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    सामने बैठे थे 6 देशों के NSA, Ajit Doval ने इस दौरान ऐसा क्या कह दिया जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई

    9 hours ago

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    जहां दुनिया का एक बड़ा हिस्सा युद्ध, तनाव और भू-राजनीतिक टकरावों में उलझा हुआ है, वहीं भारत ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि स्थायी नेतृत्व ताकत के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और सामूहिक सुरक्षा की नई इबारत लिखने से स्थापित होता है। नई दिल्ली में बिम्सटेक देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने अपने संबोधन के जरिए पूरी दुनिया को एक बड़ा रणनीतिक संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद, साइबर हमलों, समुद्री चुनौतियों और आर्थिक अस्थिरता जैसे साझा खतरों का समाधान टकराव नहीं, बल्कि विश्वास, साझेदारी और समन्वित कार्रवाई में है। डोभाल के इस संदेश ने न केवल भारत की क्षेत्रीय कूटनीति को नई धार दी, बल्कि यह भी संकेत दे दिया कि हिंद-प्रशांत में उभरते शक्ति समीकरणों के बीच भारत अब सुरक्षा एजेंडा तय करने वाला निर्णायक नेतृत्व बन चुका है।हम आपको बता दें कि इस बैठक में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों तथा प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। बिम्सटेक महासचिव ने सुरक्षा क्षेत्र में संगठन की प्रगति का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए सदस्य देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद सभी देशों ने आतंकवाद, संगठित अपराध, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, संपर्क (कनेक्टिविटी) और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए व्यावहारिक तथा परिणामोन्मुख उपायों पर विस्तार से चर्चा की।इसे भी पढ़ें: NSA Ajit Doval ने BIMSTEC Meeting में दी चेतावनी, कहा- Regional Stability के लिए ठोस कदम उठाना जरूरीबैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि समुद्री मानवीय सहायता एवं आपदा राहत के लिए समुद्री संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों को अपनाना रही। इन दिशानिर्देशों से प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में सदस्य देश पहले से कहीं अधिक तेज, समन्वित और प्रभावी राहत अभियान चला सकेंगे। इसके साथ ही समुद्र में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच संपर्क और कार्रवाई के लिए साझा मार्गदर्शक सिद्धांतों को भी मंजूरी दी गई। इनका उद्देश्य समुद्री अभियानों के दौरान पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता और सुरक्षा बढ़ाना है, ताकि गलतफहमियों और टकराव की संभावनाएं कम हों।बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में क्षेत्रीय सहयोग अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। उन्होंने कहा कि दुनिया आज सशस्त्र संघर्षों, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी व्यवधानों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अवरोधों के कारण पैदा हुए आर्थिक दबावों का सामना कर रही है। ऐसे समय में बिम्सटेक देशों को साझा हितों की रक्षा के लिए सामूहिक और निर्णायक कदम उठाने होंगे।डोभाल ने बिम्सटेक की रणनीतिक क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मंच दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के दो सबसे गतिशील क्षेत्रों को जोड़ता है। करीब 1.7 अरब आबादी और लगभग पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की संयुक्त अर्थव्यवस्था वाला यह समूह वैश्विक आबादी के लगभग 22 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि इन देशों को केवल बंगाल की खाड़ी ही नहीं जोड़ती, बल्कि हजारों वर्षों की साझा सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संबंध भी इन्हें एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बिम्सटेक ने आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर खतरों और समुद्री सुरक्षा जैसी साझा चुनौतियों के विरुद्ध उल्लेखनीय प्रगति की है। अब संगठन नई और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भी सामूहिक क्षमता विकसित कर रहा है। डोभाल ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा, संपर्क, क्षमता निर्माण और आर्थिक सुरक्षा जैसे बिम्सटेक के मूल स्तंभ आने वाले वर्षों में भी सदस्य देशों के सहयोग का आधार बने रहेंगे।देखा जाये तो सामरिक दृष्टि से इस बैठक का महत्व बेहद व्यापक है। हिंद महासागर और विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी आज वैश्विक समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। ऐसे में समुद्री कानून प्रवर्तन और आपदा राहत के साझा मानकों पर सहमति केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे समुद्री डकैती, अवैध तस्करी, मानव तस्करी, आतंकवादी गतिविधियों और समुद्री आपदाओं के दौरान सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।रणनीतिक दृष्टि से भी यह बैठक कई स्पष्ट संदेश देती है। एक तो भारत बिम्सटेक को अपनी नेबरहुड फर्स्ट नीति, एक्ट ईस्ट नीति और "महासागर" विजन का केंद्रीय स्तंभ बना रहा है। साथ ही दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सुरक्षा एवं आर्थिक सेतु के रूप में बिम्सटेक की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। इसके अलावा, यह मंच क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग का ऐसा विकल्प बनकर उभर रहा है, जो आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए साझा संस्थागत ढांचा तैयार कर रहा है।हम आपको बता दें कि वर्ष 1997 में बैंकॉक घोषणा के तहत स्थापित बिम्सटेक अगले वर्ष अपनी स्थापना के 30 वर्ष पूरे करेगा। शुरुआत में बिस्ट-ईसी (BIST-EC) के रूप में गठित यह संगठन आज सात सदस्य देशों का प्रभावशाली क्षेत्रीय मंच बन चुका है। बहरहाल, ऐसे समय में जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है, नई दिल्ली में हुई यह बैठक केवल सुरक्षा एजेंडे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह संकेत भी दिया कि आने वाले वर्षों में बिम्सटेक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सामूहिक सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीतिक सहयोग की नई धुरी बनने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है।
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