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    शिवाजी स्मारक-एक महीने में हो जाएगा जमीन अधिग्रहण:महाराष्ट्र के सीएम ने अगली जयंती तक काम शुरू करने का किया है दावा

    1 hour ago

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    खबर के शुरुआत में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस के 2 सालों में दिए गए उन दो बयानों को पढ़िये जो उन्होंने आगरा किले में शिवाजी महाराज की जयंती पर दिए… हम आगरा के कोठी मीना बाजार में यूपी सरकार की मदद से छत्रपति शिवाजी महाराज का भव्य स्मारक बनाएंगे। ये इतना भव्य और आकर्षक होगा कि दुनियाभर के टूरिस्ट ताजमहल से पहले इसे देखने आएंगे। 19 फरवरी 2025 जमीन अधिग्रहण का काम यूपी सरकार तेजी से कर रही है। अगले साल जब हम छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मना रहे होंगे तब तक उनके स्मारक का काम शुरू हो जाएगा। 19 फरवरी 2026 अब जानिये इन दो बयानों के बीच क्या-क्या कवायद हो चुकी है... महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस के पहले बयान के बाद योगी सरकार एक्शन में मोड में आ गई। आनन-फानन में कोठी मीना बाजार का सर्वे कराया गया और फिर इसके अधिग्रहण के आदेश दिए गए। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के सकारात्मक रुख को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी देरी नहीं की। प्रशासन की ओर से कोठी मीना बाजार के अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। अधिग्रहण की प्रक्रिया 90% पूरी हो चुकी है। डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी का दावा है कि लगभग एक से सवा महीने के बाद शिवाजी स्मारक के लिए कोठी मीना बाजार का अधिग्रहण हो जाएगा। अब विस्तार से पढ़िये... आगरा के कोठी मीना बाजार पर छत्रपति शिवाजी महाराज का स्मारक महाराष्ट्र सरकार बनाएगी। यूपी सरकार इसके लिए जमीन कोठी का अधिग्रहण करेगी और महाराष्ट्र सरकार यहां स्मारक बनाएगी। हालांकि राजा जयकिशन दास की कोठी सहित स्मारक के लिए प्रस्तावित जमीन पर मालिकाना हक का विवाद चल रहा है। इसके बावजूद सरकार इस जमीन का अधिग्रहण कर रही है। ऐसे में जमीन का पैसा सरकार न्यायालय में जमा कराएगी। डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि जमीन का फैसला जिसके पक्ष में होगा, वह न्यायालय से प्राप्त कर लेगा। यूपी सरकार ने कोठी मीना बाजार में शिवाजी स्मारक के लिए राजा जयकिशन दास की कोठी सहित 2946 वर्गमीटर जमीन खरीदने के लिए फिलहाल 9 करोड़ रुपये स्वीकृत भी कर दिए हैं। 19 फरवरी 2025 को महाराष्ट्र के CM की थी घोषणा कोठी मीना बाजार में शिवाजी महाराज का स्मारक बनाने की घोषणा सबसे पहले 19 फरवरी 2025 को महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने आगरा किला में की। इसके बाद यूपी सरकार ने भी तेजी दिखाते हुए यहां शिवाजी स्मारक बनाने की घोषणा कर दी। कुछ महीनों तक दोनों सरकारें अपने-अपने स्तर से कोठी मीना बाजार में शिवाजी स्मारक बनाने का दावा करती रहीं। ऐसे में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी कि यहां कौन सी सरकार शिवाजी स्मारक बनाएगी। इस संशय की स्थिति से पर्दा 26 मई 2025 को यूपी सरकार के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने उठाया। उन्होंने आगरा में बताया कि कोठी मीना बाजार पर प्रस्तावित शिवाजी स्मारक को महाराष्ट्र और यूपी सरकार दोनों मिलकर बनाएंगी। कैसे दोनों सरकारें मिलकर बनाएंगी स्मारक स्मारक के लिए उत्तर प्रदेश सरकार इस जमीन को खरीदेगी और महाराष्ट्र की सरकार यहां निर्माण कार्य करेगी। इस तरह से दोनों सरकारें यहां शिवाजी समारक बनाएंगी। इस संबंध