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    संस्कृत नाटक 'अधुना अलम् अतिभाषणेन भो' का मंचन:समकालीन मुद्दों पर गोमती नगर के बौद्ध शोध संस्थान में प्रस्तुति

    2 hours ago

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    गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में संस्कृत भाषा में समकालीन मुद्दों पर एक अनूठा नाट्य मंचन किया गया। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम और अनादि सांस्कृतिक शैक्षिक एवं सामाजिक संस्था, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रंगमंच प्रशिक्षण कार्यशाला के तहत मनोरमा श्रीवास्तव की चर्चित नाट्य कृति 'अब बस भी करो यार' का संस्कृत रूपांतरण 'अधुना अलम् अतिभाषणेन भो' शीर्षक से प्रस्तुत किया गया। नाटक की शुरुआत भगवान गणेश के श्लोक 'वक्रतुण्ड महाकाय…' और पारंपरिक मंच स्थापना के साथ हुई। सूत्रधार ने 'या कुन्देन्दु तुषारहार धवला…' वंदना के साथ कथा का आरंभ किया। यह नाटक एक स्कूल की पृष्ठभूमि पर आधारित था, जिसमें शिक्षकों की दिनचर्या और शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकताओं को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। मंजन के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था पर तंज कहानी में दिखाया गया कि स्कूल के प्रधानाचार्य अचानक स्टाफ रूम में आकर सरकारी आदेश के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंप देते हैं। दो-तीन दिन में कार्यक्रम निपटाने के निर्देश के बाद शिक्षकों के बीच होने वाली चर्चा ने व्यवस्था की खामियों को उजागर किया। इसमें टेंट, साउंड, बच्चों के खाने-पीने और अन्य व्यवस्थाओं में होने वाले खर्च के साथ-साथ 'कमीशन' की मानसिकता को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया। सरकारी स्कूलों से भरोसा क्यों घट रहा है, यह एक बड़ा प्रश्न है नाटक का एक दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब चपरासी भी कमीशन की इस दौड़ में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करता है। यह दृश्य दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर करता है। अंत में, सूत्रधार ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुधार केवल कागजों तक सीमित है और मुफ्त सुविधाओं के बावजूद सरकारी स्कूलों से लोगों का भरोसा क्यों घट रहा है, यह एक बड़ा प्रश्न है। कलाकारों ने सशक्त अभिनय किया मंचन में अनुपम बिसरिया, भूपेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, अज़हर सिद्दीकी, अभय सिंह रावत, अभिषेक कुमार, लावण्या बाजपेयी और अंजलि वर्मा ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। नाटक का निर्देशन, संस्कृत अनुवाद और परिकल्पना मुन्नी देवी ने की थी।
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