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    सपा विधायक ने शिक्षा नीति पर उठाए सवाल:रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा, शिक्षा मंत्री ने दिया जवाब

    13 hours ago

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    उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र मंगलवार को समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के बीच हुई एक शायराना बहस के लिए चर्चा में रहा। यह बहस प्रदेश की शिक्षा नीति और शिक्षकों की कमी के मुद्दे पर केंद्रित थी। बहस के दौरान, सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने सरकार की शिक्षा नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए एक चुटीली शायरी के माध्यम से अपनी बात रखी। डॉ. सोनकर ने कहा, "रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा, मेरे नाम से सत्ता पाकर सबको आंख दिखाएगा। धर्मों पर लड़वाएगा और जाति पर बंटवाएगा, गरीबों की शिक्षा को रौंदा जाएगा।" इस शायरी के जरिए उन्होंने शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर सरकार के कथित ध्यान न देने पर सवाल उठाया। उन्होंने अनुच्छेद 51(ए) का हवाला देते हुए पूछा कि जब स्कूलों में विज्ञान के शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों में वैज्ञानिक सोच कैसे विकसित होगी? शायरी के बाद, डॉ. सोनकर ने अपनी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों का उदाहरण भी पेश किया। उन्होंने दावा किया कि मछलीशहर और आसपास के कई राजकीय कॉलेजों में विज्ञान के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। डॉ. सोनकर ने यह भी कहा कि भगवान राम को शिक्षा के लिए गुरु वशिष्ठ मिले थे, लेकिन वर्तमान सरकार रामराज की बात करती है, पर बच्चों को शिक्षक नहीं दे पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 के बाद से कई कॉलेजों में प्रधानाचार्य और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं, जिन्हें अभी तक नहीं भरा गया है। शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने भी सपा विधायक की शायरी के तर्ज पर ही जवाब देते हुए विपक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की। गुलाब देवी का 'सूरज और लहरों'वाला जवाब विपक्ष के इन तीखे प्रहारों का जवाब देने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी सदन में खड़ी हुईं और उन्होंने भी जवाब के लिए शायरी का ही सहारा लिया। गुलाब देवी ने कहा, "यह बढ़िया है कि आज इन्हें भगवान राम का उदाहरण देना पड़ा। जानकर भी अनजान हैं यह और बात है।" उन्होंने रागिनी पर पलटवार करते हुए आगे कहा, "सूर्य की किरणें कितनी भी चमचमाएं, लेकिन समुद्र की लहरों को सुखा नहीं सकती हैं।" मंत्री ने स्पष्ट किया कि विपक्ष चाहे कितना भी शोर मचा ले, लेकिन सरकार द्वारा किए गए कार्यों की सच्चाई को मिटाया नहीं जा सकता। गुलाब देवी ने आंकड़ों के जरिए जानकारी दी कि प्रदेश के 974 राजकीय कॉलेजों में से केवल तीन को छोड़कर सभी में विज्ञान वर्ग के शिक्षकों के पद सृजित हैं। उन्होंने अनुदानित कॉलेजों में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया और सरकार के विजन को सदन के सामने रखा। इस शायराना नोकझोंक ने सदन का तनाव तो कम किया, लेकिन शिक्षकों की भर्ती का मुद्दा फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।
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