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    SIR में नाम कटे तो दोबारा जुड़वाना आसान:फॉर्म-6 से 2003 वाला सवाल हटाया; माता-पिता का रिकॉर्ड नहीं खोजना होगा; बदलाव के मायने

    1 day ago

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    चुनाव आयोग ने SIR पूरा हो चुके राज्यों में फॉर्म-6 में बड़ा बदलाव किया है। अब SIR में नाम कटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी नहीं देनी होगी। आवेदक को यह बताने की जरूरत नहीं होगी कि उसका, माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस लिस्ट में था या नहीं। फॉर्म-6 से इससे जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नाम बिना जांच के जुड़ जाएगा। वोटर बनने की पात्रता की जांच पहले की तरह होगी। फॉर्म-6 की सामान्य प्रक्रिया भी जारी रहेगी। यह बदलाव फिलहाल सिर्फ उन राज्यों में लागू है, जहां SIR पूरा हो चुका है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस पर आपत्ति जताई थी। फॉर्म 6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए होता है। 5 सवाल-जवाब में जानिए नए बदलाव के मायने 1. सवाल: मेरा नाम SIR में कट गया है। अब दोबारा नाम जुड़वाने के लिए क्या 2003 की वोटर लिस्ट में माता-पिता का नाम बताना होगा? जवाब: नहीं। जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां फॉर्म-6 से SIR वाला अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है। इसलिए नाम दोबारा जुड़वाने के लिए यह बताना जरूरी नहीं होगा कि आपका या माता-पिता का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में था या नहीं। 2. सवाल: क्या जिन लोगों के नाम SIR में कटे हैं, उनके नाम बिना जांच के वापस जुड़ जाएंगे? जवाब: नहीं। घोषणा-पत्र हटने का मतलब जांच खत्म होना नहीं है। Form 6 की सामान्य प्रक्रिया और मतदाता बनने की पात्रता की जांच पहले की तरह रहेगी। 3. सवाल: जो पहली बार वोटर बनने जा रहे हैं, उन्हें इसका क्या फायदा होगा? जवाब: उन्हें भी फॉर्म-6 भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी का 2003 की वोटर लिस्ट से जुड़ा विवरण देने की अतिरिक्त घोषणा नहीं करनी होगी। इससे पहली बार नाम जुड़वाने की प्रक्रिया आसान होगी। 4. सवाल: फिर 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी की जरूरत ही नहीं रहेगी? जवाब: ऐसा नहीं है। पुरानी वोटर लिस्ट SIR की प्रक्रिया में रिकॉर्ड की जांच और मिलान के लिए इस्तेमाल हो सकती है। बस फॉर्म-6 में उससे जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र देना जरूरी नहीं रहेगा। 5. सवाल: आखिर इस बदलाव का सीधा फायदा किसे होगा? जवाब: दोनों तरह के वोटर्स को, जिनका नाम SIR में कट गया है और जो पहली बार वोटर बन रहे हैं। दोनों के लिए फॉर्म-6 की प्रक्रिया से एक अतिरिक्त घोषणा हट गई है। खासकर नए वोटर्स के लिए यह आसान होगा, क्योंकि उन्हें पुराने वोटर रिकॉर्ड में माता-पिता या दादा-दादी का नाम खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रिपोर्ट- दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी SIR प्रक्रिया के बारे में जानें… 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ SIR SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई। तीसरा फेज: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में SIR चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- SIR पर 2 चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई:आयोग बोला- यह सामान्य प्रक्रिया; राहुल ने कहा- वोट चोरी में शामिल, तो नहीं बख्शेंगे चुनाव आयोग ने बुधवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों में मतभेद से जुड़ी रिपोर्ट को खारिज कर दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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