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    सहारनपुर में दूल्हे ने दहेज के 21 लाख लौटाए:दुल्हन के साथ खुद इंजीनियर; बोला- शादी कोई सौदा नहीं, लड़की वाले भावुक हुए

    7 hours ago

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    सहारनपुर में एक शादी समारोह उस वक्त मिसाल बन गया, जब दूल्हे ने स्टेज पर माइक संभाला और ऐसा ऐलान किया कि पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। दूल्हे ने कहा- वधु पक्ष द्वारा हमें शगुन के जो 21 लाख रुपए दिए गए हैं, उन्हें सम्मानपूर्वक वापस लौटा रहा हूं। शादी दो परिवारों और दो दिलों का मिलन है, ये कोई सौदा नहीं। हम दोनों आत्मनिर्भर हैं। हम इस रिश्ते को लेन-देन का माध्यम नहीं बनने देंगे। हमें किसी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं है।।” ये सुनते ही दुल्हन पक्ष समेत समारोह में मौजूद सभी मेहमान भावुक हो गए। कई मेहमान मंच के सामने खड़े होकर इस फैसले का स्वागत करने लगे। इसके बाद दुल्हन के पिता ने वर पक्ष का सम्मान रखते हुए रकम वापस ले ली। मामला छुटमलपुर का है। ये है पूरा मामला छुटमलपुर में 14 फरवरी की रात को प्रफुल्ल और साक्षी की शादी का समारोह चल रहा था। दुल्हन साक्षी राणा नोएडा की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि प्रफुल्ल सोम भी नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। दोनों आत्मनिर्भर हैं। साक्षी के पिता रविंद्र राणा ने अपनी बेटी साक्षी राणा की शादी में परंपरा के तहत 21 लाख रुपए की राशि दूल्हे प्रफुल्ल सोम को भेंट की थी। रस्में चल रही थीं, मेहमान शुभकामनाएं दे रहे थे। लेकिन तभी प्रफुल्ल सोम ने माइक संभाला और सबको चौंका दिया। प्रफुल्ल ने कहा- हमें सिर्फ आप सबका आशीर्वाद चाहिए। साक्षी के पिता जी ने हमें शगुन के जो 21 लाख रुपए दिए गए हैं, मैं उन्हें सम्मानपूर्वक वापस लौटा रहा हूं। क्योंकि शादी दो परिवारों और दो दिलों का मिलन है, ये कोई सौदा नहीं। हम दोनों आत्मनिर्भर हैं। हम इस रिश्ते को लेन-देन का माध्यम नहीं बनने देंगे। साक्षी हमारे घर की बहू नहीं, बेटी बनकर आ रही हैं। हमें किसी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं है।” दहेज लेना अपराध है दूल्हे के पिता यशपाल सिंह सोम, जोकि मेरठ में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हैं। उन्होंने भी अपने बेटे प्रफुल्ल के निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने कहा- “मैं पुलिस विभाग में हूं और समाज में कानून व नैतिकता की बात करता हूं। अगर हम खुद दहेज लें, तो दूसरों को कैसे रोकेंगे? नई पीढ़ी के लिए सही उदाहरण पेश करना हमारा कर्तव्य है।” उनकी बात पर भी जोरदार तालियां बजीं। इसके बाद साक्षी के पिता रविंद्र राणा ने कहा- वर पक्ष द्वारा जो निर्णय लिया गया है मैं वधु पक्ष की तरफ से उनके इस निर्णय का स्वागत करता हूं। उनकी कोटि-कोटि प्रशंसा करता हूं। उन्होंने दहेज के रूप में सिर्फ 1 रुपए लिया है। उन्होंने दहेज में कुछ नहीं लिया है। ये बड़े ही हर्ष का विषय है। उनके द्वारा लिए गए निर्णय पर मैं दूल्हे, उनके माता-पिता और परिजनों को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। शादी के एक दिन बाद दूल्हा-दुल्हन ने शेयर किया वीडियो… दुल्हन बोली- मुझे गर्व है अपनी ससुराल पर शादी के अगले दिन अपनी ससुराल पहुंचकर साक्षी ने अपने अनुभवों को शेयर किया। साक्षी ने कहा, “मुझे गर्व है कि मैं ऐसे परिवार का हिस्सा बनी हूं, जहां मेरी शिक्षा और संस्कार को महत्व दिया गया, न कि पैसों को।” क्योंकि मेरी ससुराल वाले के लिए दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज है। यह बात मेरे और मेरे परिवार के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की थी। इस कदम ने समाज को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया है। मैं चाहती हूँ कि आने वाले समय में जो भी युवक-युवतियां विवाह करें, वे दहेजमुक्त विवाह को अपनाएं और समाज में एक नई सोच को आगे बढ़ाएं। दूल्हा बोला- बेटी बोझ नहीं, घर की शान होती है शादी के बाद दूल्हे प्रफुल्ल राणा ने कहा– विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं था, बल्कि एक सोच, एक संकल्प और एक सामाजिक संदेश का प्रतीक था। हम दोनों ने मिलकर यह निर्णय लिया था कि हमारी शादी दहेजमुक्त होगी। विवाह समारोह के दौरान वधू पक्ष की ओर से 21 लाख रुपए की भेंट दी जा रही थी, लेकिन मैंने और मेरे पिताजी ने उसे विनम्रतापूर्वक लेने से इंकार कर दिया। मेरा मानना है कि दहेज आज एक सामाजिक बुराई बन चुका है। यह न केवल परिवारों पर आर्थिक बोझ डालता है, बल्कि बेटियों को बोझ समझने की गलत मानसिकता को भी बढ़ावा देता है। कई जगह बेटियों के जन्म पर दुख जताया जाता है, जिसका एक बड़ा कारण दहेज प्रथा है। हम दोनों पढ़े-लिखे और कार्यरत हैं, इसलिए हम मानते हैं कि रिश्ते पैसों से नहीं, बल्कि सम्मान, प्रेम और समानता से मजबूत होते हैं। शादी कोई लेन-देन या व्यापार नहीं है, बल्कि दो परिवारों का पवित्र संबंध है। इस निर्णय में मेरा पूरा परिवार मेरे साथ खड़ा रहा। वधू पक्ष ने भी हमारे फैसले का सम्मान किया। दोनों परिवारों ने मिलकर यह संदेश दिया कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि घर की शान होती है। मैं युवाओं से अपील करता हूँ कि वे दहेज के खिलाफ आवाज उठाएं। यदि नई पीढ़ी ठान ले, तो समाज में बदलाव निश्चित है। दहेजमुक्त विवाह एक समृद्ध, समान अधिकार वाले समाज की पहली सीढ़ी है। ……………. ये खबर भी पढ़ें… क्या अखिलेश फिर मायावती को साथ लाना चाहते हैं:नसीमुद्दीन की जॉइनिंग पर बसपा को साधने की कोशिश; देखिए VIDEO लखनऊ में अखिलेश यादव ने 15 फरवरी को नसीमुद्दीन सिद्दीकी को सपा में जॉइन कराया। नसीमुद्दीन का सपा में शामिल होना यूपी के सियासी समीकरण बदलने का संकेत माना जा रहा है। लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा जॉइनिंग के दौरान अखिलेश यादव के बहुजन समाज को लेकर दिए भाषण को लेकर हो रही है। कहा जाने लगा है कि क्या अखिलेश एक बार फिर से मायावती से जुड़ना चाहते है? पढ़िए पूरी खबर
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