Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ की अनिवार्यता का स्वागत:जूना अखाड़ा के महंत ने बताया अमर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि

    5 hours ago

    1

    0

    मिर्जापुर में केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' राष्ट्रगीत को अनिवार्य करने के निर्णय का व्यापक स्वागत किया जा रहा है। धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इसे राष्ट्रभक्ति की भावना को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है। पंच दशनाम जूना अखाड़ा से जुड़े संत बाबा बूढ़ेनाथ मंदिर के महंत डॉ. योगानंद गिरी ने इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे भारत माता के अमर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम्' केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। डॉ. गिरी ने बताया कि इस गीत ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष कर रहे लाखों देशवासियों में जोश और त्याग की भावना का संचार किया। उन्होंने उल्लेख किया कि देश पर संकट आने पर इस गीत ने लोगों को एकजुट किया और राष्ट्र के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा दी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अनेक क्रांतिकारियों ने 'वंदे मातरम्' का उद्घोष करते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए और गोलियां खाते हुए भी इसका उच्चारण करते रहे। महंत ने कहा कि देश इस समय राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर केंद्र सरकार का यह निर्णय न केवल समयानुकूल है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय अस्मिता को सुदृढ़ करने वाला भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे नई पीढ़ी को राष्ट्रगीत के महत्व, उसके इतिहास और उससे जुड़े बलिदानों की जानकारी मिलेगी। डॉ. योगानंद गिरी ने आगे कहा कि 'वंदे मातरम्' की अनिवार्यता की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है। यह गीत मात्र शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति समर्पण और सम्मान की भावना का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकारी कार्यक्रमों में इसके नियमित गायन से कर्मचारियों और नागरिकों के भीतर राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदारी की भावना और प्रबल होगी। डॉ. गिरी ने सुझाव दिया कि सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी क्षेत्र, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक आयोजनों में भी 'वंदे मातरम्' के गायन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि देशभक्ति का यह मंत्र जन-जन तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित से जुड़े ऐसे निर्णय समाज को एकजुट करते हैं।
    Click here to Read more
    Prev Article
    शव कार में रख दो घंटे घूमते रहे डॉक्टर, हंगामा:इंजेक्शन लगाते ही गर्भवती की मौत, परिजनों ने पीछा कर डॉक्टरों को पकड़ा
    Next Article
    617 वोटर में से 244 के नाम कटवाने की साजिश:बूथ नंबर 249 पर मुस्लिमों के वोट कटवाने को दो व्यक्तियों के नाम से जमा किए फार्म, सत्यापन में खुलासा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment