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    SSP बोले- मेरे सपोर्टर एक और विरोधी दो पौधे लगाएं:मेरठ में विपक्ष ने कहा- अफसर नहीं, नेताओं जैसी भाषा बोल रहे; दलितों को मानते हैं अपना विरोधी

    7 hours ago

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    मेरठ में प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करने वाले एसएसपी अविनाश पांडेय का एक बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जो उनके समर्थन में हैं, वे एक पौधा लगाएं और जो विरोध में हैं, वे दो पौधे लगाएं। एसएसपी के इस बयान को लेकर दलित संगठनों और विपक्षी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि एसएसपी ने अपने विरोधियों के रूप में दलित समाज को निशाना बनाया है, जिससे नाराजगी बढ़ गई है। हालांकि, दैनिक भास्कर से बातचीत में एसएसपी अविनाश पांडेय ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि मेरा कोई विरोधी नहीं है। कुछ लोग केवल मुझसे नाराज हैं, इसलिए वो दो पेड़ लगाकर अपनी ऊर्जा को सही जगह प्रयोग करें। पढ़िए पूरी बातचीत….. अब हूबहू पढ़िए SSP अविनाश पांडेय ने जो अपील की… SSP अविनाश पांडेय ने कहा- देखिए, जो भी लोग विरोध में और जो लोग सपोर्ट में हैं मैं उनसे अपील करना चाहूंगा कि भारत का संविधान 'हम भारत के लोग' से शुरू होता है। वह किसी जाति पाति, किसी समुदाय की बात नहीं करता है। जो भी एक्शन हुआ है, वह अपराधियों पर हुआ है। हर चीज के साक्ष्य हमारे पास मौजूद हैं। जो भी कार्रवाई हुई है, उसकी जो आवश्यकता थी, उस सभी चीज के साक्ष्य हमारे पास मौजूद हैं। जो अपने आप को बाहर से आकर यहां अनावश्यक प्रकार की बातें कर रहे थे, उन सभी के विरुद्ध हमारे पास साक्ष्य मौजूद हैं। जो लोग पर्सनल कमेंट कर रहे उनकी मैं काउंसलिंग करूंगा एसएसपी ने कहा- जो लोग मेरे लिए पर्सनल कमेंट कर रहे हैं, उनकी मैं काउंसलिंग करूंगा, उनको समझाने का प्रयत्न करूंगा। लेकिन जो लोग वर्दी की गरिमा को या कानून व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास करेंगे, उनको बिल्कुल क्षमा नहीं किया जाएगा, उन पर सख्त से सख्त कानूनी जो विधि और संविधान सम्मत कार्रवाई है, वह की जाएगी। उन्होंने कहा- आखिरी में मैं एक अपील यह अवश्य करना चाहूंगा कि जो लोग मेरे सपोर्ट में हैं, वह आगामी वृक्षारोपण महोत्सव में एक पेड़ लगाएं, अपने आसपास पॉलिथीन न फैलाए। और जो लोग मेरे विरोध में हैं, मेरे गुस्से में हैं, मैं उनसे भी अपील करना चाहूंगा कि वह दो पेड़ लगाएं। अपने गुस्से को समाज के लिए यूज़ करें, न कि किसी जाति विशेष की बात करने में या कानून व्यवस्था खराब करने वाले अपराधियों का साथ देने में। इसमें अपनी ऊर्जा खर्च न करें। समाज को सुंदर और बेहतर बनाने में, कानून व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने में हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि आगे आने वाली पीढ़ी के लिए हम लोग कैसा समाज देकर जा रहे हैं, उसके लिए हम लोग सभी लोग प्रयास करें। यही मेरी अपील रहेगी। और जो लोग धमकी दे रहे हैं, उनसे मैं यही अपील करूंगा कि अगर कोई बात उन्हें समझनी है, तो हमसे आकर समझ लें। सारी चीज़ें वीडियो साक्ष्य में मौजूद हैं, उनको संतुष्ट किया जाएगा। अब पढ़िए विभिन्न दलों के नेताओं की बात … एसएसपी खुद को 'सिंघम' कहलाना पसंद करते हैं पूर्व राज्यमंत्री मुकेश सिद्धार्थ ने कहा- मेरे बेटे हिमांशु को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। उस पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है। मुझे अपने बेटे की गिरफ्तारी का दुख नहीं है, लेकिन दुख इस बात का है कि जो लोग वैधानिक मांग को लेकर कलेक्ट्रेट गेट के बाहर शांतिपूर्वक बैठे थे, उन्हें पीटा गया। उन्होंने कहा- ये दलितों को पीटना चाहते थे। एसएसपी खुद को 'सिंघम' कहलाना पसंद करते हैं और सिंघम बनना चाहते हैं। उन्होंने पुलिस की आड़ में दलितों पर अत्याचार किया है। वे दलितों को ही अपना विरोधी मानते हैं, इसलिए ऐसा बयान दिया है। मुकेश सिद्धार्थ ने कहा- पेड़ तो हम पहले से ही लगाते हैं, लेकिन एसएसपी साहब बताएं कि उन्होंने कितने पेड़ लगाए हैं? हमने अभी 500 पेड़ लगाए हैं। एसएसपी आंदोलन को कुचलना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे। सिर्फ दलित लोग जेल चले जाएं, इसलिए उन पर ऐसी धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। वे नहीं चाहते कि जाति विशेष के लोग आगे बढ़ें। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बोले- जातिवाद उनके सिर पर हावी है आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रविंद्र भाटी ने कहा कि यदि कोई संविधान से ऊपर उठकर, लोकतंत्र में अपने पद का दुरुपयोग करके ये करे तो गलत है। अगर कोई न्याय मांगने आए और उसे एक कप्तान इस तरह से मारे तो गलत है, ऐसी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। हमने तो कप्तान से कहा कि हमें दो पौधे दें और आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। ऐसे अफसरों की या तो ट्रेनिंग में कहीं कमी है। या फिर जातिवाद उनके सिर पर हावी है। अगर एसएसपी ऐसा करेंगे तो सीओ, एसएचओ क्या करेंगे। पेड़ लगाने से गलतियों में सुधार नहीं होता बसपा जिलाध्यक्ष मोहित जाटव ने कहा कि ये बेकार के बयान है, इनसे काम नहीं चलता। उन्हें संविधान के अनुसार काम करना चाहिए। ये पद बहुत गरिमामयी पद है। हर किसी की निगाह वहां लगी रहती है कि हमें इंसाफ मिलेगा। अगर पेड़ लगाने से या न लगाने से इंसाफ मिलता तो एसएसपी की कुर्सी पर कप्तान क्यों बैठते। अगर अपनी गलतियों को पेड़ लगाने से सुधार हो जाए तो एक आदमी हजार, लाख पेड़ लगा सकता है। बंदीवाहन में लोगों के साथ मारपीट करने की क्या आवश्यकता थी? वो प्रदर्शनकारी हैं अपना हक मांग रहे हैं, वो सिर्फ एसएसपी, डीएम को अपना ज्ञापन देना चाहते थे। पौधा लगाने से समाधान नहीं होता। विरोधी कहकर प्रदर्शन करने वालों को टारगेट किया जा रहा हैथ। जो जाटव समाज के लोग अन्य दलों में नहीं हैं, उन पर मंत्रालय भी हैं वो बोलने को राजी नहीं हैं, उनको सांप सुंघा हुआ है। इसलिए यहां विरोधी केवल वो हैं जिन पर मुकदमे हुए हैं। जिनकी सरकार है, जिन पर ताकत है उनको भी इस मामले को देखना चाहिए। ये तो नेताओं के बयान हैं, चुनाव की तैयारी में कप्तान साहब हस्तिनापुर से सपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने कहा- अगर गरीब और दलित समाज के लोग न्याय की मांग लेकर जाते हैं और उनके साथ मारपीट की जाती है, तो यह पूरे समाज का अपमान है। क्या एसएसपी ऐसे बयान देकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं? विरोधी नेताओं के होते हैं, किसी प्रशासनिक अधिकारी के नहीं। एक पुलिस कप्तान का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि लोगों को समर्थक और विरोधी बताना। एक अधिकारी को इस तरह की राजनीतिक भाषा नहीं बोलनी चाहिए। 