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    शिवदीनपुरवा में संस्कारों की पाठशाला:जगाई शिक्षा की अलख, बच्चों को बताया- क्यों मनाई जाती है होली?

    3 hours ago

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    शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कारों और सामाजिक सरोकारों का संगम है। इसी ध्येय को चरितार्थ करते हुए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की इकाई-3 'विवेकानंद' ने गुरुवार को ग्रामीण अंचल में ज्ञान की ज्योति जलाई। विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों ने ग्राम शिवदीनपुरवा के प्राथमिक विद्यालय में एक दिवसीय विशेष शिविर लगाकर न केवल बच्चों को आधुनिक शिक्षा का महत्व समझाया, बल्कि उन्हें भारतीय गौरवशाली परंपराओं के साथ भी जोड़ा। किताबी ज्ञान के साथ रची-बसी सांस्कृतिक विरासत शिविर की शुरुआत स्वयंसेवकों और प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के बीच आत्मीय संवाद से हुई। एनएसएस की टीम ने बच्चों को खेल-खेल में यह समझाया कि शिक्षा उनके भविष्य की चाबी कैसे बन सकती है। स्वयंसेवकों ने बच्चों के मानस पटल पर भारतीय संस्कृति की गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने बच्चों को बताया कि हमारी लोक कथाएं और नैतिक मूल्य ही हमें एक बेहतर इंसान बनाते हैं। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। होली के बहाने समझाया अच्छाई की जीत का फलसफा आने वाले रंगों के पर्व होली को केंद्र में रखकर स्वयंसेवकों ने बच्चों को एक बेहद महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाया। उन्होंने विस्तार से बताया कि होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। बच्चों को प्रहलाद और होलिका की ऐतिहासिक और धार्मिक कथा सुनाते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। स्वयंसेवकों ने जोर देकर कहा कि होली का असली मकसद आपसी भेदभाव मिटाकर भाईचारा और प्रेम बढ़ाना है। यह उत्सव समाज में सकारात्मक ऊर्जा और संबंधों को मजबूत करने का जरिया है। संकल्प और प्रेरणा के साथ हुआ समापन सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रेरक प्रस्तुतियों ने ग्रामीण बच्चों का मन मोह लिया। नन्हे विद्यार्थियों ने भी पूरी ऊर्जा के साथ इन गतिविधियों में हिस्सा लिया और अंत में यह संकल्प लिया कि वे अपनी संस्कृति को सहेजने और समाज हित में काम करने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। स्वयंसेवकों ने बच्चों को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देते हुए उन्हें संस्कारों के मार्ग पर अडिग रहने की सीख दी।
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