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    संभल में 20 नए आलू कोल्ड स्टोरेज बिना लाइसेंस संचालित:जिला उद्यान अधिकारी ने चेताया कार्रवाई का खतरा, 2023 में चैंबर गिरने से 11 लोगों की मौत हुई थी

    11 hours ago

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    संभल जिले में 20 नए आलू कोल्ड स्टोरेज बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। इन शीत गृहों में आलू का भंडारण शुरू कर दिया गया है, जबकि अभी तक इन्हें भंडारण का औपचारिक अनुमोदन नहीं मिला है। जिला उद्यान अधिकारी सौरभ बंसल ने इस मामले में कार्रवाई की चेतावनी दी है। जिला उद्यान अधिकारी के अनुसार, 11 कोल्ड स्टोरेज के कागजात अनुमोदन के लिए भेजे गए हैं, जबकि शेष के दस्तावेज मिलने पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बावजूद इसके कई नए कोल्ड स्टोरेज में अधिनियम के नियमों को दरकिनार करते हुए आलू भंडारण शुरू कर दिया गया है। संभल आलू उत्पादन में प्रमुख उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद के बाद संभल आलू की फसल के लिए दूसरा प्रमुख जनपद है। इस साल 20 नए कोल्ड स्टोरेज बनने से जिले में कुल शीत गृहों की संख्या 71 हो गई है। सरकार के निर्देशों की अनदेखी करते हुए कुछ कोल्ड स्टोरेज मालिकों ने बिना अनुमोदन के ही भंडारण शुरू कर दिया है। कानूनी कार्रवाई के प्रावधान अवैध रूप से आलू भंडारण करने वाले कोल्ड स्टोरेज पर 'शीत गृह अधिनियम' के तहत कार्रवाई की जा सकती है और प्राथमिकी दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा, यदि कोई कोल्ड स्टोरेज अपनी क्षमता से अधिक आलू रखता है (ओवरलोडिंग), तो 'उत्तर प्रदेश शीत गृह विनियमन अधिनियम' के तहत कार्रवाई की संभावना रहती है। लाइसेंस प्रक्रिया जटिल और कड़े दस्तावेज अनिवार्य कोल्ड स्टोरेज मालिकों को लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कई आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं। इनमें लाइसेंस शुल्क का प्रमाण, भवन की मजबूती का प्रमाण पत्र और मशीनरी के फिटनेस प्रमाण पत्र शामिल हैं। लाइसेंस प्रक्रिया के लिए लगभग 8-10 प्रकार के दस्तावेजों की विस्तृत चेकलिस्ट का पालन करना अनिवार्य है। पिछले हादसे की याद यह स्थिति तब सामने आई है जब वर्ष 2023 में तहसील चंदौसी के एक आलू कोल्ड स्टोरेज के चैंबर गिरने से 11 लोगों की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद शीत गृहों के संचालन और सुरक्षा मानकों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही थी। सवाल यह कि जिम्मेदार कौन? जनपद संभल में आलू का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और यह अन्य राज्यों सहित उत्तर प्रदेश के 25 जिलों में जाता है। पिछले हादसे को कोई भूल नहीं पाया है, 48 घंटे तक रेस्क्यू चला और एनडीआरएफ की टीम ने भी भाग लिया। अब बिना लाइसेंस भंडारण शुरू होने के बाद यह चिंता बनी हुई है कि यदि कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा।
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