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    रायबरेली में गर्भवती महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन सुविधा शुरू:एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत मातृ-शिशु मृत्यु दर घटेगी

    2 hours ago

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    रायबरेली जिले में गर्भवती महिलाओं के लिए एफसीएम (फेरिक कार्बोक्सिमाल्टोस) इंजेक्शन की सुविधा शुरू कर दी गई है। यह पहल एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत की गई है। मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सलोन में इस सेवा का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने किया। इस दौरान पात्र गर्भवती महिलाओं को एफसीएम की खुराक दी गई और उन्हें एनीमिया से बचाव व उपचार के बारे में जागरूक किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंद्रा ने बताया कि यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया एक गंभीर समस्या है, जिसका असर मां और शिशु दोनों पर पड़ता है। डॉ. चंद्रा के अनुसार, एफसीएम थेरेपी के माध्यम से गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं का प्रभावी उपचार संभव है। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जिले में इस सेवा की शुरुआत मार्च माह में एफआरयू ऊंचाहार से की गई थी। वर्तमान में सलोन के अलावा डलमऊ, लालगंज और बछरावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी यह सुविधा उपलब्ध है। सलोन चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित कुमार सिंह ने बताया कि शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान 11 गर्भवती महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाया गया। डॉ. सिंह ने एफसीएम इंजेक्शन की खासियत बताते हुए कहा कि इसकी केवल एक खुराक से ही हीमोग्लोबिन स्तर में तेजी से सुधार होता है, जिससे महिलाओं को बार-बार अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं पड़ती। पहले आयरन सुक्रोज की पांच खुराकें देनी पड़ती थीं, जिसके कारण कई महिलाएं पूरा उपचार नहीं ले पाती थीं। उन्होंने एनीमिया के प्रमुख लक्षणों के बारे में भी बताया, जिनमें थकान, चक्कर आना, कमजोरी, सांस फूलना और दिल की धड़कन तेज होना शामिल हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि अक्सर महिलाएं इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। इस अवसर पर स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी शुभ करन, डॉ. शरद, डॉ. साक्षी और डॉ. शिवांगी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
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