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    संभल कल्कि नगरी में 300 टन होली का रंग बना:संभल में 40% भगवा रंग की डिमांड बढ़ी, 80 टन तैयार हुआ भगवा रंग

    3 hours ago

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    होली से पहले उत्तर प्रदेश का संभल शहर इस बार फिर रंगों की खुशबू से महक उठा है। कभी हाथरस के रंग पूरे प्रदेश में छाए रहते थे, लेकिन अब संभल भी रंग उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। इस वर्ष यहां करीब 300 टन होली का रंग तैयार किया गया है, जिसमें 80 टन केवल भगवा रंग शामिल है। खास बात यह है कि पिछले साल की तुलना में भगवा रंग की मांग में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। करीब 45 वर्षों से संभल में रंगों का निर्माण हो रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना में शामिल यह जिला मैंथा, आलू और हैंडीक्राफ्ट के साथ अब हर्बल गुलाल के लिए भी जाना जा रहा है। 15 प्रकार के ऑर्गेनिक हर्बल गुलाल तैयार संभल कोतवाली क्षेत्र की राम बिहार कॉलोनी में बृजेश गुप्ता और उनके पुत्र हर्ष गुप्ता द्वारा संचालित फैक्ट्री में इस समय 15 प्रकार के गुलाल तैयार किए जा रहे हैं, जबकि पहले यहां केवल 4–5 प्रकार के गुलाल बनते थे। यह गुलाल पूरी तरह हाथ से तैयार किया जाता है और इसमें मशीनों का प्रयोग नहीं होता। मक्के के आटे (मक्का स्टार्च) से एक बार में करीब 150 किलो गुलाल बनाया जाता है। पहले पानी से तैयार कर इसे सुखाया जाता है, जिसमें लगभग 8 दिन लगते हैं। पूरे उत्पादन की प्रक्रिया लगभग 10 दिनों में पूरी होती है। इसके बाद 80 ग्राम, 5 किलो, 10 किलो और 25 किलो के पैकेट में पैकिंग की जाती है। गुलाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इन्हें बाजार में भेजने से पहले दिल्ली की प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराया जाता है। लैब टेस्ट के बाद ही इन्हें ‘ऑर्गेनिक हर्बल गुलाल’ के रूप में प्रमाणित किया जाता है, ताकि त्वचा को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। खुशबुओं का खास मिश्रण गुलाल में गुलाब, लेवेंडर, मोगरा, जैस्मिन, चंदन और सैंडल जैसी 15 अलग-अलग खुशबुएं मिलाई जाती हैं, जिनमें से अधिकांश खुशबुएं कन्नौज से मंगाई जाती हैं। इसके अलावा 6 प्रकार के फ्रूट गुलाल भी तैयार किए जाते हैं, जिनमें कच्चा सेब, अनानास, केला और आम जैसी सुगंध शामिल होती है। इस बार बच्चों के लिए चॉकलेट, कोकोनट, चंदन और मिंट के नए मिश्रण वाला विशेष गुलाल भी तैयार किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह गुलाल पूरी तरह ‘स्किन फ्रेंडली’ और ‘स्किन सॉफ्ट’ है। 12 राज्यों में सप्लाई हर्ष गुप्ता के अनुसार, उनकी कंपनी का ‘डक ब्रांड’ उत्तर प्रदेश सहित देश के कम से कम 12 राज्यों में सप्लाई कर रहा है। अयोध्या, काशी और मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बड़े पैमाने पर रंग भेजे गए हैं। इसके अलावा उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी संभल के रंगों से होली खेली जाती है। इस बार ‘भगवा गुलाल’ और ‘भगवा रंग’ की मांग सबसे अधिक देखने को मिल रही है। हर्ष गुप्ता का कहना है कि ‘सनातन-मय’ होली के चलते शोभायात्राओं, संकीर्तन और धार्मिक आयोजनों में भगवा रंग की अलग पहचान बनी है, जिससे इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। रेट में 5 से 7 प्रतिशत की कमी कीमतों को लेकर हर्ष गुप्ता ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार गुलाल के दाम लगभग समान हैं, बल्कि 5 से 7 प्रतिशत तक कम हुए हैं। चूंकि गुलाल मक्का स्टार्च और अरारोट से तैयार होता है, इसलिए कच्चे माल की कीमत में गिरावट का सीधा असर गुलाल के दाम पर पड़ा है। इस बार अरारोट करीब 7 से 8 रुपये प्रति किलो सस्ता हुआ है, जिससे तैयार गुलाल भी अपेक्षाकृत सस्ता हो गया है। संभल में तैयार हो रहे ये हर्बल और ऑर्गेनिक रंग न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर में अपनी खुशबू और गुणवत्ता से पहचान बना रहे हैं। इस होली पर एक बार फिर संभल का रंग देश के कई हिस्सों में बिखरने को तैयार है।
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