में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बीच बातचीत हो गई है। जिस जगह पर शिवाजी स्मारक प्रस्तावित है, उस जगह को लेकर कोर्ट में मामला विचाराधीन है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार जमीन की कीमत की रकम कोर्ट में जमा करा देगी। बाद में जो भी पक्ष केस जीतेगा, कोर्ट उसे यह रकम सौंप देगी। कोठी पर लिखा- राजा जय किशन दास भवन बरामदे के बीच वाले हॉल के गेट के ऊपर लिखा है-राजा जयकिशन दास भवन। कोठी मीना बाजार में 14 बड़े-बड़े हॉल हैं। इनमें से 1-2 खुले हुए हैं, बाकी पर ताला लगा हुआ है। जो कि कभी-कभी साफ-सफाई के लिए ही खुलता है। ये हॉल खाली हैं। इनमें कोई सामान नहीं है। कोठी के चारों ओर पाथ वे है। कोठी किसकी है, कैसे मालिक बदले, ये जानिए... 1803 तक अंग्रेजों के कब्जे में रही कोठी डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर सुगम आनंद कहते हैं- कोठी मीना बाजार के टीले पर बना मकान वर्ष 1803 में अंग्रेजों के कब्जे में आया। पुराने जर्जर भवन को तोड़कर वर्ष 1837 में नई कोठी बनाई गई, जिसे गर्वनर हाउस कहा गया। यहां तत्कालीन गर्वनर जनरल का आवास बना। 1857 तक यह अंग्रेजों की संपत्ति रही। तब यूपी की राजधानी आगरा थी। 1857 की क्रांति के बाद यूपी की राजधानी इलाहाबाद बना दी गई। इसके बाद यह कोठी नीलाम हो गई। जिसे राजा जय किशन दास ने खरीदा। अब यह संपत्ति पाठक वृंदावन चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम है। मीना कोठी और छत्रपति शिवाजी से जुड़ा इतिहास जानिए… औरंगजेब ने मीना कोठी में कैद रखा प्रो. सुगम ने बताया- छत्रपति शिवाजी महाराज अपने बेटे संभाजी के साथ 12 मई, 1666 को आगरा पहुंचे थे। मुगल बादशाह औरंगजेब शिवाजी महाराज के पराक्रम से परेशान था, इसीलिए उसने उनसे संधि करने की योजना बनाई। शिवाजी महाराज ने भरे दरबार में अपनी नाराजगी जाहिर की। औरंगजेब के सैनिकों ने छल से शिवाजी महाराज और उनके बेटे संभाजी को बंदी बना लिया था। इतिहास संकलन समिति ने शिवाजी से जुड़ी इस कहानी पर रिसर्च किया। दावा किया कि औरंगजेब ने 12 मई, 1666 को शिवाजी महाराज को राजा जयसिंह के बेटे राम सिंह की छावनी के पास सिद्धी फौलाद खां की निगरानी में नजरबंद करने का आदेश किया था। 16 मई, 1666 को शिवाजी महाराज को रदंदाज खां के मकान पर ले जाने का आदेश हुआ। राम सिंह की छावनी के पास स्थित फिदाई हुसैन की शहर के बाहर टीले पर स्थित हवेली में शिवाजी को रखा गया। राम सिंह की हवेली कोठी मीना बाजार के नजदीक थी। यह जगह अभिलेखों में आज भी कटरा सवाई राजा जयसिंह के नाम से दर्ज है। यही कोठी मीना बाजार है। प्रोफेसर बोले- इतिहास से मेल खाती है मीना कोठी मीना कोठी को लेकर डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर सुगम आनंद कहते हैं- शिवाजी महाराज को फिदाई हुसैन की हवेली में कैद किया गया था। जोकि आगरा के बाहर टीले पर एक हवेली है, जो राम सिंह की छावनी के पास भी थी और शिवाजी के बंदीगृह के भौगोलिक विवरण से मेल खाती है। फिदाई हुसैन का मकान यानि कोठी मीना बाजार के टीले पर बना मकान सन 1803 में अंग्रेजों के कब्जे में आया और पुराने जर्जर मकान को तोड़कर नई कोठी बनाई गई। जिसे गवर्नर हाउस कहा गया। सन 1857 तक यह स्थान अंग्रेजों की संपत्ति रहा। अब यूपी सरकार इस जगह को लेकर बदलाव करने की तैयारी में है। जल्द कुछ बदलाव दिखने लगेंगे। छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक के लिए जमीन अधिग्रहण का काम लगभग एक से सवा महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शासन के निर्देश के बाद तय होगी।अरविंद मल्लप्पा बंगारी, डीएम आगरा
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