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    सभी AI Summit में बिजी थे तभी भारत आ पहुंचा रूस का भयंकर युद्धपोत, चौंक गए सभी!

    3 hours from now

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    17 फरवरी 2026 यानी आज विशाखापटनम के बंदरगाह पर अचानक एक विशाल रूसी युद्धपोत मार्शल शापोष निकोब का आगमन होता है। यह कोई साधारण घटना नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू यानी आईएफआर 2026 और मिलन 2026 अभ्यास का हिस्सा है जो भारत रूस की दशकों पुरानी समुद्री साझेदारी को दिखाता है। लेकिन इस आगमन को हम अचानक क्यों कह रहे हैं क्योंकि वैश्विक तनाव के बीच जब दुनिया की महाशक्तियां एक दूसरे से भिड़ रही हैं दूर हो रही हैं तब भारत रूस की यह दोस्ती ना केवल मजबूत हो रही है बल्कि दुनिया पर भारी भी दिख रही है। एक आधुनिक उदालाय क्लास डिस्ट्रॉयर जिसे अब ब्रिगेड के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 1985 में कमीशन किया गया। यह रूसी जहाज रूसी पेसिफिक प्लीट का हिस्सा है और इसका नाम सोवियत युग के सैन्य कमांडर बोरिस शापोश निकोब के नाम पर रखा गया है। इस जहाज की लंबाई 163 मीटर वजन 7900 टन तक है और यह 35 नॉट की रफ्तार से चल सकता है। इसमें कलिब्र एनके क्रूज मिसाइल, ओनिक्स, एंटीशिप मिसाइलें और संभावित रूप से जिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइलें लगी हैं। यह एंटी सबमरीन वॉरफेयर में माहिर है। जिसमें हेलीकॉप्टर, हैंगर और सोनार सिस्टम्स शामिल हैं। अब यह आगमन अचानक इसलिए लग रहा है क्योंकि वैश्विक राजनीति में रूस यूक्रेन युद्ध के चलते रूस अलग-थलग दिख रहा है।इसे भी पढ़ें: भारत की इस 166KM जमीन ने हिलाई दुनिया, 92000 करोड़ लगा कर सरकार क्या करने जा रही है?हालांकि भारत उसे अलग-थलग नहीं होने दे रहा है। भारत ने इसे गले लगाया है रूस को और भारतीय नौसेना के अनुसार यह जहाज आईएफआर 2026 और मिलन 2026 में भाग लेने आया है। आईएफआर 18 फरवरी को होगा। जहां भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू 72 देशों के 60 से अधिक युद्धपधों की समीक्षा करेंगी। मिलन 21 से 25 फरवरी तक चलेगा जिसमें समुद्री अभ्यास, सेमिनार और सहयोग पर फोकस होगा। रूस का यह जहाज इस अभ्यास में प्रमुख भूमिका निभाएगा जो भारत रूस की समुद्री साझेदारी को मजबूत करेगा। यह घटना सिर्फ एक जहाज का आगमन नहीं है। यह एक संदेश है जब अमेरिका और उसके सहयोगी रूस पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। भारत ने रूस से सस्ता तेल आयात बढ़ाया है और अब समुद्री सहयोग को नई ऊंचाई दे दी है। यह दोस्ती दुनिया पर भारी है क्योंकि यह इंडोपेसिफिक में संतुलन बनाती है। जहां चीन की बढ़ती ताकत को काउंटर करने के लिए रूस भारत का साथी है।इसे भी पढ़ें: 114 राफेल के बाद Su-57 लेगा भारत? मैक्रों के भारत पहुंचते ही रूस ने भारतीय एयरफोर्स के लिए दे दिया तगड़ा ऑफर भारत रूस की दोस्ती की जड़े शीत युद्ध के दौर से मजबूत हैं। 1950 के दशक में सोवियत संघ ने भारत को सैन्य सहायता दी जब पश्चिमी देश पाकिस्तान को हथियार दे रहे थे। फिर 1960 से भारत ने रूसी जहाज और सबमरीन का इस्तेमाल शुरू कर दिया। आज भारतीय नौसेना के आधे से अधिक प्रमुख जहाज रूसी मूल के हैं। अब 1971 के भारतपाकि युद्ध में रूस की भूमिका यादगार है। जब अमेरिका ने अपना एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस एंटर प्राइज बंगाल की खाड़ी में भेजा। सोवियत संघ ने अपनी नौसेना टास्क फोर्स भेज दी जिसमें परमाणु सबमरीन भी शामिल थी। इससे अमेरिका पीछे हट गया और भारत की वहां पर जीत हो गई। यह दोस्ती का प्रतीक है। 1971 के शांति, मैत्री और सहयोग संधि ने इसे और मजबूत कर दिया। 
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