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    स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में बरेली को मिला 26वां स्थान:पिछले साल 7वीं रैंक आई थी, 27 करोड़ रुपए प्रोत्साहन राशि मिली थी

    5 hours ago

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    शहर की हवा साफ करने के दावों के बीच स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 की रैंकिंग ने नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बरेली इस बार 26वें स्थान पर रहा। शहर को 200 में से 165 अंक मिले। पिछले साल बरेली 189.5 अंक के साथ 7वें स्थान पर था। यानी एक साल में शहर की रैंकिंग 19 पायदान गिर गई और स्कोर भी 24.5 अंक कम हो गया। पिछले साल बेहतर प्रदर्शन के लिए बरेली को 27 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि मिलने की बात सामने आई थी। सड़क निर्माण से उड़ रही धूल शहर में चल रहे विकास कार्य भी प्रदूषण बढ़ने की वजह बन रहे हैं। सीएम ग्रिड योजना के तहत कई प्रमुख सड़कों पर काम चल रहा है। कई जगह सड़कें खुदी हैं और निर्माण सामग्री पड़ी हुई है। वाहनों के गुजरने पर धूल के गुबार उठते हैं। सड़क किनारे बाजार और घर होने के कारण लोगों को दिनभर धूल का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल है कि निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव और दूसरे उपाय कितने प्रभावी तरीके से किए जा रहे हैं। खुले में कूड़ा और बिना ढकी ट्रालियां शहर में कूड़ा उठाने से लेकर उसके निस्तारण तक की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। कई जगह डलावघरों से कूड़ा उठाने वाली ट्रालियां पूरी तरह ढकी नहीं होतीं। रास्ते में कचरा गिरने से गंदगी और दुर्गंध फैलती है। कई इलाकों में खुले डलावघर अब भी बड़ी समस्या बने हुए हैं। नियमित सफाई नहीं होने से यहां कूड़ा जमा रहता है, जिसका असर आसपास के वातावरण पर पड़ता है। बाकरगंज में कूड़े के पहाड़ की समस्या बाकरगंज में वर्षों से जमा कूड़े का ढेर शहर की ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। स्मार्ट सिटी बनने के बावजूद शहर में कई जगह खुले डलावघर और कूड़े के ढेर नजर आते हैं। ऐसे में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रैंकिंग गिरना नगर निगम के लिए चेतावनी माना जा रहा है। 27 करोड़ मिलने के बाद भी गिर गई रैंकिंग पिछले साल बेहतर प्रदर्शन के बाद बरेली को 27 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि मिलने की बात कही गई थी। वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सड़कों के किनारे टाइल्स लगाने सहित कई काम प्रस्तावित किए गए थे। इसके बावजूद एक साल में रैंकिंग 7वें से गिरकर 26वें स्थान पर पहुंच गई। इससे इन योजनाओं के जमीनी असर पर भी सवाल उठ रहे हैं। गांधी उद्यान वार्ड में बेहतर काम पूरे शहर की रैंकिंग भले ही नीचे गई हो, लेकिन गांधी उद्यान वार्ड-32 को राज्य स्तरीय वार्ड पुरस्कार मिला है। यहां खुले में कूड़ा जलाने पर रोक और धूल नियंत्रण जैसे उपायों को बेहतर माना गया। इससे साफ है कि शहर में अच्छे काम की मिसाल मौजूद है। अब चुनौती इन व्यवस्थाओं को दूसरे वार्डों में भी लागू करने की है। अब नगर निगम के सामने बड़ी चुनौती बरेली का 19 पायदान नीचे जाना नगर निगम के लिए बड़ा अलर्ट है। शहर की हवा सुधारने के लिए सड़क की धूल, खुले डलावघर और कूड़ा निस्तारण जैसी समस्याओं पर जमीनी स्तर पर काम करना होगा। मेयर डॉ. उमेश गौतम और नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पिछले साल की उपलब्धि को वापस हासिल करने की है।
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