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    सिविल अस्पताल में पहली बार हुई जटिल स्पाइन सर्जरी:रीढ़ की हड्डी में टीबी से था दबाव, पैरालिसिस का खतरा था

    4 hours ago

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    लखनऊ के डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल में न्यूरोसर्जन की तैनाती के बाद पहली बार गंभीर स्पाइन सर्जरी की गई। डेढ़ साल से असहनीय दर्द झेल रही मरीज की सफल सर्जरी कर बड़ी राहत दी है। सिद्धार्थनगर निवासी 37 वर्षीय मरीज की रीढ़ की हड्डी में टीबी के कारण स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ रहा था। उसके दोनों पैरों में स्थायी कमजोरी आ चुकी थी। पैरालिसिस का खतरा भी था। इस बीच परिजन मरीज को लखनऊ के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां करीब दो घंटे चली सर्जरी में L2-L4 स्पाइनल फिक्सेशन किया गया। टाइटेनियम स्क्रू और रॉड के जरिए उसे नया जीवन दिया गया। डेढ़ साल से कमर में था गंभीर दर्द न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि सिद्धार्थनगर के मधुकरपुर गांव निवासी विनय तिवारी करीब डेढ़ साल से कमर के गंभीर दर्द से परेशान थे। जांच और एमआरआई में L3 वर्टिब्रा में टीबी संक्रमण पाया गया। संक्रमण के कारण स्पाइनल कॉर्ड और नसों पर दबाव पड़ रहा था। इससे बाएं पैर की जांघ और घुटने के नीचे की मांसपेशियों की ताकत लगातार कम हो रही थी। डॉक्टरों के मुताबिक, स्थिति बिगड़ने पर दोनों पैरों में गंभीर कमजोरी या पैरालिसिस हो सकता था। मरीज की स्थिति को देखते हुए न्यूरो सर्जरी करने का फैसला लिया गया। टाइटेनियम स्क्रू-रॉड से रीढ़ को किया मजबूत डॉ. विनोद कुमार तिवारी की अगुवाई में ऑपरेशन किया गया। करीब दो घंटे चली सर्जरी में L2-L4 स्पाइनल फिक्सेशन कर टाइटेनियम स्क्रू और रॉड लगाए गए। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत संतोषजनक है। डॉक्टरों के अनुसार उसके पैरों में ताकत लौटनी शुरू हो गई है और वह दोनों पैर चला पा रहा है। कॉरपोरेट हॉस्पिटल में 3 लाख तक आता है खर्चा डॉ. विनोद तिवारी ने बताया कि इस तरह की सर्जरी निजी अस्पताल में कराने पर करीब तीन लाख रुपये तक खर्च हो सकता है। सिविल अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से गंभीर रीढ़ संबंधी बीमारियों वाले मरीजों को कम खर्च में इलाज मिल सकेगा। कम खर्चे में मिल रहा इलाज डॉ. जीपी गुप्ता ने कहा कि रीढ़ की हड्डी की टीबी में समय पर जांच और इलाज जरूरी है। देरी होने पर नसों की कमजोरी बढ़ सकती है और पैरालिसिस का खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि अब ऐसी सभी सर्जरी आसानी से सिविल अस्पताल में हो सकेंगी। सर्जरी में एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. सुनील कुमार सिंह, डॉ. राजेश और डॉ. कासिम की टीम ने सहयोग किया। सिस्टर पूजा और सिस्टर किरण ने भी ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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