'एक पौधा लगाएं, दो पौधे लगाएं' जैसी बातें किसी पुलिस अधिकारी के बजाय नेताओं की भाषा लगती हैं। अगर एसएसपी विरोधियों की बात कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि वे धरना-प्रदर्शन करने वाले दलित समाज के लोगों को अपना विरोधी मान रहे हैं। जिन लोगों पर लाठीचार्ज हुआ और थप्पड़ मारे गए, वे ज्यादातर दलित समाज से थे। उन्होंने कहा- ऐसे बयान यह संदेश देते हैं कि एसएसपी निष्पक्ष अधिकारी की बजाय राजनीतिक सोच के साथ काम कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को किसी भी वर्ग या समुदाय के प्रति भेदभाव का संदेश देने वाले बयान देने से बचना चाहिए। एसएसपी अविनाश पांडेय बोले- मेरा कोई विरोधी नहीं, कुछ लोग सिर्फ नाराज हैं दैनिक भास्कर से बातचीत में एसएसपी अविनाश पांडेय ने कहा- मेरा कोई विरोधी नहीं है। कुछ लोग सिर्फ मुझसे नाराज हैं, इसलिए मैंने उनसे दो पौधे लगाने की अपील की है। जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनके पास ज्यादा ऊर्जा है। वे उस ऊर्जा का इस्तेमाल समाजहित में करें और दो पौधे लगाएं। वहीं, जो लोग समर्थन में हैं, वे एक पौधा लगाएं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी ऊर्जा अच्छे कामों में लगाएं, क्योंकि हम तो अपनी ड्यूटी कर रहे थे। एसएसपी ने कहा- न कोई मेरा समर्थन करे और न विरोध। सभी लोग अपना-अपना काम करें और अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएं। जो लोग नाराज होकर अपनी ऊर्जा इधर-उधर खर्च कर रहे हैं, वे उसे समाज के लिए उपयोगी कार्यों में लगाएं। जो पुलिसकर्मी पौधे लगा रहे हैं, वे ईमानदारी से अपनी ड्यूटी भी करें उन्होंने पुलिसकर्मियों से भी अपील करते हुए कहा- जो पुलिसकर्मी पौधे लगा रहे हैं, वे ईमानदारी से अपनी ड्यूटी भी करें। यही उनका सबसे बड़ा दायित्व है। जिन लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनकी विवेचना उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। जब उनसे पूछा गया कि वे किसे अपना विरोधी मानते हैं, तो उन्होंने कहा-मुझे नहीं लगता कि कोई मेरा विरोधी है। कुछ लोग बस मुझसे नाराज हैं। पूरे मामले की जांच चल रही है और जांच में कुछ गंभीर तथ्य भी सामने आ रहे हैं। ------------------- ये खबर भी पढ़ें यूपी में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक बने:सरकार ने कहा- बड़े फैसले नहीं ले पाएंगे; प्रधानों की नियुक्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेंडिंग यूपी सरकार ने प्रधानों के बाद पहली बार अब सभी मौजूदा 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बना दिया है। पंचायती राज विभाग ने शुक्रवार की शाम 7:30 बजे आदेश जारी कर दिया। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बताया- जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल शनिवार, 11 जुलाई को समाप्त हो रहा था। इससे पहले सरकार ने उन्हें प्रशासक बना दिया है। पढ़िए पूरी खबर
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