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    संसद से हॉस्टल तक गूंजी आधी आबादी की आवाज:'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर छात्राओं ने भरी हुंकार, व्हाइटबोर्ड पर उकेरे सशक्तिकरण के नारे

    12 hours ago

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    देश की संसद में गूंजने वाला 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' अब शिक्षण संस्थानों और हॉस्टलों की चर्चाओं का मुख्य केंद्र बन गया है। सरस्वती गर्ल्स हॉस्टल में इस कानून की बारीकियों को समझने और महिला अधिकारों को लेकर छात्राओं के बीच एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान भविष्य की महिला नेताओं ने न सिर्फ कानून के तकनीकी पहलुओं को जाना, बल्कि यह भी संकल्प लिया कि अब वे देश की नीति-निर्धारण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगी। 106वें संविधान संशोधन की ताकत को समझा कार्यक्रम की शुरुआत महासचिव अनुष्का वर्मा के संबोधन से हुई। उन्होंने छात्राओं को बताया कि 106वां संविधान संशोधन अधिनियम केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह विधायी निकायों (लोकसभा और विधानसभा) में महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने वाला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे यह कानून लोकतांत्रिक समावेशिता को बढ़ाएगा और आने वाले समय में देश की राजनीति की तस्वीर बदल देगा। जमीनी स्तर पर बदलाव की जरूरत हॉस्टल की निवासी अंजलि ने बेहद बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखनी चाहिए। इस अधिनियम की प्रासंगिकता तभी सफल होगी जब महिलाएं जागरूक होकर आगे आएंगी। सहायक मुख्य वार्डन सोनी गुप्ता और वार्डन मयूरी सिंह ने भी छात्राओं का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने जोर दिया कि छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति हमेशा अपडेट और सक्रिय रहना चाहिए ताकि वे समाज में एक सार्थक बदलाव ला सकें। व्हाइटबोर्ड पर लिखे बदलाव के नारे केवल भाषण ही नहीं, कार्यक्रम में छात्राओं का जोश और रचनात्मकता भी देखने को मिली। जागरूकता सत्र के बाद एक विशेष गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें छात्राओं ने व्हाइटबोर्ड पर महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रेरक नारे लिखे। किसी ने 'आधी आबादी, पूरा हक' लिखा तो किसी ने नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी को जरूरी बताया। छात्राओं का यह उत्साह साफ दिखा रहा था कि वे इस बदलाव को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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