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    सोनभद्र में अवैध खनन, ओवरलोडिंग के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन:पर्यावरणीय क्षति पर डीएम को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई की मांग

    3 hours ago

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    सोनभद्र के ओबरा तहसील अंतर्गत ग्राम बरहमोरी में अवैध बालू खनन, ओवरलोडिंग और सोन नदी की जलधारा में अवरोध के विरोध में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने पर्यावरण और जीव-जंतुओं को हो रही गंभीर क्षति पर चिंता व्यक्त की। इस प्रदर्शन का नेतृत्व वरिष्ठ छात्रनेता और स्थानीय निवासी दीपू शर्मा ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और उन्होंने प्रशासन से मामले में तत्काल, निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की मांग की। बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा दीपू शर्मा ने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से लगभग डेढ़ सौ बीघा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। इससे राज्य सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध खनन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है और कैमूर क्षेत्र के वन्यजीवों तथा जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। दीपू शर्मा ने प्रशासन के समक्ष दोहरे मापदंड का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि एक ओर बड़े पैमाने पर अवैध खनन खुलेआम जारी है, वहीं दूसरी ओर यदि कोई स्थानीय निवासी अपने घर के निर्माण के लिए थोड़ी मात्रा में बालू साइकिल से ले जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई कर साइकिल जब्त कर ली जाती है। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए तत्काल समाप्त करने की मांग की। ज्ञापन में सोन नदी की प्राकृतिक जलधारा के अवरोधन को तत्काल रोकने की मांग की गई। साथ ही, नदी में नाव लिफ्टर मशीनों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की भी मांग की गई, क्योंकि इन गतिविधियों से जलीय जीव-जंतुओं और नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर नुकसान हो रहा है। जलीय जीव-जंतुओं की सुरक्षा की मांग ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से कई मांगें कीं। इनमें स्थानीय मूल निवासियों और आदिवासी समुदाय का शोषण तत्काल बंद करना, कैमूर क्षेत्र के वन्य एवं जलीय जीव-जंतुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, रात्रिकालीन अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाना और ओवरलोडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना शामिल है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की भी मांग की। इस प्रदर्शन में रामचंद्र गोंड, केशव गोंड, दीनानाथ चौधरी, चन्दन गोंड, रामसुभग गोंड सहित बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी एवं मूल निवासी उपस्थित रहे।
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