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    शंकराचार्य से मिलने पहुंचे अखिलेश, जमीन पर बैठे दिखे:लखनऊ में एक घंटे बातचीत की, बोले- नकली संत अब बेनकाब होंगे

    8 hours ago

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    सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से गुरुवार को मुलाकात की। एक घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान अखिलेश जमीन पर बैठे नजर आए। बाहर निकलने पर अखिलेश ने मीडियाकर्मियों से कहा- शंकराचार्य से मिलकर आ रहा हूं। उनके आशीर्वाद से अब नकली संतों का अंत होगा। अब वे लोग भी बेनकाब होंगे, जो धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करते हैं। सबका सच सामने आएगा। शंकराचार्य ने भी मीडिया से बात की। उन्होंने कहा- अखिलेश दर्शन करने के लिए आए थे। उनके साथ सत्संग की बातें हुईं। मुलायम सिंह यादव के समय की बातें भी हुईं। हमने उनको अपनी यात्रा के बारे में बताया। अभी तक हमारे पास सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं आया। कहते हैं कि भाजपा हिंदुओं की पार्टी। जब हम हिंदू की बात करते हैं तो वही नहीं आते हैं, बाकी सब आते हैं। सपा मुखिया अपने आवास से दोपहर 12.30 बजे अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने के लिए निकले और कृष्णा नगर क्षेत्र में प्रवास कर रहे शंकराचार्य के पास पहुंचे। अखिलेश ने दरवाजे पर मिले संतों से हाथ जोड़कर प्रणाम किया। उनसे आशीर्वाद लिया। शंकराचार्य ने बुधवार को लखनऊ से गोरक्षा अभियान का शंखनाद किया था। काशी से 7 मार्च को निकलने के बाद जौनपुर, सुल्तानपुर, सीतापुर होते हुए 10 मार्च को लखनऊ पहुंचे थे। यहां शंकराचार्य की सभा को प्रशासन से 26 शर्तों के साथ अनुमति दी थी। अखिलेश ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा था। अखिलेश ने शंकराचार्य से मिलने के बाद क्या-क्या कहा… 'नया काम शुरू करने से पहले संत-महात्माओं का आशीर्वाद जरूरी' अखिलेश ने कहा- आज मैं शंकराचार्य से मिलने और उनका आशीर्वाद लेने आया था। हमारे यहां परंपरा रही है कि जब भी कोई नया काम शुरू किया जाता है तो सबसे पहले संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया जाता है। मैं भी इसी भावना से उनके पास आया। संतों का आशीर्वाद हमेशा समाज और देश के लिए शुभ होता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। ‘सपा हमेशा से गो-संरक्षण के पक्ष में’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा- सपा हमेशा से गो-संरक्षण के पक्ष में रही है। हमने अपने कार्यकाल में गायों की देखभाल और उनसे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए थे। गाय के दूध का पहला प्लांट समाजवादी सरकार के समय कन्नौज में स्थापित किया गया था। भविष्य में भी गाय की सेवा के लिए जो कुछ कर सकते हैं, वह करेंगे। 'लोग चूल्हे और लकड़ी पर खाना बनाने को मजबूर' उन्होंने कहा- आज देश में लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। BJP की नीतियों और कामकाज से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार के गलत फैसलों का असर आम लोगों के जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों की वजह से लोग फिर से पुराने समय की तरह चूल्हे और लकड़ी पर खाना बनाने को मजबूर हो रहे हैं। 'दोनों डिप्टी CM पर कसा तंज' अखिलेश ने कहा- प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से सरकार ही नहीं चल रही है। हाल ही में RSS की बैठक हुई है। सुनने में आया है कि वहां कहा गया कि दोनों डिप्टी सीएम को डपट के बाहर निकालिए। हो सकता है कि जनता के बीच में जाएं तो जीते ही ना। अब जानिए शंकराचार्य ने क्या-क्या कहा… ‘ब्रजेश पाठक लाठी खाने वाले बटुकों से तो नहीं मिले’ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बटुकों के सम्मान करने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा- हमारे सामने तो नहीं आए। किसी ने उनकी तरफ से आकर कहा होता कि हम आपका सम्मान करते हैं तो हम मान लेते कि उन्होंने ही सम्मान किया। असली सांप निकले तो लोग लाठी से मार डालते हैं। फिर नाग पंचमी आती है तो उसी सांप की फोटो की पूजा करते हैं। प्रतीकों की पूजा करना सरल है, जो प्रत्यक्ष है, उसकी पूजा कठिन है। जिन बटुकों को उनकी पुलिस ने लाठी मारी उनसे तो उन्होंने संवाद किया ही नहीं। बाकी कितने ही बटुक बुलाकर उनके ऊपर फूल बरसा लो, वह सब प्रतीक ही रहेगा। प्रतीक के बहाने राजनीति करते हैं, असल में इनकी राजनीति दिखाई नहीं देती। 