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    रायबरेली का अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट समसपुर पक्षी विहार बदहाल:8 किमी में फैला है, सड़क टूटी, झीलों पर जलकुंभी का कब्जा; पानी और कैंटीन तक नहीं

    14 hours ago

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    रायबरेली के सलोन तहसील क्षेत्र स्थित समसपुर पक्षी विहार, जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है, इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाल व्यवस्थाओं से जूझ रहा है। 3 अक्टूबर 2019 को इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (रामसर साइट) घोषित किया गया था, जिसकी आधिकारिक घोषणा जनवरी 2020 में हुई। वैश्विक पहचान रखने वाले इस पक्षी विहार में आज सड़क, पेयजल, कैंटीन और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। वर्ष 1987 में स्थापित समसपुर पक्षी विहार करीब 799 हेक्टेयर (लगभग 8 वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र में फैला हुआ है। नवंबर से मार्च के बीच साइबेरिया, चीन, यूरोप और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर सूरखाब, पिंटेल और यूरेशियन विजन समेत कई दुर्लभ प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं। इन्हें देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। झीलों पर जलकुंभी का कब्जा, प्राकृतिक सुंदरता पर असर पक्षी विहार में समसपुर, ममूनी, गोरवा, हसनपुर और हकगंज सहित पांच प्रमुख प्राकृतिक झीलें हैं। इन दिनों अधिकांश झीलें जलकुंभी से ढकी हुई हैं। इससे दुर्गंध फैल रही है और पक्षी विहार की प्राकृतिक सुंदरता प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर सफाई नहीं होने से स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। न पानी, न कैंटीन; शोपीस बने वाटर कूलर पर्यटकों का कहना है कि पक्षी विहार पहुंचने पर सबसे बड़ी समस्या पेयजल की होती है। परिसर में लगाए गए वाटर कूलर बंद पड़े हैं, जबकि हैंडपंप या तो खराब हैं या उनसे दूषित पानी निकल रहा है। दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। वहीं पर्यटकों की सुविधा के लिए बनी कैंटीन भी लंबे समय से बंद है, जिससे लोगों को खाने-पीने का सामान अपने साथ लाना पड़ता है। उद्यान में उगी झाड़ियां, पार्क में बढ़ा खतरा नियमित रखरखाव और बजट के अभाव में पक्षी विहार का उद्यान जंगली झाड़ियों और खरपतवार से भर गया है। पार्क की साफ-सफाई नहीं होने से यहां सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा भी बना रहता है। इसके कारण परिवार के साथ आने वाले पर्यटक पार्क में घूमने से भी बचते हैं। 1992 के बाद नहीं बनी सड़क, 2 किलोमीटर का रास्ता जर्जर पक्षी विहार तक पहुंचने वाला करीब दो किलोमीटर लंबा मुख्य मार्ग बदहाल स्थिति में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस सड़क का निर्माण वर्ष 1992 में हुआ था। इसके बाद कोई बड़ा मरम्मत कार्य नहीं हुआ। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और उखड़ी गिट्टियां हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। आए दिन वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं। पर्यटन सीजन से पहले सुधार की मांग स्थानीय निवासियों और पर्यटकों ने प्रशासन से पक्षी विहार तक जाने वाले जर्जर मार्ग का पुनर्निर्माण कराने, परिसर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने, बंद कैंटीन को शुरू कराने, झीलों से जलकुंभी हटाने और उद्यान का सौंदर्यीकरण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले इस प्राकृतिक धरोहर की छवि प्रभावित हो सकती है।
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