Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    संन्यास के बाद भी मेकअप-स्टाइलिश चश्मे में हर्षा रिछारिया:बोलीं- धूप में खड़े रहना है तो सनस्क्रीन जरूरी; लव जिहाद–धर्मांतरण के खिलाफ काम करेंगी

    4 hours ago

    1

    0

    सोशल मीडिया ट्रेंड से चर्चा में आईं महाकुंभ-24 की वायरल साध्वी हर्षा रिछारिया अब आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं। अब वे हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। महाकुंभ से अब तक का समय उन्होंने बेहद कठिन बताया। परिवार की बात करते हुए उनकी आंखें नम हो गईं। वहीं अब आगे के जीवन को लेकर हर्षा का कहना है कि वह लव जिहाद और धर्मांतरण के खिलाफ काम करेंगी। हर्षा ने ग्लैमर की दुनिया से अब नाता तोड़ लिया है, लेकिन अब भी मेकअप और स्टाइलिश चश्मे में नजर आ रही हैं। ग्लैमर से लेकर दीक्षा तक के सफर पर उन्होंने भास्कर से बात की। पढ़िए हर्षा से भास्कर की बातचीत के मुख्य अंश... जीवन में ऐसा क्या घटा कि ग्लैमर से सीधे दीक्षा तक पहुंच गईं? जवाब- अध्यात्म का रास्ता कौन चुनेगा, यह व्यक्ति खुद तय नहीं करता। यह परिवर्तन अपने आप आता है। जब ईश्वर की कृपा होती है तो सब कुछ सहज हो जाता है। इसमें बहुत सुकून मिलता है। सोशल मीडिया में आपके ग्लैमरस फोटो और अब सीधे भगवा वेश, ऐसा बदलाव क्यों? जवाब- हर व्यक्ति के जीवन में एक मोड़ आता है। मेरे जीवन में भी बहुत कुछ हुआ। आर्थिक नुकसान, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और भी कई बातें। जब डॉक्टर जवाब दे देते हैं और महादेव के दरबार में राहत मिलती है, तो झुकाव अपने आप धर्म की ओर हो जाता है। 2019 से मेरा रुझान लगातार बढ़ा। कई बार केदारनाथ गई, वहीं से जीवन बदला। 2019 में आपने लिखा था-’I am Queen, I know how to fly with broken wings’… अब क्या सोचती हैं? जवाब- मैंने अपनी बात को सही साबित किया है। मैं आज भी वही ‘क्वीन’ हूं, जो अपनी जगह खुद बना रही है। महादेव का आशीर्वाद है। जिन्होंने अपमान किया, मैं उनसे भागी नहीं रहीं, वहीं खड़ी हूं। क्या ये दीक्षा महाकुंभ के बाद हुई कंट्रोवर्सी का जवाब है? जवाब- किसी भी क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति अगर विवादों में नहीं आता तो उसे सम्मान मिल जाता है। अगर विवाद होता है तो उसी व्यक्ति को पूरी तरह गलत ठहरा दिया जाता है। मेरी गलती कोई साबित नहीं कर पाया। क्या रथ पर बैठना गलत था? कुछ लोगों ने मेरे चरित्र पर सवाल उठाए, खुद ही बहस की और ट्रोल किया। यह उनकी मानसिकता थी। मैं आज अपने गुरु के साथ हूं। भगवा वेश में हैं, लेकिन मेकअप, स्टाइलिश चश्मा और बालों में कलर अब भी है? जवाब- मेरी आंखें कमजोर हैं, इसलिए चश्मा लगाती हूं। कभी लेंस भी लगाती हूं, वह भी पावर के होते हैं। आज दाईं आंख में दिक्कत है, डॉक्टर को दिखाना है। फिर भी सवाल उठते हैं। मैं सिर्फ सनस्क्रीन, लिप बाम और काजल लगाती हूं। अगर कोई कहे कि धूप में खड़े रहो और सनस्क्रीन मत लगाओ, तो यह संभव नहीं है। मैं किसी पर कुछ थोप नहीं रही हूं। मेरे गुरु जो कहेंगे, वही करूंगी। दीक्षा के बाद आगे की क्या योजना है? जवाब- धर्म परिवर्तन और लव जिहाद के मुद्दों पर काम करेंगे। आज के समय में बेटियों को आसानी से बहकाया जाता है। इसके खिलाफ जागरूकता जरूरी है। हम सेमिनार करेंगे, बेटियों को प्रशिक्षित करेंगे और संगठित रूप से समाज में फैली इस समस्या के खिलाफ काम करेंगे। परिवार और दोस्तों की प्रतिक्रिया कैसी रही? जवाब- (भावुक होते हुए…) महाकुंभ के बाद से मैं अकेली हूं। दोस्तों से बातचीत बंद है। परिवार के लिए यह बहुत कठिन समय है। तीन पीढ़ियों बाद घर में बेटी हो और वह संन्यास ले ले, तो स्वीकार करना आसान नहीं होता। मां की तबीयत खराब है, भाई भी बात नहीं कर रहा। लेकिन समय के साथ सब ठीक होगा। अब इस तस्वीर को लेकर नया विवाद शुरू… सिलीगुड़ी की छात्रा भारती ने निरंजनी अखाड़ा परिषद के दीक्षा नियमों के तहत मुंडन कराया है। अखाड़े से जुड़े लोगों ने बताया कि निरंजनी अखाड़ा दशनामी संन्यासी परंपरा को मानता है। इसके तहत मुंडन सामान्य प्रक्रिया में दीक्षा के लिए अनिवार्य है, लेकिन महिलाओं के मामले में गुरु की इच्छा पर ही ये प्रक्रिया निर्भर है। व्यावहारिक रूप से अनुशासन, संयम और त्याग की भावना ही सभी नियमों से ऊपर रखी जाती है। हालांकि प्रतीकात्मक रूप से केश दान के रूप में हर्षा के बाल भी काटे गए हैं। ‘रत्नाकर वाल्मीकि हो सकते हैं, तो हर्षा साध्वी क्यों नहीं’ मौनी तीर्थ पीठाधीश्वर और महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने कहा कि इस लोक के लिए शिक्षा और परलोक के लिए दीक्षा होती है। यह परिवर्तन ईश्वर की कृपा से ही संभव है। जैसे रत्नाकर वाल्मीकि बने, वैसे ही हर्षा का हर्षानंद गिरी बनना स्वाभाविक है। दीक्षा का अर्थ है-पूर्व जीवन का पूर्ण त्याग। अच्छे-बुरे सभी कर्मों से मुक्त होकर एक नए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत। ये खबर भी पढ़ें… उज्जैन में मॉडल हर्षा रिछारिया ने लिया संन्यास सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, कंटेंट क्रिएटर और मॉडल हर्षा रिछारिया ने रविवार को अक्षय तृतीया पर संन्यास ले लिया। उन्हें उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने संन्यास दीक्षा दी। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    लखनऊ के जाम में फंसे शिवराज सिंह चौहान:नाराज होकर शादी में शामिल हुए बिना लौटे; एक जगह दो VIP शादियों से हुई अव्यवस्था
    Next Article
    लखनऊ में कूड़े के ढेर में लगी आग,:फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों ने 40 मिनट में आग पर पाया काबू; कारणों की जांच शुरू

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment