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    सऊदी पर खतरनाक भविष्यवाणी, 5 लेयर का कवच कैसे फोड़ रहे हूती, क्या रियाद में घुस जाएंगे अंसारुल्लाह?

    17 hours ago

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    एक ऐसी जंग जहां आसमान से आ रहे 15 से 20 हजार डॉलर के के एक सस्ते प्लास्टिक और फाइबर क्लास ड्रोन को गिराने के लिए जमीन से 40 लाख डॉलर  यानी करीब 33 करोड़ की मिसाइल दागनी पड़ती है। अगर वह मिसाइल चूक गई तो नुकसान अरबों डॉलर की रिफाइनरी का और अगर मिसाइल ड्रोन से टकरा गई तो भी आर्थिक चोट उसी पर पड़ती है जिसने मिसाइल दागी है। यह 21वीं सदी का सबसे बड़ा सैन्य विरोधाभास है। एक तरफ दुनिया का आठवां सबसे बड़ा सैन्य बजट वाला देश पश्चिमी तकनीक के सबसे घातक हथियार एफ15 ऐसे लड़ाकू विमान और पेट्रियट थॉट की मिसाइल शील्ड से लैस है। दूसरी तरफ यमन की पथरीली गुफाओं में बैठा एक विद्रोही गुट जिसके पास ना कोई पारंपरिक वायु सेना है ना कोई एयरक्राफ्ट कैरियर है लेकिन उसके पास है 2000 किलोमीटर तक मार करने वाली बैलेस्टिक मिसाइलें। समुद्र में जहाजों का शिकार करने वाले ड्रोन और छापामार युद्ध की घातक रणनीति।  एक तरफ यमन के अंसारुल्लाह हूती लड़ाके सीधे रियाद के एयरपोर्ट्स और तेल प्रतिष्ठानों पर मिसाइलों की बमबारी कर रहे हैं। दूसरी तरफ वाशिंगटन से मदद मांगना सऊदी शहजादे के लिए अपने ही हाथों में बारूद का गोला थामने जैसा साबित हो रहा है। इंटरनेशनल थिंक टैंक क्वीनसी इंस्टट्यूट के वरिष्ठ विश्लेषक त्रिता पारसी ने बीबीसी को दिए अपने एक हालिया बयान में इस बात की पूरी कड़वी सच्चाई उजागर कर कर रख दी जिसे सुनने के बाद हर कोई हैरान है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सऊदी अरब इस वक्त पूरी तरीके से बुरे विकल्पों के जाल में फंसा हुआ है। यानी कोई भी विकल्प चुनना उसके लिए खतरे से खाली नहीं। अगर सऊदी अरब भूतियों के विनाशकारी हमलों से बचने के लिए अमेरिका से सैन्य सहायता मांगेगा तो वाइट हाउस के पास इसके बदले एक बहुत बड़ी शर्त भी तैयार रखी है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन सऊदी अरब की मदद तो तभी करेगा जब रियाद अपनी सीमाओं और एयर स्पेस का इस्तेमाल अमेरिकी वायुसेना को ईरान पर सीधे हमले करने के लिए देगा।इसे भी पढ़ें: Riyadh हवाई अड्डे पर हमले में मारे गए भारतीय के अंतिम संस्कार में पहुंचे Ambassador Vipulयही रियाद का सबसे बड़ा खौफनाक धर्म संकट भी है। क्योंकि अगर प्रिंस सलमान अमीरकी लड़ाकू विमानों को अपने एयर स्पेस का इस्तेमाल करने की इजाजत दे देंगे तो इसका सीधा मतलब होगा ईरान के साथ खोली जंग लेना। तेहरान तुरंत अपनी बैलस्टिक मिसाइलों का रुख रिहाद और अरामको की रिफाइनरियों की तरफ मोड़ देगा। वहीं दूसरी तरफ यमन में हूतियों का रुख इस कदर आक्रामक हो चुका है कि वे अब तेहरान की भी नहीं सुनने वाले। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक कई मौकों पर ईरान की सलाह को भी नजरअंदाज करते हुए हूतियों ने अपने अभियानों को अंजाम दिया है। उनका एकमात्र लक्ष्य अब अपने ऊपर लगे सभी ब्लॉकेट को तोड़ना है। त्रेता पारसी ने साफ शब्दों में कहा कि सऊदी अरब इस वक्त एक ऐसे कगार पर खड़ा हुआ है जहां उसके पास सिर्फ और सिर्फ बुरे विकल्प ही बचे हैं। सऊदी अरब औरतियों के बीच सालों से चला आ रहा सीज फायर तब टूटा था जब सऊदी ने कुछ महीने पहले सनाई एयरपोर्ट पर बमबार्डिंग शुरू की। लेकिन इस भयानक तबाही की असली जड़ है डोनाल्ड ट्रंप और इसराइल की ईरान के खिलाफ शुरू की गई वो बेवजह की जंग जिसने पूरे मिडिल ईस्ट को आग के हवाले कर दिया। इसे भी पढ़ें: Houthi Attack On Riyadh Airport | मिड-ईस्ट में भीषण जंग का असर! रियाद एयरपोर्ट 17 अक्टूबर तक बंद, हूथी हमलों के आगे कैसे फेल हुआ सऊदी डिफेंस सिस्टम?सऊदी अरब कितना भी अमीर हो वो सस्ते ड्रोंस के खिलाफ लगातार करोड़ों डॉलर की इंटरसेप्टर मिसाइलें दाग कर लंबे समय तक अपनी अर्थव्यवस्था को तनाव में नहीं रख सकता है। हथियारों की गुणवत्ता, मारक क्षमता, तकनीक और विनाशकारी ताकत के मामले में सऊदी अरब निर्विवादित रूप से हुतियों से मीलों आगे है। लेकिन युद्ध के मैदान में सिर्फ हथियारों की कीमत मायने नहीं रखती है बल्कि उनका इस्तेमाल मायने रखता है। हुतियों ने यह साबित कर दिया कि एक गैर राज्य समूह मोबाइल लॉन्चर, सस्ते ड्रोंस और भूमिगत सुरंगों के सहारे दुनिया की सबसे आधुनिक सेनाओं को भी रणनीतिक गतिरोध में फंसाया जा सकता है। सऊदी अरब हवाई हमलों से हुदी के लॉन्च पैड को नष्ट कर सकता है। लेकिन जब एक ईरान से आने वाली सप्लाई लाइन पूरी तरह से नहीं कट जाती है और जमीन पर राजनीतिक समाधान नहीं निकलता है तब तक केवल बमबारी से इस खतरे को खत्म नहीं किया जा सकता है। 
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