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    पेपर लीक पर सरकार का बड़ा प्रहार! लोकसभा में पेश होगा नया सख्त विधेयक, 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ का जुर्माना

    3 hours from now

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    देश में सार्वजनिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की सुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार एक बेहद कड़ा कदम उठाने जा रही है। पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों (Unfair Means) के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए सरकार सोमवार को लोकसभा में एक नया संशोधन विधेयक पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024' में संशोधन से संबंधित इस महत्वपूर्ण विधेयक को सोमवार की सदन की कार्यसूची में सूचीबद्ध (Listed) कर दिया गया है।इसे भी पढ़ें: Task Force For Exam Reforms | राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बड़े सुधार की तैयारी: नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित  सदस्यों को वितरित विधेयक की प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। विधेयक में संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी। विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है। ये अदालतें आरोपपत्र दाखिल किए जाने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करेंगी।इसे भी पढ़ें: West Asia Tension और US Fed के फैसले तय करेंगे Share Market की चाल, Crude Oil की कीमतों पर टिकी सबकी नजर नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जंतर मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन और फिर शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार यह विधेयक पेश करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति बनाने की घोषणा भी की है।युवाओं के भविष्य की सुरक्षा का संकल्पसंसद में इस विधेयक के पारित होने से देशभर के लाखों अभ्यर्थियों और छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य है कि त्वरित न्याय और सख्त सजा के माध्यम से पेपर लीक सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए ताकि मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके। 
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