Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    सिद्धार्थनगर में प्रसव के बाद महिला की मौत:अवैध अस्पताल में ऑपरेशन का आरोप: गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम

    3 hours ago

    1

    0

    सिद्धार्थनगर के खेसराहा क्षेत्र के बेलोहा स्थित नवजीवन हॉस्पिटल में प्रसव के बाद 25 वर्षीय महिला की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पहले सामान्य प्रसव की बात कही गई, लेकिन बाद में ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। गंभीर स्थिति में अस्पताल की गाड़ी से उसे गोरखपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। देर रात परिजन महिला का शव लेकर वापस नवजीवन हॉस्पिटल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर शांत कराया। हंगामे के दौरान अस्पताल में मौजूद कर्मचारी और अन्य लोग वहां से चले गए। मामले में स्वास्थ्य विभाग के नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी ने अस्पताल का पंजीकरण नहीं होने की बात कही है। वहीं सीएमओ ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है। सीएचसी से बेलोहा के अस्पताल ले गए थे परिजन मृतका की पहचान खेसराहा क्षेत्र के परसौना चेतौनी गांव निवासी रिंका (25) के रूप में हुई है। उसके पति मनीष अग्रहरि ने बताया कि शनिवार को वह पत्नी को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेसराहा लेकर पहुंचे थे। वहां जांच कराने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें बेलोहा स्थित नवजीवन हॉस्पिटल जाने की सलाह दी। मनीष के अनुसार, वह पत्नी को लेकर दोपहर करीब 2 बजे नवजीवन हॉस्पिटल पहुंचे। वहां दोबारा जांच की गई। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पहले सामान्य प्रसव होने का भरोसा दिया गया और कहा गया कि ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। पति का आरोप है कि इसके बाद अस्पताल में महिला के पेट पर दबाव बनाया गया, जिससे वह दर्द से तड़पने लगी। कुछ देर बाद अस्पताल में उसका ऑपरेशन कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत, मुंह से निकलने लगा झाग परिजनों के मुताबिक, ऑपरेशन के तुरंत बाद रिंका की हालत अचानक गंभीर हो गई। उसके मुंह से झाग निकलने लगा। अस्पताल की ओर से परिजनों को दो यूनिट रक्त लाने के लिए कहा गया। परिजनों ने रक्त उपलब्ध कराया और महिला को चढ़ाया गया। इसके बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल के कर्मचारियों ने महिला की स्थिति बेहद गंभीर बताते हुए तत्काल गोरखपुर ले जाने की सलाह दी। परिजनों के अनुसार, अस्पताल संचालक ने अपनी गाड़ी से ही रिंका को गोरखपुर भेजा। परिजन महिला को लेकर गोरखपुर के लिए रवाना हुए, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। रात में शव लेकर अस्पताल पहुंचे, किया हंगामा महिला की मौत के बाद परिजन शव लेकर रात करीब 10 से 11 बजे के बीच वापस बेलोहा स्थित नवजीवन हॉस्पिटल पहुंचे। महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों और अन्य लोगों को समझाकर शांत कराया। इस दौरान अस्पताल में मौजूद कर्मचारी और अन्य लोग वहां से फरार हो गए। मृतका के पति ने अस्पताल पर इलाज के नाम पर लगातार पैसे लेने और आर्थिक शोषण करने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड-एक्स-रे के बोर्ड, डॉक्टरों के नाम भी लिखे घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों के अनुसार, अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और अन्य जांच सुविधाओं से संबंधित बोर्ड लगे हुए हैं। इसके अलावा डॉक्टरों के नाम भी बोर्ड पर लिखे होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अस्पताल में मरीजों की जांच और इलाज किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा था। महिला का ऑपरेशन किसने किया, ऑपरेशन करने वाले की चिकित्सकीय योग्यता क्या थी और उस समय अस्पताल में कौन-कौन डॉक्टर मौजूद थे, इसकी भी जांच जरूरी है। नोडल अधिकारी बोले- अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं मामले में नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल से अस्पताल के पंजीकरण के बारे में जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि नवजीवन हॉस्पिटल का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। यदि अस्पताल बिना पंजीकरण संचालित हो रहा था तो वहां मरीजों का इलाज और ऑपरेशन किस आधार पर किया जा रहा था, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय निवासी जितेंद्र अग्रहरि ने दावा किया कि उनकी जानकारी में इससे पहले भी इसी अस्पताल में दो महिलाओं के ऑपरेशन हुए थे और दोनों की मौत हो गई थी। हालांकि, इन पुराने मामलों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सबसे बड़ा सवाल- बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल कैसे चलता रहा? रिंका की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि अस्पताल का पंजीकरण नहीं था तो वह क्षेत्र में किस तरह संचालित हो रहा था? अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और डॉक्टरों के नाम के बोर्ड लगे होने के बावजूद संबंधित विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? खास तौर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि बिना पंजीकरण संचालित अस्पताल के खिलाफ पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यदि अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा नहीं थी तो वहां प्रसव और सर्जरी कैसे की जा रही थी। हालांकि, रिंका की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा। इसके साथ ही ऑपरेशन किसने किया, महिला की जांच किसने की, ऑपरेशन से पहले और बाद में कौन डॉक्टर मौजूद था, रक्त किस तरह उपलब्ध कराया गया और गोरखपुर रेफर करने का निर्णय किसने लिया—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है। सीएमओ बोले- जानकारी नहीं, जांच के बाद होगी कार्रवाई मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय दोहरे ने बताया कि उन्हें फिलहाल मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि शिकायत और आरोप सही पाए जाते हैं तो जांच टीम गठित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। रिंका की मौत ने खेसराहा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि बिना पंजीकरण अस्पताल में ऑपरेशन कैसे हुआ, ऑपरेशन किसने किया और महिला की मौत के लिए जिम्मेदार परिस्थितियां क्या थीं।
    Click here to Read more
    Prev Article
    पीलीभीत में देर रात 5 घंटे बारिश:स्टेशन रोड समेत निचले इलाकों में जलभराव, फसलों को मिला जीवनदान
    Next Article
    व्यापारी पर फायरिंग करने वाले 4 बदमाश मुठभेड़ में गिरफ्तार:झांसी में चारों के पैर में लगी गोली, 13 अगस्त को की थी वारदात

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment