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    सेक्स के बाद ब्लैकमेलिंग पर हाईकोर्ट बोला- खतरनाक हालात:ऐसे तो जीना मुश्किल हो जाएगा, मेरठ पुलिस एक्शन ले

    3 hours ago

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    हनीट्रैप में लोगों को फंसाकर ब्लैकमेल करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त है। कोर्ट ने यूपी पुलिस को ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने कहा कि समाज के लिए ऐसे मामले बहुत खतरनाक हैं। इसे रोका न गया तो सभ्य समाज में जीना मुश्किल हो जाएगा। दरअसल, बिजनौर में एक युवक ने हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने का केस पुलिसकर्मियों समेत 5 लोगों पर दर्ज कराया था। इसकी FIR को रद्द करवाने के लिए आरोपी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं के वकील शशांक द्विवेदी ने याचिका वापस ले ली। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश की सूचना पुलिस महानिदेशक, मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक और उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), लखनऊ को भी दिया जाए। बिजनौर में दर्ज केस पर कोर्ट सख्त बिजनौर के युवक ने शिकायत में कहा था कि वाट्सएप पर एक महिला ने उससे दोस्ती की। इसके बाद उसे प्रेमजाल में फंसा लिया। फिर उसे शहर एक होटल में बुलाया। जहां महिला ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला ने इस दौरान उसके न्यूड फोटो-वीडियो बना लिए। इसके बाद आरोपी ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू किया। आरोपी ने मामले को निपटाने के लिए 8-10 लाख रुपये की मांग की। पीड़ित ने बताया एक वार्ड सदस्य, 2 पुलिसकर्मी समेत 5 लोग इस गैंग में शामिल थे। इन लोगों ने एक स्थान मोतीचूर पर बुलाया। आरोपियों ने पहले 10 लाख रुपए मांगे। फिर कहा कि 8 लाख में मामला निपट सकता है। इसके बाद पीड़ित ने थाने में शिकायत कर दी। 30 मार्च को कोर्ट ने आरोपी की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करदिया। जिसमें उसने FIR रद्द करने की मांग की थी। जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के गिरोह का अस्तित्व, जो महिलाओं के जरिए लोगों को फंसाकर ब्लैकमेल करता है। समाज की गंभीर रूप से चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस तरह के अपराधों को जारी रहने दिया गया, तो एक सभ्य समाज में जीवन यापन करना मुश्किल हो जाएगा।
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