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    सुल्तानपुर पांचोपीरन दरगाह पर सालाना उर्स आज से शुरू:कव्वाली समेत तीनों दिनों में होंगे कई कार्यक्रम, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

    19 hours ago

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    सुल्तानपुर शहर में गोमती नदी के किनारे स्थित पांचोपीरन दरगाह पर तीन दिवसीय 846वां सालाना उर्स आज से शुरू हो गया है। यह धार्मिक आयोजन 13 फरवरी से 15 फरवरी, 2026 तक चलेगा। इस दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम और कव्वाली का आयोजन किया जाएगा। उर्स में आसपास के जिलों से हजारों जायरीन के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उर्स के पहले दिन, 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को फज्र की नमाज़ के बाद कुरआन ख्वानी, गुस्ल शरीफ, चादर पोशी और सलातो सलाम का कार्यक्रम होगा। सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक विशेष उलमा-ए-कराम का खिताब आयोजित किया जाएगा। इसके बाद लंगर-ए-आम, तकसीम सवील (शरबत), गागर, वादा शरीफ और कुल शरीफ जैसे कार्यक्रम संपन्न होंगे। 14 फरवरी 2026 (शनिवार) को फज्र की नमाज़ के बाद कुरआन ख्वानी की जाएगी। ईशा की नमाज़ के बाद 'जश्ने पांचो पीर' और 'ऑल इंडिया नातिया मुशायरा' का आयोजन होगा, जो इस सालाना उर्स का एक प्रमुख आकर्षण माना जाता है। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इसमें कई इंस्पेक्टर, उप-निरीक्षक और दर्जनों पुरुष व महिला सिपाही तैनात किए गए हैं। जायरीनों की सुविधा के लिए दरगाह परिसर के आसपास कई दर्जन दुकानें भी लगाई गई हैं। दरगाह के इतिहास के अनुसार, लगभग 800 साल पहले बल्ख (वर्तमान बल्खिस्तान) से सैय्यद अलाउद्दीन और सैय्यद बल्खी नामक दो व्यक्ति आए थे। उन्होंने गोमती नदी के किनारे अपना निवास बनाया और अपना जीवन अल्लाह की इबादत में समर्पित कर दिया। शहादत के बाद उनके पार्थिव शरीर को गोमती नदी के किनारे दफन कर दिया गया, जहां आज उनकी मजार स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सैय्यद अलाउद्दीन और सैय्यद बल्खी अकेले नहीं आए थे, बल्कि उनके साथ चार अन्य भाई भी थे। इस प्रकार वे कुल पांच भाई थे, और इन्हीं पांच भाइयों के कारण इस दरगाह का नाम 'पांचो पीरन' पड़ा। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उनके साथ कुल 20,786 लोग आए थे, जिनके वंशज आज भी पांचोपीरन क्षेत्र में निवास करते हैं।
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