जोर दिया कि रिसर्च केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका परिणाम रणनीतिक और योजनाबद्ध तरीके से समाज के काम आना चाहिए। विश्वविद्यालय ने शिक्षकों को यह भी भरोसा दिलाया कि नवाचारी प्रस्तावों के लिए पूरे वर्ष फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को 'नो योर सैंक्शन लेटर' के जरिए अनुदान राशि के सही और पारदर्शी उपयोग की जानकारी दी गई। तकनीकी सत्र में शोध की नैतिकता, गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन और संस्थागत उत्कृष्टता को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई।
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