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    सिद्धार्थनगर में ट्री गार्ड आरा मशीन पर पड़े रहे:सवाल उठते ही गायब, लाखों की खरीद, जमीन पर उपयोग नहीं

    1 hour ago

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    सिद्धार्थनगर जिले में वृक्षारोपण अभियान के तहत खरीदे गए ट्री गार्ड के उपयोग को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दैनिक भास्कर की जमीनी पड़ताल में सामने आया कि लाखों रुपए की लागत से खरीदे गए ट्री गार्ड लंबे समय तक उपयोग में लाए बिना एक आरा मशीन परिसर में रखे रहे। मामले में जवाब मांगे जाने के बाद ये ट्री गार्ड अचानक वहां से गायब हो गए। जानकारी के अनुसार, बर्डपुर स्थित एक आरा मशीन परिसर में बड़ी मात्रा में ट्री गार्ड रखे गए थे। इन ट्री गार्ड का उपयोग पौधों को पशुओं और अन्य नुकसान से बचाने के लिए किया जाता है। सरकार हर वर्ष वृक्षारोपण अभियान में करोड़ों रुपए खर्च कर इनकी खरीद करती है, ताकि लगाए गए पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वर्ष 2025 में भी बड़े पैमाने पर खरीद की बात सामने आई है। जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। सूत्रों का कहना है कि ट्री गार्ड की खरीद तो हर साल की जाती है, लेकिन उन्हें समय पर पौधों के आसपास नहीं लगाया जाता। कुछ ट्री गार्ड औपचारिकता के तौर पर लगाए जाते हैं, जबकि बड़ी संख्या गोदामों या आरा मशीन जैसे स्थानों पर रख दी जाती है। आरोप है कि बाद में इन्हीं ट्री गार्ड को अगले वर्ष नया दिखाकर दोबारा लगाने और भुगतान लेने की तैयारी की जाती है। 17 फरवरी को भास्कर टीम ने की थी जियो ट्रैकिंग 17 फरवरी को दैनिक भास्कर की टीम ने आरा मशीन पर रखे ट्री गार्ड की जियो ट्रैकिंग, फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग की थी। इसके बाद संबंधित एसडीओ से पूछा गया कि वर्ष 2025 में खरीदे गए ट्री गार्ड पौधों के आसपास क्यों नहीं लगाए गए। एसडीओ ने कहा कि वह संबंधित रेंजर से जानकारी लेकर बताएंंगी। 18 फरवरी को जब भास्कर टीम दोबारा उसी स्थान पर पहुंची, तो वहां रखे गए सभी ट्री गार्ड गायब मिले। 2026 में लगाकर नया भुगतान लेने की आशंका स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वहां कई टन ट्री गार्ड मौजूद थे जिन्हें अचानक हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि वर्ष 2025 में खरीदे गए ट्री गार्ड को वर्ष 2026 में लगाकर नया भुगतान लेने की तैयारी की जा रही है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल—खरीद के बाद उपयोग क्यों नहीं? मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब ट्री गार्ड पौधों की सुरक्षा के लिए खरीदे गए थे, तो उन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। क्या पौधों की सुरक्षा से ज्यादा प्राथमिकता कागजी प्रक्रिया और भुगतान को दी जा रही है? इस पूरे प्रकरण पर वन विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे विभाग की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है। पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य पर भी असर स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि सरकार हर साल करोड़ों रुपए वृक्षारोपण पर खर्च करती है, लेकिन यदि पौधों की सुरक्षा के लिए खरीदे गए ट्री गार्ड का सही उपयोग नहीं हो रहा है, तो यह पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को भी कमजोर करता है। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले की जांच कराते हैं या नहीं, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
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