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    Sonam Wangchuk Hunger Strike | सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 19वां दिन, गिरते स्वास्थ्य के बीच 20 जुलाई को 'संसद चलो' का आह्वान

    13 hours ago

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    "मेरी हालत अच्छी नहीं है, लेकिन बहुत खराब भी नहीं है।" कमजोर आवाज और ढलते शरीर के साथ यह बात शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कल देर रात जंतर-मंतर से जारी एक वीडियो संदेश में कही। NEET परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज 19वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। इस आंदोलन को 19 जून को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम के एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक ग्रुप ने अपने फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई में शुरू किया था, जो अब एक बड़े जनांदोलन का रूप ले चुका है।इसे भी पढ़ें: Puri Rath Yatra 2026 | 13,000 जवान और NSG कमांडो तैनात, जलभराव रोकने को लगे पंप, पुरी रथ यात्रा के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतज़ाम CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) द्वारा जारी नवीनतम मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, 59 वर्षीय वांगचुक "बहुत कमजोर" हैं और 24 घंटे मेडिकल निगरानी में हैं। उनका वजन घटकर 57.15 किलोग्राम हो गया है; पिछले 24 घंटों में इसमें 400 ग्राम की कमी आई है और उपवास शुरू करने के बाद से अब तक लगभग 8.9 किलोग्राम वजन कम हुआ है।उनका ब्लड प्रेशर 105/76 mmHg, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन सैचुरेशन 97% दर्ज किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि वे होश में हैं और मानसिक रूप से सतर्क हैं, लेकिन उन्हें लगातार निगरानी की आवश्यकता है।इसे भी पढ़ें: FIFA World Cup | Argentina vs England Semifinal | Lionel Messi का मैजिक... इंग्लैंड को हराकर फाइनल में पहुंची अर्जेन्टीना, स्पेन से होगी भिड़ंत वीडियो मैसेज में वांगचुक ने समर्थकों से यह भी आग्रह किया कि वे उनसे उपवास खत्म करने के लिए न कहें, बल्कि 20 जुलाई को संसद तक संगठन के नियोजित "चलो संसद" मार्च में शामिल हों। उन्होंने कहा, "मुझसे उपवास तोड़ने के लिए कहने के बजाय, कृपया 20 जुलाई को मेरे साथ शामिल हों... संसद तक शांतिपूर्ण मार्च में।"इस विरोध प्रदर्शन में वांगचुक अकेले नहीं हैं। छात्र संगठनों के सदस्यों सहित कई अन्य लोग भी जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर हैं। एक अलग मंच पर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नेता नेहा, मनीष और आमीन ने खराब होती सेहत के बावजूद अपना उपवास जारी रखा। AISA ने बताया कि उपवास के दौरान नेहा का वजन 5.85 किलोग्राम कम हुआ है, जबकि मनीष और आमीन का वजन क्रमशः 8.2 किलोग्राम और 8.3 किलोग्राम कम हुआ है; तीनों का ब्लड शुगर लेवल कम दर्ज किया गया है।छात्र संगठन ने यह भी बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद JNUSU के संयुक्त सचिव दानिश, JNU बराक हॉस्टल के अध्यक्ष ऋषिकेश और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नेता दीपक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राजनीतिक नेताओं ने वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील कीइस विरोध-प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिला है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार को वांगचुक से अपना अनशन खत्म करने की भावुक अपील की। ​​उन्होंने कहा कि इस अनशन ने "देश की अंतरात्मा को जगा दिया है" और छात्रों के मुद्दों की लड़ाई अब संसद में ले जानी चाहिए।थरूर ने एक खुले पत्र में लिखा, "श्री सोनम वांगचुक-जी से मेरी दिली अपील है: कृपया अपना अनशन खत्म करें। आपने देश की अंतरात्मा को जगा दिया है; अनशन का मकसद यही होता है। आगे के लंबे सफर के लिए भारत को आपकी आवाज़ की ज़रूरत है।"इससे पहले मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की थी। वहीं, अभिनेत्री ज़ीनत अमान ने सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील की।गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला और अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी जंतर-मंतर पर विरोध स्थल का दौरा किया और अपना समर्थन जताया।इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें वांगचुक के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता की मांग की गई है। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार से उन्हें अस्पताल ले जाने और ज़रूरी इलाज (ज़रूरत पड़ने पर ज़बरदस्ती खाना खिलाने सहित) मुहैया कराने का आग्रह किया गया है, क्योंकि उनकी सेहत बिगड़ रही है।सोमवार को 1,800 से ज़्यादा कलाकारों, शिक्षाविदों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक खुला पत्र जारी कर प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की, क्योंकि उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता बढ़ रही थी।पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह, लेखिका अरुंधति रॉय, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़, शिक्षाविद जयंती घोष, स्कॉलर निवेदिता मेनन और शिक्षाविद अनुराधा चेनॉई शामिल थे। उन्होंने कहा कि वे प्रधान के इस्तीफ़े की मांग का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे आगे की "लंबी और ज़्यादा मुश्किल लड़ाई" के लिए अपनी ताकत बचाकर रखें। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन 19 जून को CJP नाम के एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक ग्रुप ने शुरू किया था। इसके फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई में, CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की है। उनका कहना है कि NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ियों—जिनमें पेपर लीक भी शामिल है, जिससे काफ़ी विवाद हुआ और दोबारा परीक्षा करानी पड़ी—के लिए वे ही ज़िम्मेदार हैं।अगला पड़ाव: संसदअपने अभियान को और तेज़ करते हुए, CJP ने एक दिन की सामूहिक भूख हड़ताल की घोषणा की है। साथ ही, उन्होंने नागरिकों से 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने की अपील दोहराई है। वे एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, बार-बार पेपर लीक होने के लिए जवाबदेही और शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग कर रहे हैं। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi  
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