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    स्वामी रामभद्राचार्य बोले- रामचरितमानस को राष्ट्रग्रंथ घोषित करे सरकार:बस्ती में भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की मांग की, सामाजिक-राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बनी

    3 hours ago

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    बस्ती जिले के कप्तानगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत बढ़नी स्थित महर्षि वशिष्ठ आश्रम में 18 से 26 फरवरी तक नौ दिवसीय श्री वशिष्ठ रामकथा का आयोजन किया गया। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के श्रीमुख से प्रवाहित इस कथा में नौ दिनों में एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। यह आयोजन धार्मिक प्रवचन के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय विमर्श का भी केंद्र बना। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने व्यासपीठ से रामचरितमानस को राष्ट्रग्रंथ घोषित करने की मांग दोहराई। उन्होंने भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की बात कही और एससी-एसटी व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए सामाजिक एकता पर जोर दिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की 420 प्रकरण संबंधी टिप्पणी पर उन्होंने इसे 'भ्रम' बताया। कथा मंच से कुछ स्थानों के नाम बदलने के प्रस्ताव भी चर्चा में रहे। इनमें बस्ती को "वशिष्ठ नगर", मखौड़ा को "मखपुरम" और बढ़नी मिश्र को "बंधनी" नाम देने का सुझाव शामिल था। इसके साथ ही, वशिष्ठ आश्रम को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया। देखें, 6 तस्वीरें… इस विशाल आयोजन के मुख्य यजमान प्रख्यात उद्योगपति चंद्रभूषण मिश्रा अपने परिवार सहित पूरे समय सक्रिय रहे। आयोजन समिति की कमान राणा दिनेश प्रताप सिंह ने संभाली, जिन्होंने समन्वय और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभाई। इन दोनों की भूमिका ने आयोजन को भव्यता और सुव्यवस्था प्रदान की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिव प्रताप शुक्ला उपस्थित रहे। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, विधायक अजय सिंह और सीए चंद्रप्रकाश शुक्ला सहित कई अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया। सांस्कृतिक संध्याएं, भजन-कीर्तन और पादुका पूजन जैसे कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को राममय बनाए रखा। बस्ती मंडल के तीनों जिलों—बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर—की पुलिस व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे आयोजन में मुस्तैद रही। 26 फरवरी को भव्य भंडारे के साथ कथा की पूर्णाहुति हुई। नौ दिनों की यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं थी, बल्कि आस्था, सामाजिक संवाद और क्षेत्रीय गौरव का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गई, जिसने बढ़नी को आध्यात्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई।
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