'गो-युद्ध में गाय को कष्ट देने वाले को मारूंगा' अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- इस गो-युद्ध में गाय को कष्ट देने वाले वृत्रासुर को मारूंगा। वृत्रासुर कौन है? जो कसाईखाना खोलकर बैठा है, जो गायों को वहां तक लेकर जाता है, जो गायों को वहां तक जाने में सहयोग करता है, जो यह सब होते हुए भी देख रहा है, जिसके राज्य में यह सब हो रहा है, वह वृत्रासुर है। ‘संन्यासी तो केवल कपड़ा है, मन संन्यासी नहीं है’ गो-रक्षा के लिए कानून पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- कानून तो कागजों पर बनता है। उसे धरती पर उतारने के लिए कुछ करना पड़ता है। इस प्रदेश की जिम्मेदारी जिस पर है, प्रदेश में जो कुछ भी हो रहा है, सारी जिम्मेदारी उसी की है। प्रदेश का मुखिया संन्यासी नहीं है। संन्यासी तो केवल कपड़ा है, मन संन्यासी नहीं है। मन न रंगाए, रंगाए जोगी कपड़ा। कपड़ा रंगा लिया, मन रंगा लिया होता तो प्रदेश में सबसे पहला काम गोमाता के लिए होता। गोमाता यहां सुख से रहती। यूपी भी सुखी होता। ‘आप क्या ही कर लोगे, क्या औकात है आपकी?’ डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य का नाम लिए बिना शंकराचार्य ने कहा- आपने गोरक्षा पर बोला कि किसी की औकात नहीं है कि गाय को खरोंच लगा दे। मैं इस यात्रा में आ रहा था तो सुल्तानपुर में सैकड़ों लोगों ने दिखाया कि यहां गाय का सिर मिला था। बिना खरोंच लगे, गला कट गया गोमाता का? आपकी औकात अखबारों में छप गई। फोटो छपी थी कि सुल्तानपुर में गोवंश का कटा सिर मिला। अब बताइए, किसकी औकात? आपकी यही औकात है। आप औकात की बात करते हैं, जबकि खुद की कुछ औकात नहीं है। जिसने एक गाय मारी, उसने वातावरण बिगाड़ने के लिए ऐसा किया होगा या फिर मांस खाने के लिए किया होगा। हो सकता है किसी परिवार या कुछ दुष्टों ने ऐसा किया हो। उसका तो आप कुछ बिगाड़ नहीं पा रहे हो। जो संगठित रूप से यह कर रहा है, आपको चंदा दे रहा है, हजारों-लाखों गायों को काट रहा है, बेच रहा है, उसको पकड़ोगे? उसका आप क्या ही कर लोगे? क्या औकात है आपकी? दरअसल, केशव ने कहा था कि किसी भी अपराधी या हत्यारे की इतनी हैसियत नहीं कि वह गोमाता को नुकसान पहुंचा सके। 'महंत गो-हत्या नहीं रोक पा रहा' गुरु गोरखनाथ से यात्रा शुरू करने पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- गोमाता के लिए काम करना है तो गुरु गोरखनाथ का आशीर्वाद लेना है। गुरु गोरखनाथजी हमको शक्ति दें, इसीलिए हमने दर्शन किए। उनकी ही शक्ति है, जो उनके ही मठ के महंत के खिलाफ भी खड़े हो गए। आखिर कैसे उनके ही मठ का महंत मुख्यमंत्री जैसे पद पर रहकर गोरक्षा नहीं कर पा रहा है। वह भी उन्हें नहीं पसंद कर रहे हैं कि उनकी गद्दी का महंत गो-हत्या नहीं रोक पा रहा है। 'अखिलेश से बोले- तब तक राजनीति वाला आशीर्वाद नहीं दे पाएंगे' शंकराचार्य ने कहा- हमने अखिलेश यादव से कहा कि बंधु आप आए हो, अच्छी बात है। जब तक आपकी पार्टी से गोरक्षा के लिए स्पष्ट प्रस्ताव नहीं आएगा, तब तक राजनीति वाला जो आशीर्वाद है, उसे नहीं दे पाएंगे। यह बात मैंने उनसे साफ कही। इस पर उन्होंने कहा कि मैं इस पर विचार कर रहा हूं। मैं यदुवंशी हूं। मैं खुद गोसेवा करता हूं। आपका पार्टी के रूप में और भावी सरकार के रूप में तभी विश्वास किया जा सकता है, जब आप इसका प्रस्ताव दें। शंकराचार्य को लेकर जारी विवाद का ताजा मामला विस्तार से पढ़िए- प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने सुनवाई की तारीख 9 मार्च तय की। तब तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। शंकराचार्य विवाद में एक-दूसरे पर हमलावर रहे हैं योगी-अखिलेश ------------------------ ये खबर भी पढ़िए- भीड़ कम होने पर शंकराचार्य बोले-यह शराब की दुकान नहीं:मुझे सपा समर्थक कहते हैं, मेरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा भाजपाई हैं शंकराचार्य ने लखनऊ में गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान का शंखनाद किया। इसके बाद उन्होंने सभा को संबोधित किया। शंकराचार्य ने कहा- यह शराब की दुकान नहीं, ये सभा शुद्ध गाय की दुकान है। यहां ज्यादा भीड़ हो जाती तो इसका मतलब होता यह शराब की दुकान है। यहां कम भीड़ है, इसी से पता चल रहा है कि यह शुद्ध गाय के दूध की दुकान है। पूरी खबर पढ़िए
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