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    स्वामी प्रसाद बोले- सरकार दबाव में काम कर रही:यूसीजी कानून, छात्र आत्महत्याओं और बजट पर राष्ट्रपति को सौंपेंगे ज्ञापन

    9 hours ago

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    लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूसीजी कानून, विश्वविद्यालयों में बढ़ते भेदभाव, छात्र आत्महत्याओं और सरकार के कथित दोहरे रवैये को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के नाम पर कानून लाया गया, लेकिन उसके समर्थन में आवाज उठाने वालों के साथ ही सख्ती बरती जा रही है। यूसीजी कानून पर सरकार की मंशा पर सवाल स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में यूसीजी कानून लागू किया, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों में एससी, ओबीसी और अन्य वंचित वर्गों के साथ हो रहे भेदभाव को रोकना है। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि जब सवर्ण समाज के कुछ लोगों ने इस कानून के विरोध में प्रदर्शन किया तो सरकार का रवैया नरम रहा, जबकि कानून के समर्थन में सड़क पर उतरे एससी-ओबीसी समाज के लोगों के साथ पुलिस ने बर्बरता पूर्ण व्यवहार किया। पल्लवी पटेल के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई की निंदा उन्होंने कहा कि हाल ही में विधायक डॉ. पल्लवी पटेल के नेतृत्व में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर जिस तरह पुलिस ने बल प्रयोग किया, वह निंदनीय है और लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध है। मौर्य ने इसे सरकार का दोहरा मापदंड बताते हुए कहा कि इससे स्पष्ट है कि सरकार दबाव में काम कर रही है। छात्र आत्महत्याओं के आंकड़ों पर जताई चिंता राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर सहित कई केंद्रीय संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। एनसीआरबी के अनुसार एक वर्ष में 13,892 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की, यानी प्रतिवर्ष लगभग 13 हजार से अधिक छात्र अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और विश्वविद्यालयों में व्याप्त भेदभाव तथा मानसिक प्रताड़ना इसका बड़ा कारण है। राष्ट्रपति को सौंपेंगे ज्ञापन मौर्य ने घोषणा की कि वे कल महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें मांग की जाएगी कि एससी और ओबीसी छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव पर तत्काल रोक लगाई जाए, यूसीजी कानून को प्रभावी रूप से लागू किया जाए और आंदोलनरत छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार की न्यायिक जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र इस कानून के पक्ष में हैं, लेकिन कुछ विकृत मानसिकता के लोग इसका विरोध कर माहौल बिगाड़ रहे हैं। बजट पर भी साधा निशाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बजट को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह बजट गरीबों और वंचितों के हित में नहीं है। यदि पिछले बजट का लगभग 50 प्रतिशत खर्च ही नहीं हुआ तो नया बजट लाने का क्या औचित्य है। पहले पुराने बजट का समुचित उपयोग किया जाना चाहिए, तभी जनता का वास्तविक भला हो सकेगा। मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया से किया परहेज मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान, जिसमें बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर टिप्पणी की गई थी, पर पूछे गए सवाल के जवाब में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री अक्सर इस प्रकार के बयान देते रहते हैं और इस पर वे विशेष रूप से कुछ नहीं कहना चाहते।
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