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    स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले की शिकायत लोकसभा याचिका समिति में:3.80 करोड़ उपभोक्ताओं पर असर, बिना सहमति 70 लाख मीटर बदले

    4 hours ago

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    उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले की शिकायत लोकसभा याचिका समिति को की गई है। राज्य विद्युत उपभोक्ता समिति की ओर से दाखिल याचिका में मांग की गई कि यूपी की बिजली कंपनियां संसद से पारित विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है। स्वेच्छा से विकल्प चुनने की आजादी देने की बजाय प्रीपेड स्मार्ट मीटर जबरन थोपा जा रहा है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने लोकसभा याचिका समिति के अध्यक्ष और सांसद चंद्र प्रकाश जोशी को पूरे मामले से अवगत कराते हुए हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने याचिका में बताया है कि कैसे उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और वितरण कंपनियां कानून के विपरीत जाकर लोगों के पोस्टपेड स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदल रही हैं। संसद से पारित कानून का यूपी में हो रहा उल्लंघन संसद द्वारा पास विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) आम बिजली उपभोक्ताओं को ये विकल्प देता है कि वे प्रीपेड व पोस्टपेड मीटर के विकल्प को चुन सकें। इसके उलट, प्रदेश में रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत करीब 3.8 करोड़ उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदलकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। परिषद का दावा है कि इनमें से लगभग 70 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना सहमति प्रीपेड मोड में बदल दिए गए हैं। नए कनेक्शन भी केवल प्रीपेड मोड में याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन भी अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में दिए जा रहे हैं। परिषद ने इसे कानून की भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन हो रहा है। जबकि 2 अप्रैल 2026 को संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा था कि प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की मांग पर लगाए जा सकते हैं और यह अनिवार्य नहीं हैं। 1 अप्रैल 2026 को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने भी अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया है कि प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है। याचिका के माध्यम से परिषद ये रखी मांग
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