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    सावित्री देवी हत्याकांड में 5 आरोपियों को उम्रकैद की सजा:फैसला सुनाते ही भावुक हुआ परिवार, वर्ष 2018 में पैरवी करने पर हुई थी हत्या

    9 hours ago

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    मेरठ के सावित्री देवी हत्याकांड में शनिवार को न्यायालय अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी अमित वीर सिंह ने पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। जैसे ही कोर्ट का फैसला आया, वैसे ही आठ वर्ष से मुकदमे की पैरवी कर रहा मृतका सावित्री का बेटा मीतन भावुक हो गया। इस हत्याकांड में सात आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया है जबकि एक आरोपी की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है। सहायक शासकीय अधिवक्ता एससी-एसटी कोर्ट वैभव कुमार सिंह ने बताया कि सरूरपुर थाना क्षेत्र के हसनपुर रजापुर गांव में वर्ष 2016 में चेतन उर्फ भूरा की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी। गांव में बच्चों के बीच क्रिकेट खेलने को लेकर विवाद हुआ था। इस मुकदमे की पैरवी मृतक चेतन की मां सावित्री देवी करती आ रही थीं। मुकदमे में सुमित जाट व सुजित को नामजद किया गया था। मुकदमे के बाद सावित्री व उसके बेटे मीतन पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा था। 3 फरवरी, 2018 को सावित्री देवी अपने खेत पर काम कर रही थीं। इसी दौरान हमलावरों ने आकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई, जिसमें सावित्री देवी की मौत हो गई। सावित्री ने जताया था जान का खतरा सावित्री पर बेटे चेतन की हत्या के मामले में पैरवी ना करने का दबाव बन रहा था लेकिन वह दबाव में नहीं आई। धमकी का सिलसिला शुरु हुआ तो सावित्री देवी तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी से मिलीं और सुरक्षा की गुहार लगाई। मंजिल सैनी की तरफ से सावित्री के परिवार को सुरक्षाकर्मी उपलब्ध हो गया। इसके तीन दिन बाद ही सावित्री की हत्या कर दी गई। बताया जाता है कि हत्या से कुछ घंटे पहले ही सुरक्षाकर्मी की तबियत खराब हो गई थी और वह छुट्टी पर चला गया था। मामला कई दिन तक जिले में चर्चा का विषय बना रहा। 13 लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट सावित्री देवी की हत्या का मुकदमा उसके बेटे मीतन पुत्र वेदीराम की तरफ से दर्ज कराया गया था। जिस तरह पहले भाई और फिर मां की हत्या कर आरोपी फरार हो गए, उसको लेकर मीतन भी बेहद डरा था। उसको भी पैरवी ना करने की धमकी दी जाने लगी थी। मां व भाई को खो चुके मीतन ने पुलिस अधिकारियों के दफ्तर पर हंगामा भी किया था। पुलिस ने उसे सुरक्षा का भरोसा दिलाया। उसकी तरफ से मामले में अतुल, ब्रह्मा उर्फ राज आर्यन, जगबीर, विपिन, कुलदीप, सुजित, जगपाल, संजय, अशोक, अंकित, मोंटी, मोहन, सुमित को नामजद किया गया। पांच आरोपियों को दिया दोषी करार अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष नयायाधीश, एससी/एसटी एक्ट अमित वीर सिंह की कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन था। बचाव पक्ष की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल बख्शी के द्वारा पैरवी की गई। शुक्रवार को कोर्ट ने अतुल,ब्रह्मा उर्फ राज आर्यन, जगबीर, विपिन और कुलदीप को दोषी पाते हुए हिरासत में लेने के आदेश जारी कर दिए। जबकि सुबूतों के अभाव में जगपाल, संजय, अशोक, अंकित, मोंटी, मोहन, सुमित को दोषमुक्त कर दिया। सुजित की कुछ वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। शनिवार को सुनाया गया फैसला कोर्ट ने शुक्रवार को हत्या का आरोपी पाते हुए अतुल,ब्रह्मा उर्फ राज आर्यन, जगबीर, विपिन और कुलदीप को दोषी करार दिया था और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। शनिवार को यह फैसला सुनाया गया। कोर्ट परिसर में सभी पांच आरोपी मौजूद थे। जैसे ही कोर्ट ने पांचों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, वहां कोर्ट के बाहर हलचल हो गई। बताया जाता है कि आरोपियों को सजा सुनाये जाने के बाद पीड़ित मीतन की आंखें भर आई और वह भावुक होकर आसमान की तरफ देखने लगा। सभी आरोपी पहुंचे सलाखों के पीछे सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस कड़ी सुरक्षा में आरोपियों अतुल, ब्रह्मा उर्फ राज आर्यन, जगबीर, विपिन और कुलदीप को लेकर जेल पहुंची और दाखिल किया। काफी समय से यह आरोपी जमानत पर बाहर चल रहे थे। इनके परिवार के लोगों का भी कोर्ट के बाहर जमावड़ा लगा रहा था जो जेल रोड तक आरोपियों की गाड़ी के पीछे रहे। बाद में पुलिस ने उन्हें लौटा दिया।
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