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    सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC के फैसले को रद्द किया:शामली के रेप के आरोपी को जमानत दी थी, SC ने कहा- अपराध जघन्य, समाज को झकझोरने वाला

    4 hours ago

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    शामली की नाबालिग लड़की से रेप और यौन उत्पीड़न के आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 महीने पहले जमानत दे दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। कहा कि यह आदेश अनुचित, तर्कहीन और प्रासंगिक तथ्यों की अनदेखी करने वाला है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि निचली अदालतों को जमानत पर विचार करते समय अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल चार्जशीट दाखिल हो जाने से जमानत पर विचार रोका नहीं जा सकता, लेकिन पॉक्सो जैसे कानूनों में वैधानिक कठोरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ‘अपराध जघन्य, समाज की चेतना को झकझोरने वाला’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में आरोप बेहद गंभीर हैं। आरोप है कि आरोपी ने सशस्त्र धमकी देकर नाबालिग पीड़िता का बार-बार यौन उत्पीड़न किया और ब्लैकमेल करने के लिए वीडियो रिकॉर्ड किए। अदालत ने कहा कि इस तरह के जघन्य कृत्य पीड़िता के जीवन पर विनाशकारी प्रभाव डालते हैं और समाज की सामूहिक चेतना को झकझोरते हैं। आरोपी को जमानत देते समय अहम पहलुओं की अनदेखी जस्टिस महादेवन द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत देते समय अपराध की गंभीरता, पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों और पीड़िता की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार नहीं किया। बिना जरूरी कारकों को देखे दी गई जमानत में हस्तक्षेप जरूरी है। 6 महीने तक उत्पीड़न, कट्टे की धमकी का आरोप अभियोजन के मुताबिक, आरोपी पीड़िता का परिचित था और उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर छह महीने से अधिक समय तक नाबालिग का यौन उत्पीड़न किया। आरोप है कि देसी पिस्तौल की धमकी देकर वारदात को अंजाम दिया गया और मोबाइल फोन में वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया। पुलिस की शुरुआती आनाकानी के बाद 2 दिसंबर 2024 को एफआईआर दर्ज हुई थी। जमानत के बाद धमकाने का आरोप सत्र न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में आरोपी को जमानत दे दी थी। इसके खिलाफ पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी गांव में उसे धमका रहा है। पीड़िता की सुरक्षा सर्वोपरि: SC सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी और पीड़िता एक ही इलाके में रहते हैं, ऐसे में पीड़िता को धमकाने और दोबारा आघात पहुंचाने की वास्तविक आशंका है। बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता भयभीत और मानसिक रूप से परेशान है। बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामलों में गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने बिहार राज्य बनाम राजबल्लभ प्रसाद (2017) के फैसले का भी उल्लेख किया।
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