Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    सफलता के साथ कई रिश्ते पीछे छूट जाते हैं:इंद्रजीत लंकेश बोले- दीपिका को लॉन्च किया, फिर साथ काम करने की कोशिश नहीं की

    1 day ago

    1

    0

    कन्नड़ सिनेमा के जाने-माने फिल्ममेकर-एक्टर इंद्रजीत लंकेश बेबाक विचारों के लिए भी पहचाने जाते हैं। उन्होंने दीपिका पादुकोण को उनकी पहली फिल्म 'ऐश्वर्या' में मौका दिया और पहली मुलाकात में ही उनकी स्टार क्वालिटी पहचान ली थी। अब वह अपनी नई फिल्म 'जय हिंद जय सिंध' लेकर आ रहे हैं, जिसे अपने करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म मानते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने दीपिका, पत्रकारिता, पिता पी. लंकेश की विरासत और समाज से जुड़े मुद्दों पर बात की। सवाल: सबसे पहले आपकी नई फिल्म 'जयहिंद जयसिंध' की बात करते हैं। यह फिल्म किस बारे में है? जवाब: लोग इसे सिर्फ पार्टिशन फिल्म समझ रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। पार्टिशन इसकी एक परत है। यह एक समकालीन प्रेम कहानी है, जो एक लड़के के परिपक्व होने की यात्रा दिखाती है। इसमें जेन-जी के लिए प्यार, रिश्तों और इंसानियत का संदेश है। मेरा मानना है कि आज नफरत का जवाब इंसानियत है और यही फिल्म का मूल भाव है। आपने कहा कि यह आपके करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म है। सवाल: आपने कहा कि यह आपके करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म है। ऐसा क्यों? जवाब: क्योंकि इसमें सिर्फ मनोरंजन नहीं है। यह ऐसी कहानी है, जिस पर मुझे पूरा विश्वास है। मेरा मानना है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का जरिया भी है। इस फिल्म के जरिए मैंने वही कोशिश की है। सवाल: आपने दीपिका पादुकोण को उनकी पहली फिल्म में लॉन्च किया था। पहली मुलाकात कैसे हुई थी? जवाब: मैं दीपिका पादुकोण को तब से जानता था, जब वह बैडमिंटन खेलती थीं। काफी समय बाद संयोग से हमारी मुलाकात एक लिफ्ट में हुई। वह उस समय मॉडलिंग कर रही थीं। पहली नजर में ही उनकी पर्सनैलिटी, आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस ने मुझे प्रभावित किया। सवाल: क्या उसी मुलाकात में आपने उन्हें फिल्म के लिए तय कर लिया था? जवाब: लगभग हां। मैं उन्हें देखकर प्रभावित हुआ था। बाद में हमने 'ऐश्वर्या' के लिए उन्हें साइन किया। मुझे उनके टैलेंट पर पूरा भरोसा था। सवाल: उस वक्त क्या आपको अंदाजा था कि वह इतनी बड़ी स्टार बन जाएंगी? जवाब: बिल्कुल। मुझे विश्वास था कि वह सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाएंगी। बाद में उन्होंने हॉलीवुड में काम किया, इसलिए मेरा विश्वास सही साबित हुआ। सवाल: 'ऐश्वर्या' की सफलता ने दीपिका के करियर में कितना बड़ा मोड़ दिया? जवाब: फिल्म बहुत सफल रही थी। सिनेमाघरों में 100 दिन चली। बेंगलुरु में हर जगह दीपिका के पोस्टर लगे थे। इसके बाद बॉलीवुड के दरवाजे उनके लिए खुल गए। शाहरुख को 'ऐश्वर्या' की सफलता का पता चला तो उन्होंने मजाक में कहा था कि अब दीपिका को ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे। बाद में फराह खान ने उन्हें 'ओम शांति ओम' में लॉन्च किया और बाकी इतिहास है। सवाल: 'ऐश्वर्या' के बाद आपने दोबारा दीपिका पादुकोण के साथ काम क्यों नहीं किया? जवाब: देखिए, दीपिका ने अपने करियर में बड़ी ऊंचाइयां हासिल की हैं, जिस पर मुझे गर्व है। वह आज देश की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल हैं और बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही