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    सिद्धार्थनगर में सामूहिक होलिका दहन:चंद्र ग्रहण के कारण एक दिन पहले मनाया गया पर्व

    2 hours ago

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    सिद्धार्थनगर जनपद में इस वर्ष होलिका दहन का पर्व पारंपरिक तिथि से एक दिन पहले मनाया गया। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर अधिकांश स्थानों पर 2 मार्च की रात 8:00 बजे से 12:00 बजे तक सामूहिक रूप से होलिका दहन किया गया। इस दौरान शहरों से लेकर गांवों तक अग्नि प्रज्वलित कर बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया। जनपद मुख्यालय नौगढ़, शोहरतगढ़, डुमरियागंज, इटवा, बढ़नी और बांसी सहित विभिन्न कस्बों और ग्रामीण अंचलों में लोगों ने निर्धारित स्थानों पर एकत्र होकर होलिका दहन किया। शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद सामूहिक रूप से होलिका जलाई गई। महिलाओं ने परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की, जबकि बच्चों और युवाओं में उत्साह देखा गया। लोटन ब्लॉक की पंचायत ठोठरी, ढेकहरी बुजुर्ग, खेसराहा क्षेत्र के बेलवालगुनही (बेलौहा) और परोई खेसराहा जैसे कई गांवों में ग्रामीणों ने एकजुट होकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होलिका दहन किया। खुनियांव क्षेत्र के धोबहां चौराहा पर भी आसपास के गांवों के लोग एकत्र हुए और होलिका दहन किया। फुलवापुर और शोहरतगढ़ तहसील के बेलवा गांव में भी सामूहिक रूप से यह पर्व मनाया गया। इस अवसर पर एडवोकेट शरद सिंह ने कहा, "हमारे गांव में होलिका दहन पूरे गांव के लोग मिलकर पारंपरिक तरीके से करते हैं। यह पर्व हमारी एकता और भाईचारे का प्रतीक है।" पुलिस लाइन सिद्धार्थनगर में भी सामूहिक होलिका दहन का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अग्नि प्रज्वलित की। इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार सहित अन्य अधिकारी और पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। सभी ने एक साथ परिक्रमा कर जनपद में सुख-शांति और सौहार्द की कामना की। तिथि में बदलाव के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दिन शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, इसलिए अधिकतर स्थानों पर एक दिन पहले ही होलिका दहन कर लिया गया। त्योहार के मद्देनजर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और विश्वास के सामने अहंकार और अत्याचार का अंत हुआ था। इसी संदेश के साथ लोगों ने आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लिया। अब जनपदवासियों को 4 मार्च को मनाए जाने वाले रंगों के त्योहार होली का बेसब्री से इंतजार है। बाजारों में अबीर-गुलाल और पिचकारी की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है। पूरे सिद्धार्थनगर में सामूहिकता और उत्साह का वातावरण है, और हर कोई रंगों की होली के स्वागत के लिए तैयार है।
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