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    संघ के साथ सरकार-संगठन की थाह ले रहे दत्तात्रेय:12 नए संभाग बनेंगे, सबसे ताकतवर होंगे नए 'क्षेत्र प्रचारक'

    13 hours ago

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    विधानसभा चुनाव से पहले सरकार और संगठन की जमीनी स्थिति को समझने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले लखनऊ पहुंचे। उन्होंने प्रांत और शीर्ष पदाधिकारियों के साथ संघ के नए प्रशासनिक परिसीमन (संभाग संरचना) को अंतिम रूप दिया। मंगलवार को लखनऊ पहुंचे दत्तात्रेय होसबाले ने भारती भवन, विश्व संवाद केंद्र और निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में संघ पदाधिकारियों से शताब्दी वर्ष के कार्यों, शाखा विस्तार और आगामी अभियानों की समीक्षा की। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों से भाजपा और सरकार के कामकाज पर फीडबैक लिया तथा आगामी चुनाव में 'विचार परिवार' के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर चर्चा की। जेन-जी पर संघ का विशेष फोकस तीन दिवसीय प्रवास के दौरान दत्तात्रेय होसबाले ने संघ पदाधिकारियों से जेन-जी और जेन-अल्फा को लेकर चर्चा की। ABVP और युवा स्वयंसेवकों के जरिए जेन-जी से सीधा संवाद स्थापित करने की योजना है। युवाओं की समस्याएं और उनका मन समझकर समाधान निकालना, ताकि संघ के विस्तार और चुनावी समीकरणों पर सकारात्मक असर पड़े। UP में अब 6 प्रांतों की जगह 12 नए संभाग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यूपी में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अवध, काशी, गोरक्ष, कानपुर, मेरठ और ब्रज प्रांत की जगह अब 12 नए संभाग बनाए जा रहे हैं- विजयादशमी से पहले होने वाली संघ की बैठक में नए परिसीमन की संरचना रखी जाएगी और होली से पहले होने वाली राष्ट्रीय बैठक में इसका औपचारिक एलान होगा। संभाग व्यवस्था का मुख्य मकसद- गांव-गांव तक पहुंचना संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, प्रांत का भौगोलिक दायरा बड़ा होने के कारण प्रांत प्रचारक और पदाधिकारियों का हर गांव तक नियमित पहुंचना मुश्किल होता था। नए संभागों में अधिकतम 6 से 7 प्रशासनिक जिले होंगे, जिससे शाखा विस्तार और कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क आसान होगा। इस नई व्यवस्था से अधिक संख्या में स्वयंसेवकों को संगठनात्मक जिम्मेदारियां और पद दिए जा सकेंगे। महेश या अनिल में से कौन बनेगा सबसे ताकतवर क्षेत्र प्रचारक? संघ की नई व्यवस्था में यूपी और उत्तराखंड को मिलाकर एक नया 'उत्तर क्षेत्र' (यूपी-उत्तराखंड क्षेत्र) बनाया जाएगा। दोनों राज्यों में भाजपा सरकार होने के कारण नए क्षेत्र प्रचारक का पद बेहद प्रभावशाली और ताकतवर माना जा रहा है। रेस में मुख्य रूप से दो नाम हैं- संघ के बाद भाजपा का ढांचा भी बदलेगा आरएसएस की तर्ज पर आने वाले दिनों में भाजपा संगठन का स्वरूप भी बदलेगा। भाजपा में अवध, काशी, गोरखपुर, कानपुर, ब्रज और पश्चिम क्षेत्र का ढांचा खत्म कर 12 नए संभाग बनाए जाएंगे। भाजपा में अब 'क्षेत्रीय अध्यक्ष' की जगह 'संभाग अध्यक्ष' की व्यवस्था लागू होगी। यह बदलाव एबीवीपी, भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ और अधिवक्ता परिषद जैसे अनुषांगिक संगठनों में भी लागू किया जाएगा। ----
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