हैं। जब कोई कलाकार उस मुकाम तक पहुंचता है, तो उसकी प्राथमिकताएं, काम करने का दायरा और टीम बदल जाती है। ऐसे में पुराने रिश्ते और संभावित सहयोग पीछे छूट जाते हैं। मैंने हमेशा उनके सफर का सम्मान किया है। इसलिए दोबारा किसी फिल्म के लिए उनसे संपर्क नहीं किया। मेरे मन में उनके लिए सिर्फ सम्मान है और खुशी है कि उनके करियर की शुरुआत में मेरा छोटा-सा योगदान रहा। सवाल: आपके परिवार की पहचान पत्रकारिता से रही है। फिर फिल्मों की तरफ कैसे आना हुआ? जवाब: मेरे पिता पी. लंकेश ने एक छोटा-सा अखबार शुरू किया था, जो बाद में बड़ा संस्थान बना। समय के साथ मीडिया का स्वरूप बदल गया। विजुअल मीडिया, सोशल मीडिया, पीआर और कॉरपोरेट प्रभाव के कारण स्वतंत्र पत्रकारिता पहले से ज्यादा मुश्किल हो गई। मुझे लगा कि जिन बातों पर मैं विश्वास करता हूं, उन्हें फिल्मों के जरिए ज्यादा प्रभावी ढंग से कह सकता हूं। सवाल: क्या आपको लगता है कि आज पत्रकारिता बदल गई है? जवाब: काफी हद तक। मीडिया पर कई तरह के प्रभाव बढ़े हैं। मेरा मानना है कि पत्रकार का काम किसी विचारधारा का समर्थक बनना नहीं, बल्कि सही बात के साथ खड़ा होना है। पत्रकार को सत्ता से सवाल पूछने चाहिए, चाहे सत्ता किसी भी दल की हो। सवाल: यह सोच आपको कहां से मिली? जवाब: मेरे पिता पी. लंकेश से। उन्होंने सिखाया कि पत्रकार न वामपंथी हो, न दक्षिणपंथी। उसे सिर्फ सही पक्ष में खड़ा होना चाहिए। मैं आज भी उसी विचार पर चलता हूं। सवाल: आपकी बहन गौरी लंकेश भी पत्रकारिता का बड़ा नाम थीं। आप उनकी विरासत को कैसे देखते हैं? जवाब: मैं उनकी पत्रकारिता पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। मेरे लिए वह सिर्फ बहन नहीं, बल्कि मां जैसी थीं। उनका मेरे जीवन में बहुत बड़ा स्थान है। सवाल: आपने ड्रग्स के खिलाफ खुलकर अभियान चलाया था। इसकी शुरुआत कैसे हुई? जवाब: मैंने देखा कि बेंगलुरु में स्कूल और कॉलेज के बच्चे नशे की चपेट में आ रहे हैं। मुझे लगा कि अगर मैं चुप रहा तो यह गलत होगा। इसलिए मैंने सीसीबी में शिकायत की, आवाज उठाई और विरोध भी झेला। इसके बाद कार्रवाई हुई और जागरूकता बढ़ी, जिससे खुशी हुई। सवाल: विरोध का सामना करना कितना मुश्किल था? जवाब: काफी मुश्किल था। फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग भी मेरे खिलाफ थे। लेकिन अगर किसी बात पर विश्वास हो तो डरना नहीं चाहिए। मैंने वही किया, जो मुझे सही लगा। सवाल: क्या आज भी सामाजिक मुद्दों पर बोलना जरूरी मानते हैं? जवाब: बिल्कुल। सिर्फ पत्रकार ही नहीं, हर जिम्मेदार नागरिक को समाज के मुद्दों पर आवाज उठानी चाहिए। अगर हम चुप रहेंगे तो बदलाव कैसे आएगा? सवाल: आखिर में दर्शकों से क्या कहना चाहेंगे? जवाब: मैं हमेशा वही कहता हूं, जो दिल से महसूस करता हूं। मुझे उम्मीद है कि लोग 'जयहिंद जयसिंध' को सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव की तरह देखेंगे। यह मेरे दिल के सबसे करीब है। मुझे लगता है कि यह मेरा अब तक का सबसे बेहतरीन काम है। उम्मीद है कि दर्शक इसे अपना प्यार और समर्थन देंगे। जय हिंद।
    Click here to Read more
    Prev Article
    'गलत काम करने वालों की आलोचना होनी चाहिए':अयोध्या में चढ़ावा चोरी पर अनुपम खेर बोले- इससे लोगों की आस्था पर फर्क नहीं पड़ता
    Next Article
    प्रभास को जोकर कहने पर फंसे थे अरशद वारसी:सफाई में कहा- सिर्फ दोस्तों से मजाक करता हूं, पता है हद क्या है, सेलेब्स ने की थी निंदा

    Related मनोरंजन Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment